खुलासा: उन्नाव रेप कांड में सिपाही से लेकर एसपी तक कर रहे थे आरोपी विधायक की मदद
उन्नाव प्रकरण में पुलिस की भूमिका सबसे ज्यादा संदेह के घेरे में है। सिपाही से लेकर एसपी और उनकी मॉनिटरिंग कर रहे लखनऊ में बैठे अधिकारी तक सभी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उनके परिवार को बचाने का प्रयास करते रहे। विधायक का एक फोन इन पुलिसकर्मियों के लिए फरमान होता था। सीबीआई की पूछताछ के दौरान विधायक ने यह बात मानी है कि उन्होंने पुलिस अफसरों को फोन किया था।
सीबीआई के अफसरों ने जब विधायक से पूछा कि मारपीट की घटना वाले दिन वह बार-बार एसपी उन्नाव को फोन करके क्या कह रहे थे? जवाब में सेंगर ने कहा, मैं जनप्रतिनिधि हूं। मैं एसपी, डीएम, एडिशनल एसपी और तमाम थानेदारों को क्षेत्र के लोगों के लिए फोन करता रहा हूं।
एसपी ने डाला था समझौते का दबाव
वहीं, पीड़िता के चाचा का आरोप है कि उन्नाव की एसपी पुष्पांजलि ने भी पीड़ित पक्ष पर समझौते का दबाव बनाया था। माखी के तत्कालीन थाना प्रभारी अशोक भदौरिया को विधायक की पैरवी पर ही पोस्टिंग दी गई थी। सूत्रों का दावा है कि पूर्व के एसओ ने विधायक के नाजायज दबावों को मानने से इन्कार कर दिया था। इस नाते उनका स्थानांतरण कर दिया गया।
पीड़िता के पिता को जेल भेजने का बनाया जा रहा था दबाव
आरोप ये भी है कि पीड़िता के पिता को जेल भेजने का काफी समय से दबाव डाला जा रहा था। यही नहीं, विधायक के दबाव में ही लखनऊ से अलग-अलग स्तर पर मांगी जा रही सूचनाओं में खेल होता रहा। बाद में 3 अप्रैल को जब मारपीट की घटना हुई तो पहली एफआईआर पीड़िता के पिता (जिसकी पिटाई की गई थी) के खिलाफ दर्ज कर आर्म्स एक्ट में जेल भेज दिया गया।
यही वजह रही कि शुरुआती कार्रवाई में ही थाना प्रभारी अशोक भदौरिया, सब इंस्पेक्टर केपी सिंह और चार सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया। थाने के पुलिसक र्मियों से लेकर एसपी तक विधायक के कारिंदे की तरह काम कर रहे थे।
पुलिस वालों पर भी कार्रवाई संभव
फिलहाल इस पूरे प्रकरण में सीबीआई पुलिस कर्मियों से भी पूछताछ कर रही है। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही पुलिस की भूमिका तय करते हुए सीबीआई इन पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती है।