विवेक तिवारी हत्याकांड के आरोपी को ब्रेवरी अवॉर्ड देने की मांग, पुलिस वाले मनाएंगे काला दिवस
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विवेक हत्याकांड में आरोपी सिपाही प्रशांत चौधरी के समर्थन में उतरे पुलिसकर्मियों ने सोशल मीडिया पर विरोध के सुर तेज कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश राज्य पुलिस कर्मचारी परिषद ने प्रशांत को निर्दोष बताते हुए शुक्रवार को काला दिवस मनाने और शनिवार को इलाहाबाद में बैठक करने की घोषणा की है। काला दिवस के दौरान फेसबुक और वॉट्सएप पर प्रदेश के सिपाहियों को मैसेज भेजकर काली पट्टी बांधकर काम करने के लिए कहा जा रहा है।
परिषद के महामंत्री व कानपुर में पीएसी में तैनात सिपाही अविनाश पाठक ने बताया कि काला दिवस को अराजपत्रित पुलिस वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के रक्षक कल्याण ट्रस्ट के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवा यादव ने भी समर्थन दिया है। काला दिवस के लिए ‘खाकी के सम्मान में, उत्तर प्रदेश पुलिस मैदान में’ स्लोगन बनाकर सोशल मीडिया पर प्रचार किया जा रहा है।
पाठक ने बताया कि छह अक्तूबर को इलाहाबाद में बैठक है। इसमें विवेक हत्याकांड में सिपाहियों पर एकतरफा कार्रवाई का सांकेतिक विरोध होगा। इस दौरान हंगामा या धरना-प्रदर्शन नहीं होगा। बैठक में ही हत्याकांड, पुलिसकर्मियों की आत्महत्याएं व अन्य समस्याओं पर वहां के डीएम को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके अलावा अराजपत्रित पुलिसकर्मियों की मांगें शासन तक पहुंचाने के लिए एडीजी इंटेलीजेंस को पत्र भेजा जाएगा। पाठक ने कहा बैठक में विभिन्न जनपदों से 300 सिपाहियों के आने की संभावना है।
तीन दिन की छुट्टी पर जाने का बैठक में रखेंगे प्रस्ताव
अविनाश पाठक ने बताया बैठक में इस हत्याकांड में सिपाहियों के खिलाफ कार्रवाई के विरोध में एक जनवरी से तीन दिन की छुट्टी पर जाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। सहमति बनने पर प्रदेश के सिपाही एक से तीन जनवरी तक काम नहीं करेंगे।
विद्रोही सेवानिवृत्त सिपाही है परिषद का संरक्षक
उत्तर प्रदेश राज्य पुलिस कर्मचारी परिषद का संरक्षक 1973 में हुए विद्रोह का अगुवाकार व सेवानिवृत्त सिपाही रामआशीष राय है। परिषद का अध्यक्ष गोरखपुर में तैनात आरक्षी विजय यादव है।
सरकार लड़े मुकदमा, दिया जाए ब्रेवरी अवार्ड
आरोपी सिपाही प्रशांत चौधरी के समर्थन में कुछ सिपाही लगातार सोशल मीडिया पर अभियान चला रहे हैं। एक ने फेसबुक पर लिखा कि प्रशांत अपनी ड्यूटी कर रहा था। विवेक को गोली मारने के उसके कदम को सही ठहराते हुए लिखा कि ड्यूटी निभाने के लिए उसे गोली चलानी पड़ी, इसलिए उसका मुकदमा सरकार को लड़ना चाहिए।
कुछ सिपाहियों ने प्रशांत को ब्रेवरी अवॉर्ड देने की बात भी लिखी। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर आरोपी का समर्थन करने वाले पुलिसकर्मी या तो उसके दोस्त या उसके बैच के हैं।
सिपाहियों के प्रदर्शन पर डीजीपी मुख्यालय की नजर
अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर चल रही खबरों को लेकर डीजीपी मुख्यालय भी सतर्क है और प्रकरण पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि यह भी सच है कि जो भी मेसेज सामने आ रहे हैं, वे सिर्फ सोशल मीडिया पर ही सक्रिय हैं।
अभी तक कोई भी सिपाही सामने नहीं आया है। इस बारे में डीजीपी ओम प्रकाश सिंह का कहना है कि सोशल मीडिया पर चल रही गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।