तो क्या बांग्लादेशी थे लखनऊ में हिंसा फैलाने वाले, पुलिस को उपद्रवियों के मोबाइल से मिला सुराग
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राजधानी में बृहस्पतिवार को नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, उपद्रव और आगजनी के तार पश्चिम बंगाल से जुड़ रहे हैं। शुक्रवार को डीजीपी ओपी सिंह ने हिंसा में बाहरी लोगों के शामिल होने की आशंका जताई। उन्होंने बताया कि पुलिस के हत्थे चढ़े उपद्रवियों के पास से पांच मोबाइल फोन बरामद हुए हैं, जिनमें बांग्ला भाषा के कई एसएमएस मिले हैं। डीजीपी का कहना है कि यह महत्वपूर्ण सुराग मिलने के बाद हिंसा के पीछे साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता।
डीजीपी ने बताया कि प्रदर्शन के लिए बाहर के लोग राजधानी में इकट्ठा हुए थे। इन लोगों के बहराइच और बाराबंकी के होने की पुष्टि हुई है। कुछ लोग आपस में बांग्ला भाषा में बातचीत कर रहे थे, जिससे यह भी प्रतीत हो रहा है कि प्रदर्शन में पश्चिम बंगाल से भी कई व्यक्ति शामिल थे।
मोबाइल में कई नंबर बांग्ला भाषा में हैं फीड
उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन की पड़ताल करने पर चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं। मोबाइल में कई नंबर बांग्ला भाषा में फीड किए गए हैं। इसके अलावा बांग्ला भाषा में कुछ एसएमएस भी पाए गए हैं। सभी मैसेज के बारे में गंभीरता से पड़ताल की जा रही है।
उधर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम बंगाल और वामपंथी विचारधारा से जुड़े कुछ लोग नागरिकता संशोधन कानून का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। हो सकता है कि लखनऊ में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम इन्हीं लोगों के इशारे पर किया गया हो अथवा यह लोग सक्रिय रूप से विरोध प्रदर्शन में शामिल होकर लोगों को उकसा रहे हों जिससे हिंसा भड़क गई हो। डीजीपी का कहना है कि इस पूरे मामले में गहराई से जांच चल रही है।