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एसयूवी में करोड़ों रुपये लेकर जा रहे दो कमीशन एजेंट दबोचे, कमीशन पर ट्रांसफर करते थे रुपये
Thu, 07 Feb 2019 12:25 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 07 Feb 2019 12:25 PM IST
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कसा शिकंजाः गिरफ्त में दोनों एजेंट
- फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ के कृष्णानगर में बुधवार दोपहर पुलिस ने एसयूवी में पांच करोड़ रुपये छिपाकर ले जा रहे दो लोगों को दबोच लिया। हालांकि, दूसरी कार से साथ चल रहे दो अन्य युवक भाग निकले।
इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग और खुफिया विभाग की टीम ने कृष्णानगर थाने पहुंचकर पड़ताल की। पकड़े गए लोगों ने पूछताछ में रकम गोमतीनगर निवासी राकेश सिंह की होने की बात कही।
बताया कि वे एक प्रतिशत कमीशन पर रुपये ट्रांसफर करते थे। हालांकि, रुपया कहां से आया और कहां जाना था? इस बारे में उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी। क्षेत्राधिकारी लाल प्रताप सिंह ने बताया कि दोनों के खिलाफ मनी लॉड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है।
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इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग और खुफिया विभाग की टीम ने कृष्णानगर थाने पहुंचकर पड़ताल की। पकड़े गए लोगों ने पूछताछ में रकम गोमतीनगर निवासी राकेश सिंह की होने की बात कही।
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बताया कि वे एक प्रतिशत कमीशन पर रुपये ट्रांसफर करते थे। हालांकि, रुपया कहां से आया और कहां जाना था? इस बारे में उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी। क्षेत्राधिकारी लाल प्रताप सिंह ने बताया कि दोनों के खिलाफ मनी लॉड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है।
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काले रंग की कार में कैश आने की सूचना
आरोपी के पास से बरामद नोट
- फोटो : amar ujala
क्षेत्राधिकारी ने बताया कि बुधवार दोपहर मुखबिर ने काले रंग की कार में भारी मात्रा में कैश आने की सूचना दी, जिसके बाद फीनिक्स मॉल के आसपास चेकिंग के लिए पुलिस टीम तैनात कर दी गई।
गेट नंबर तीन के पास तैनात पुलिसकर्मियों ने काले रंग की एंडेवर को रोककर तलाशी ली तो डिक्की में आठ गत्ते के डिब्बे रखे मिले। कार सवार राजाजीपुरम के डी ब्लॉक निवासी देवेश कुमार श्रीवास्तव और उसके साथ बैठे मड़ियांव के नैमिष श्रीवास्तव ने गत्तों में जरूरी सामान होने की जानकारी देकर टरकाने का प्रयास किया।
पुलिसकर्मियों ने गत्ते खोलकर देखा तो उनमें पांच-पांच सौ रुपये के नोट भरे हुए थे। रुपयों के बारे में पूछने पर दोनों कोई जानकारी नहीं दे सके। रकम जब्त कर दोनों को कृष्णानगर थाना ले आया गया।
गेट नंबर तीन के पास तैनात पुलिसकर्मियों ने काले रंग की एंडेवर को रोककर तलाशी ली तो डिक्की में आठ गत्ते के डिब्बे रखे मिले। कार सवार राजाजीपुरम के डी ब्लॉक निवासी देवेश कुमार श्रीवास्तव और उसके साथ बैठे मड़ियांव के नैमिष श्रीवास्तव ने गत्तों में जरूरी सामान होने की जानकारी देकर टरकाने का प्रयास किया।
पुलिसकर्मियों ने गत्ते खोलकर देखा तो उनमें पांच-पांच सौ रुपये के नोट भरे हुए थे। रुपयों के बारे में पूछने पर दोनों कोई जानकारी नहीं दे सके। रकम जब्त कर दोनों को कृष्णानगर थाना ले आया गया।
रुपया पकडे़े जाते ही दोनों भाग निकले
इस बीच प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग और खुफिया विभाग के अधिकारी भी आ गए। देवेश और नैमिष ने बताया कि रुपया गोमतीनगर के राकेश सिंह का है। पुलिस ने जब उन्हें पकड़ा तो राकेश मित्र के साथ दूसरी कार में पीछे ही चल रहा था।
रुपया पकड़े जाते ही दोनों भाग निकले। कार के नंबर की पड़ताल की गई तो वह 23 अगस्त 2018 को गोसाईंगंज निवासी हरिओम के नाम से पंजीकृत पाई गई। क्षेत्राधिकारी ने बताया कि राकेश की तलाश में टीमें भेजी गई हैं।
रुपया पकड़े जाते ही दोनों भाग निकले। कार के नंबर की पड़ताल की गई तो वह 23 अगस्त 2018 को गोसाईंगंज निवासी हरिओम के नाम से पंजीकृत पाई गई। क्षेत्राधिकारी ने बताया कि राकेश की तलाश में टीमें भेजी गई हैं।
चुनाव के लिए तो नहीं मंगाई गई थी रकम
लखनऊ के कृष्णानगर में बुधवार को एसयूवी में पांच करोड़ रुपये कैश पकड़े जाने से पुलिस-प्रशासन में सनसनी मच गई। पुलिस सूत्रों का कहना है कि चुनावी माहौल में उक्त रकम किसी नेता ने हवाला के जरिये मंगाई थी या फिर किसी नेता को भेजी जा रही थी।
हालांकि, कुछ लोग इसे रीयल एस्टेट कारोबारी या बिल्डर का रुपया भी मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी यही चर्चा रही। लोगों ने वॉट्सएप पर पकड़ी गई रकम को नोटबंदी के दौरान बिल्डरों के पास जमा काली कमाई बताया।
फिलहाल पुलिस और आयकर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रकम के स्त्रोत का पता लगाया जा रहा है। हो सकता है कि नकदी के पीछे कोई बड़े कारोबारी या राजनेता का नाम सामने आ जाए।
पकड़ा गया देवेश इंदिरानगर में ऑफिस खोलकर शेयर ट्रेडिंग करता है। वह राजाजीपुरम में आरएस यादव के मकान में किराये पर रहता है, जबकि नैमिष मेडिकल स्टोर में काम करता है। प्रभारी निरीक्षक यशकांत सिंह ने बताया कि पकड़े गए दोनों युवक एजेंट हैं और एक प्रतिशत लेकर रुपया ट्रांसफर करते हैं। रकम को लेकर दोनों से पूछताछ की जा रही है।
हालांकि, कुछ लोग इसे रीयल एस्टेट कारोबारी या बिल्डर का रुपया भी मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी यही चर्चा रही। लोगों ने वॉट्सएप पर पकड़ी गई रकम को नोटबंदी के दौरान बिल्डरों के पास जमा काली कमाई बताया।
फिलहाल पुलिस और आयकर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रकम के स्त्रोत का पता लगाया जा रहा है। हो सकता है कि नकदी के पीछे कोई बड़े कारोबारी या राजनेता का नाम सामने आ जाए।
पकड़ा गया देवेश इंदिरानगर में ऑफिस खोलकर शेयर ट्रेडिंग करता है। वह राजाजीपुरम में आरएस यादव के मकान में किराये पर रहता है, जबकि नैमिष मेडिकल स्टोर में काम करता है। प्रभारी निरीक्षक यशकांत सिंह ने बताया कि पकड़े गए दोनों युवक एजेंट हैं और एक प्रतिशत लेकर रुपया ट्रांसफर करते हैं। रकम को लेकर दोनों से पूछताछ की जा रही है।
कालेधन को सफेद बनाने के गोरखधंधे की भी चर्चा
देवेश और नैमिष ने बताया कि उन्हें सिर्फ बैंक खाते का नंबर बताया जाता था, जिसमें वे आरटीजीएस से रुपया ट्रांसफर कर देते थे। उन्होंने कहा कि पांच करोड़ रुपये के बदले उन्हें 10 करोड़ रुपये वापस मिलने थे।
हालांकि, क्षेत्राधिकारी लाल प्रताप सिंह ने कहा कि दोनों कालेधन को सफेद बनाने की बात कह रहे हैं। ऐसे में जितनी रकम ट्रांसफर की जाती है, उसकी आधी रकम वापस मिलती है, जबकि दोनों दोगुनी रकम वापस मिलने का दावा कर रहे हैं, जो संभव नहीं है।
हालांकि, क्षेत्राधिकारी लाल प्रताप सिंह ने कहा कि दोनों कालेधन को सफेद बनाने की बात कह रहे हैं। ऐसे में जितनी रकम ट्रांसफर की जाती है, उसकी आधी रकम वापस मिलती है, जबकि दोनों दोगुनी रकम वापस मिलने का दावा कर रहे हैं, जो संभव नहीं है।