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अपराधों पर नकेल कसने के लिए पुलिस ऐसे ले रही है इंटरनेट की मदद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 14 Aug 2018 03:20 PM IST
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- फोटो : डेमो
अपराधों पर नकेल कसने के लिए पुलिस अब इंटरनेट की मदद ले रही है। किस जगह सर्वाधिक अपराध हो रहे हैं, यह जानने के लिए जियो टैगिंग कराई जा रही है। इससे पता चल सकेगा कि किस जगह सबसे अधिक और किस तरह के अपराध हो रहे हैं।
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वहीं, सीमा विवाद खत्म करने के लिए जियो फेसिंग भी कराई जा रही है। यूपी रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (यूपीआरएसएसी) में सोमवार को जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) तकनीक पर आयोजित कार्यशाला में एडीजी पुलिस तकनीकी आशुतोष पांडे ने अपनी योजनाओं की जानकारी दी।
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उन्होंने कहा, जीआईएस की मदद से हम एक एक्सीडेंट अलर्ट सिस्टम विकसित कर रहे हैं। इसमें पुलिस न्यूनतम समय में दुर्घटनास्थल तक पहुंचकर मदद कर पाएगी। इसके अलावा पूरे प्रदेश के थानों की जियो फेसिंग की जा रही है।
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इसके तहत सभी थानों की डिजिटल मैपिंग करके सैटेलाइट मैप पर सुपरइंपोज कर दिया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि मुख्यालय को सीधे पता होगा कि घटनास्थल किस थाने की सीमा में है।
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क्राइम मैपिंग को जीआईएस फेसिंग से जाएगा जोड़ा
इसी तरह क्राइम मैपिंग और बीट सिस्टम को जीआईएस फेसिंग से जोड़ा जाएगा। 31 विभागों के अधिकारियों के लिए आयोजित कार्यशाला में यूपीआरएसएसी के अध्यक्ष सुधाकर त्रिपाठी ने कहा, जीआईएस तकनीक से विकास योजनाओं को पूरा करने में तेजी भी आएगी।
कार्यवाहक निदेशक डॉ. एएल हलधर ने कहा, जीआईएस तकनीक के उपयोग केलिए जल्द प्रदेश में सेंटर ऑफ जियोइन्फॉर्मेटिक्स खुलने जा रहा है। इससे सभी विभागों का डाटा एक केंद्रीयकृत सर्वर में आ जाएगा। इसका उपयोग आपसी सामंजस्य के लिए भी किया जा सकेगा।
कार्यवाहक निदेशक डॉ. एएल हलधर ने कहा, जीआईएस तकनीक के उपयोग केलिए जल्द प्रदेश में सेंटर ऑफ जियोइन्फॉर्मेटिक्स खुलने जा रहा है। इससे सभी विभागों का डाटा एक केंद्रीयकृत सर्वर में आ जाएगा। इसका उपयोग आपसी सामंजस्य के लिए भी किया जा सकेगा।