पुलिस से डील करके बेगुनाह को बनाया शूटर, पढ़ें साजिश की पूरी स्क्रिप्ट
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ये खबर पढ़ने से पहले जस्टिस आनंद नारायण मुल्ला की यूपी के एक मामले में करीब 6 दशक पहले की गई तल्ख टिप्पणी को पढ़िए। उन्होंने कहा था-पुलिस एक संगठित गिरोह है...यह खबर उस टिप्पणी को यकीन में बदल देती है।
क्राइम ब्रांच व लखनऊ के पारा थाने की पुलिस टीम चार युवकों को गिरफ्तार करती है। उन्हें सीरियल किलर सलीम का शूटर बताती है। पुलिस अपनी पीठ थपथपाते हुए जेल भेज देती है। पर, पुलिस ने जिन्हें शूटर बताया उनमें से दो अफजल और तमीम अहमद को खाकी से दोस्ती रखने वाले बदमाशों ने अगवा किया था।
दोनों को फ्लैट में बंधक बनाकर रखा। पीटा...एक ऐसे गुनाह की स्क्रिप्ट रटाई जो उन्होंने किया नहीं था। पैसों का लालच...जेल से जल्द छुड़ा लेने का झांसा देकर पुलिस के हवाले कर दिया।
पुलिस डील के मुताबिक काम करते हुए इन्हें जेल भेज देती है। पुलिस-अपराधियों की साजिश से बेखबर इन युवकों के परिवारीजनों ने ठाकुरगंज में इनके अपहरण का केस दर्ज करा दिया था। बहरहाल एएसपी की जांच में अपराधियों के इशारे पर पुलिस के खेल की बखिया उधड़ने लगी है।
परिवारीजन खोल रहे पुलिस की पोल
पुलिस के दोस्त (अपराधी) अकील अंसारी और अजीम उर्फ बाबू इसमें आरोपी थे। बाप जवान बेटे की हत्या के केस की पैरवी कर रहा था। लिहाजा बुजुर्ग को फंसाने के लिए युवकों को अगवा किया गया। उन्हें यह रटाया गया कि श्रवण ने उन्हें अकील की हत्या के लिए 20 लाख की सुपारी दी है।
एएसपी सिटी पूर्वी शिवराम यादव की जांच में सामने आया कि स्वाट टीम प्रभारी धीरेंद्र शुक्ला ने पारा थाने में यासीनगंज निवासी अफजल और तमीम अहमद की गिरफ्तारी का जो वक्त दिखाया है उससे पहले ही ठाकुरगंज थाने में दोनों के अपहरण की ठाकुरगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज हो चुकी थी।
ठाकुरगंज के यासीनगंज निवासी कुरबान खां पुलिस और अपराधियों के साठगांठ की पोल खोलते हैं। वे कहते हैं-मेरा बेटा अफजल (22) कैंपबेल रोड पर कामिल के हुक्का बार में काम करता था। इसी रोड पर तीन साल पहले आयुष साहू की गोली मारकर हत्या हुई थी। इस मामले में अकील आरोपी है।
अकील 8 जनवरी की रात नौ बजे साथियों समेत हुक्का बार पर पहुंचा। वह अफजल को गाड़ी में लाद ले गया। इलाके में अकील का आतंक है। अफजल के अपहरण का पता चलते ही हमने पुलिस को फोन किया। ठाकुरगंज व सआदतगंज थाने की पुलिस ने नाकाबंदी करके चेकिंग कराई।
ठाकुरगंज पुलिस ने रात 2:15 बजे अकील व उसके साथियों के खिलाफ मेरे बेटे के अपहरण का केस दर्ज किया था। पुलिस ने कहा था अफजल को जल्द तलाश लेंगे। पर तीसरे दिन पता चला कि पारा थाने की पुलिस व क्राइम ब्रांच ने अफजल व तीन अन्य युवकों को असलहों के साथ पकड़ा है।
उन पर अकील की हत्या के लिए श्रवण साहू से 20 लाख की सुपारी लेने का आरोप है। रिश्तेदार जेल में अफजल से मिलने पहुंचे तब पता चला कि अकील ने उसे एक फ्लैट में बंधक बनाकर पीटा था। साथ ही उसे सुपारी लेने वाली बात रटाई थी। पिटाई से वह टूट गया तो पुलिस वालों को सौंप दिया गया।
‘पहले उसे फोन करके बुलाया और शूटर बना दिया’
ठाकुरगंज के गुलाबनगर असियामऊ निवासी प्रॉपर्टी डीलर नदीम अहमद बताते हैं कि उनका छोटा भाई तमीम अहमद (20) हजरतगंज के लवलेन में दुकान खोलने की तैयारी में था। उसकी शादी की तैयारी चल रही थी।
तमीम 9 जनवरी की रात 8:45 बजे चाय पीने की बात कहकर घर से निकला था। देर तक न लौटने पर कॉल की। मोबाइल बंद होने पर तलाश शुरू की गई। कुछ पता नहीं चलने पर 10 जनवरी को तड़के ठाकुरगंज थाने में तहरीर दी।
पुलिस ने सुबह 5:15 बजे केस दर्ज किया। अगले दिन पता चला कि पारा थाने की पुलिस व क्राइम ब्रांच की टीम ने 10 जनवरी की रात 8:10 बजे तमीम को तीन अन्य युवकों के साथ असलहों समेत पकड़ा है। उस पर सआदतगंज के श्रवण साहू से अकील की हत्या की 20 लाख की सुपारी लेने का आरोप है।
नदीम ने बताया कि पुलिस ने उन्हें तमीम से मिलने नहीं दिया। जेल में मुलाकात की तो पता चला कि अकील ने 9 जनवरी की रात तमीम को कॉल करके एग्जान स्कूल के पास बुलाया था। चाय पीने के बहाने घर से निकले तमीम को गाड़ी में बैठाकर एक फ्लैट में ले गया।
पैसों का लालच देकर कहा कि पिस्टल के साथ खुद को गिरफ्तार कराते हुए श्रवण साहू द्वारा अकील की हत्या के लिए 20 लाख की सुपारी देने की कहानी सुना देना।
दो चार दिन में जमानत हो जाएगी। काम के लिए मोटी रकम मिलेगी। तमीम ने अपने भाई को बताया कि इन्कार करने पर अकील व उसके साथियों ने बंधक बनाकर पीटा। हां, बोलने पर पारा थाने ले गए।
जुटाए जा रहे पुख्ता सुबूत
एएसपी सिटी पूर्वी की टीम ने 16 अक्तूबर 13 की रात कैंपबेल रोड स्थित बीयर शॉप पर आयुष साहू की हत्या की असल वजह जानने के लिए सोमवार दोपहर इलाके के लोगों से तहकीकात की।
पता चला कि अकील अंसारी और अजीम उर्फ बाबू खुद को एसओजी का सिपाही बताकर इलाके में आतंक फैलाए था। दरोगा-सिपाहियों के साथ घूमते। पिस्टल लगाकर चलने वाले दोनों व्यापारियों से रंगदारी वसूलते थे।
बीयर शॉप पर भी अचानक झगड़ा होने पर दोनों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की। इसमें आयुष की मौत हो गई और दो युवक घायल हुए थे। पुलिसकर्मियों ने अपनी नौकरी दांव पर लगाकर अकील व अजीम की मदद की थी।
एएसपी शिवराम यादव ने सआदतगंज व ठाकुरगंज थाने से अकील व अजीम के आपराधिक इतिहास मंगाया है। अन्य थानों से भी दोनों के आपराधिक इतिहास की जानकारी की जा रही है।
अकील व अजीम के मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल मंगाए गए हैं। इसके साथ श्रवण कुमार साहू, अफजल, तमीम, अनवर व कामरान का भी कॉल डिटेल मंगाया जा रहा है।
श्रवण साहू ने एएसपी को बयान दिया कि उनके बेटे आयुष का अकील व अजीम से कोई पुराना झगड़ा नहीं था और न ही उनका कोई विवाद था। पारा थाने में 10 जनवरी को गिरफ्तार चारों युवकों को भी वह नहीं जानता। जांच अधिकारी का मानना है कि कॉल डिटेल से खेल की तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी।