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मुलायम की ताकत से मजबूर मोदी का यूपी से हटा फोकस

Mon, 25 May 2015 10:03 PM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 25 May 2015 10:03 PM IST
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PM Modi did not comment on UP govt.

राज्यसभा में कमजोर दलीय स्थिति हो, सियासी नैतिकता हो या सिर्फ अपने एजेंडे पर जोर देने की ही कोशिश, वजह चाहे जो भी हो एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर बृज भूमि से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को प्रदेश सरकार या सत्ताधारी पार्टी को निशाने पर नहीं लिया।

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उन्होंने किसानों की खुदकुशी का जिक्र तो जरूर किया लेकिन वह यूपी पर फोकस करने से बचे। भगवान श्रीकृष्ण की धरती से मोदी ने यमुना पर कोई बड़ी घोषणा तो नहीं की लेकिन यमुना को मां बताते हुए इसमें शुद्ध जलापूर्ति कराने का भरोसा अवश्य दिया।
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प्रधानमंत्री मोदी लगभग 13 महीने बाद दूसरी बार मथुरा में थे। 21 अप्रैल 2014 को वह चुनावी सभा में केंद्र में सरकार बनाने के लिए समर्थन मांगने आए थे तो सोमवार को अपनी सरकार की उपलब्धियां बताने के लिए दीनदयाल धाम पहुंचे। प्रधानमंत्री बनने के बाद यूपी में उनकी यह पहली रैली थी।
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उम्मीद थी कि वे प्रदेश सरकार या समाजवादी पार्टी को लेकर कुछ बोलेंगे। 2017 के समीकरणों को साधने की कोशिश करेंगे। लेकिन उन्होंने यूपी और प्रदेश सरकार के बारे में सीधे तौर पर बोलने से परहेज बरता। ऐसा ही परहेज वे संसद के बीते सत्रों में बरतते रहे हैं।

सपा को छोड़ा, कांग्रेस को जमकर किया घायल

PM Modi did not comment on UP govt.

दरअसल, लोकसभा में भले ही भाजपा को बहुमत प्राप्त है लेकिन राज्यसभा में एनडीए भी बहुमत से दूर है। केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण बिल राज्यसभा में पारित न होने के कारण लटके हुए हैं। उसे सपा समेत अन्य दलों को साधना पड़ता है।

उनकी मदद से कुछ बिल पारित किए गए हैं और भविष्य में भी उनकी जरूरत पड़ेगी। भाजपा ने संसद सत्र के दौरान क्षेत्रीय दलों के प्रति नरम तेवर रखने का फैसला लिया था। शायद राज्यसभा में संख्या बल कम होने की मजबूरी के चलते ही प्रधानमंत्री ने सपा सरकार को निशाना पर नहीं लिया। उनकी तरकश के सारे तीर कांग्रेस पर ही चले।

किसानों की आत्महत्याओं पर राजनीति नहीं

मोदी ने किसानों की बदहाली और किसानों की खुदकुशी का मुद्दा उठाया। यूपी में भी पिछले दिनों बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों की बर्बादी के बाद कई किसानों ने मौत को गले लगा लिया था। पर मोदी ने अपने संबोधन में इसका जिक्र तक नहीं किया।

उल्टे कहा कि किसानों की आत्महत्याओं पर उन्हें राजनीति नहीं करनी है। मिल-बैठकर उनकी बेहतरी के रास्ते ढूंढने हैं। उन्होंने किसानों के लिए अटल पेंशन योजना की जानकारी दी। बंद पड़े गोरखपुर के उवर्रक कारखाने का चलवाने की बात कही।

इस तरह अपनी सरकार को औरों से बताया अलग

PM Modi did not comment on UP govt.

प्रधानमंत्री ने अपनी उपलब्धियां बताते हुए भाई-भतीजा और पुत्रवाद पर चोट की। इसे कांग्रेस पर सीधे तौर पर और सपा पर अप्रत्यक्ष रूप से हमला माना जा रहा है। उन्होंने लोगों से पूछा, केंद्र सरकार के एक साल के कार्यकाल में  भाई-भतीजावाद की कोई खबर आई?

क्या नेताओं के बेटों का कोई किस्सा खुला?  क्या उनकी लूट बंद हुई? एक तरह से उन्होंने दूसरे दलों से अपनी पार्टी और सरकार में अंतर होने का संदेश दिया।

दीनदयाल धाम से लोहिया को किया याद
प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी, डॉ. राम मनोहर लोहिया और दीन दयाल उपाध्याय को एक साथ खड़ा करके बड़ा संदेश देने की कोशिश की। उन्होंने पिछली सदी में जिन तीन महापुरुषों के राजनीतिक चिंतन का असर बताया उनमें कांग्रेसी गांधी को, समाजवादी डॉ. लोहिया को और भाजपाई दीन दयाल उपाध्याय को अपने दलों के ‘प्रतीक’ महापुरुष मानते रहे हैं।

मोदी ने इन तीनों के चिंतन का केंद्र बिंदु गरीब, गांव और किसान को बताकर वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठने का संकेत दिया। साथ ही इशारा कर गए कि यूपी या बिहार की जंग में डॉ. लोहिया, चंद खास दलों (सपा, जद यू या राजद) की विरासत नहीं रहेंगे। भाजपा भी लोहिया के जरिये समाजवादियों की घेराबंदी करेगी।

‘नेताजी’ पर नरमी की सियासी वजह भी

PM Modi did not comment on UP govt.

लोकसभा चुनाव के दौरान रैलियों में नेताजी (मुलायम सिंह यादव) पर सीधा हमला करने वाले, उन्हें 56 इंच के सीने का उलाहना देने वाले नरेंद्र मोदी मथुरा रैली में उन पर नरम रहे।

इसके सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। पहला यह है कि यदुवंश का प्रतीक समझे जाने वाले मथुरा से वे मुलायम पर टिप्पणी नहीं करना चाहते थे। भाजपा नेताओं की सोच है कि भले ही यादवों का बहुमत सपा के पक्ष में हो, लेकिन मोदी उन्हें नाराज नहीं करना चाहते।

यूं भी अभी यूपी में चुनाव दूर हैं। मोदी पिछले दिनों मुलायम सिंह के गांव सैफई जाकर निजी रिश्तों की गरमाहट दिखा चुके हैं, आरोप-प्रत्यारोप से वह फिलहाल इसे कमजोर नहीं करना चाहते।

एजेंडे से भटकना नहीं चाहते थे पीएम

PM Modi did not comment on UP govt.

दरअसल दीनदयाल धाम में हुई सभा केंद्र सरकार के एक साल के कार्यकाल की उपलब्धियां बताने के लिए थी। उन्होंने अपने एक साल के कार्यकाल की तुलना कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार से की। यानी अपनी उपलब्धियां और पिछली सरकार की नाकामियां बताना ही उनका एजेंडा था।

सपा, प्रदेश सरकार या मुलायम सिंह पर टिप्पणी करके वह अपने सेट एजेंडे से भटकना नहीं चाहते थे। यूं भी प्रधानमंत्री पद की गरिमा बनाए रखने के लिए राज्य सरकार या उसके नेता पर टिप्पणी से बचना चाहते होंगे।

बृज-यमुना के लिए घोषणा न होने से मायूसी
एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर मोदी की पहली रैली बृज में थी। इसलिए वहां के लोगों को अपने क्षेत्र और यमुना को लेकर किसी बड़ी घोषणा का इंतजार था। यमुना मुक्तीकरण पर लंबे समय से आंदोलन भी चल रहा है। दिल्ली तक में धरना-प्रदर्शन हो चुके हैं।

भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे पर बृज की जनभावनाओं से प्रधानमंत्री को अवगत भी कराया था। हालांकि मोदी ने यमुना के पानी के मुद्दे पर काम करने का आश्वासन दिया है लेकिन इससे बृजवासी बहुत संतुष्ट नहीं हैं।

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