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Lucknow News: जिंदगी और मैराथन के ट्रैक पर साथ-साथ, फिटनेस में बजरंग और आशा का कोई जोड़ नहीं
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लखनऊ। महज 35 दिन के भीतर लंदन (दो अक्तूबर), शिकागो (नौ अक्तूबर) और न्यूयार्क (छह नवंबर)मैराथन में भाग लेकर इतिहास रचने वाले दंपती रिटायर कर्नल बजरंग सिंह (63 वर्ष) और आशा सिंह (57 वर्ष) के लिए उम्र महज एक नंबर हैं। चाहे कितनी भी ठंड हो, दोनों नियमित रूप से तड़के उठकर तकरीबन तीन घंटे दौड़ना नहीं भूलते हैं। अगले साल मिलकर 100 मील (161 किमी) की कुल दूरी मापने का विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए बजरंग और आशा ने नए लक्ष्य के लिए कमर कस ली हैं।
यह दंपती शहर में फिटनेस की मिसाल बन चुके हैं। अल्ट्रारनर आशा सिंह पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलताएं हासिल कर चुकी हैं। उनके इस प्रदर्शन में पति बजरंग सिंह का खास योगदान रहा, जिन्होंने आशा को घर से निकलकर साथ में दौड़ने के लिए प्रेरित किया। महज दो साल में ही आशा ने अल्ट्रारनर की उपाधि हासिल कर ली और एक के बाद एक देश के लिए कई पदक अपने नाम किए। इस दौरान बजरंग भी आशा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दौड़े और महज 35 दिन के भीतर विश्व की तीन बड़ी मैराथन में हिस्सा लेने वाले दंपती बने। ऊधमपुर में सेना से कर्नल पद से रिटायर होने के बाद बजरंग पत्नी आशा के संग लखनऊ में बस गए। परिवार में दो बेटे और एक बेटी से अलग रहने के कारण अपना सूनापन दूर करने के लिए इस दंपती ने वॉक को अपना हमजोली बनाया। दोनों ने मिलकर शहर में वॉक करने वालों का 12 सदस्यीय ग्रुप बनाया और तड़के अभ्यास करना शुरू कर दिया। ग्रुप में सबसे ज्यादा उम्र के होने के बावजूद 63 वर्षीय बजरंग और 57 वर्षीय आशा अन्य से ज्यादा रनिंग करते थे, जिसे देखकर सभी दंग रह जाते थे।
फिट रहने के लिए रनिंग सर्वश्रेष्ठ
‘फिट रहने के लिए रनिंग से बेहतर कोई माध्यम नहीं है। सेना में रहते हुए भी सुबह एक से दो घंटा नियमित रूप से वॉक करता था। आज भी आशा के साथ यह आदत बनाए रखी है। आशा के साथ तीन अंतरराष्ट्रीय स्तर की मैराथन में भाग लेना अनोखी उपलब्धि रहा। अब मेरा लक्ष्य है कि हम दोनों मिलकर 100 मील (161 किमी.) की दूरी नापकर नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए।’
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- बजरंग सिंह
जारी रहेगा दौड़ का सफर
‘शौकिया तौर से रनिंग शुरू होने से लेकर अल्ट्रारनर बनने तक का सफर रोमांचक रहा। मुझे पता भी नहीं था कि मैं इतनी दूरी तक लगातार दौड़ सकती हूं। यहां तक पहुुंचने में मेरे पति का विशेष सहयोग रहा। आज भी हम नियमित रूप से साथ में दो से तीन घंटे आसानी से वॉक कर लेते हैं। आगे भी उनके साथ दौड़ने का यह सफर जारी रहेगा।’
- आशा सिंह
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यह दंपती शहर में फिटनेस की मिसाल बन चुके हैं। अल्ट्रारनर आशा सिंह पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलताएं हासिल कर चुकी हैं। उनके इस प्रदर्शन में पति बजरंग सिंह का खास योगदान रहा, जिन्होंने आशा को घर से निकलकर साथ में दौड़ने के लिए प्रेरित किया। महज दो साल में ही आशा ने अल्ट्रारनर की उपाधि हासिल कर ली और एक के बाद एक देश के लिए कई पदक अपने नाम किए। इस दौरान बजरंग भी आशा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दौड़े और महज 35 दिन के भीतर विश्व की तीन बड़ी मैराथन में हिस्सा लेने वाले दंपती बने। ऊधमपुर में सेना से कर्नल पद से रिटायर होने के बाद बजरंग पत्नी आशा के संग लखनऊ में बस गए। परिवार में दो बेटे और एक बेटी से अलग रहने के कारण अपना सूनापन दूर करने के लिए इस दंपती ने वॉक को अपना हमजोली बनाया। दोनों ने मिलकर शहर में वॉक करने वालों का 12 सदस्यीय ग्रुप बनाया और तड़के अभ्यास करना शुरू कर दिया। ग्रुप में सबसे ज्यादा उम्र के होने के बावजूद 63 वर्षीय बजरंग और 57 वर्षीय आशा अन्य से ज्यादा रनिंग करते थे, जिसे देखकर सभी दंग रह जाते थे।
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फिट रहने के लिए रनिंग सर्वश्रेष्ठ
‘फिट रहने के लिए रनिंग से बेहतर कोई माध्यम नहीं है। सेना में रहते हुए भी सुबह एक से दो घंटा नियमित रूप से वॉक करता था। आज भी आशा के साथ यह आदत बनाए रखी है। आशा के साथ तीन अंतरराष्ट्रीय स्तर की मैराथन में भाग लेना अनोखी उपलब्धि रहा। अब मेरा लक्ष्य है कि हम दोनों मिलकर 100 मील (161 किमी.) की दूरी नापकर नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए।’
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- बजरंग सिंह
जारी रहेगा दौड़ का सफर
‘शौकिया तौर से रनिंग शुरू होने से लेकर अल्ट्रारनर बनने तक का सफर रोमांचक रहा। मुझे पता भी नहीं था कि मैं इतनी दूरी तक लगातार दौड़ सकती हूं। यहां तक पहुुंचने में मेरे पति का विशेष सहयोग रहा। आज भी हम नियमित रूप से साथ में दो से तीन घंटे आसानी से वॉक कर लेते हैं। आगे भी उनके साथ दौड़ने का यह सफर जारी रहेगा।’
- आशा सिंह