फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   play selection in lucknow mahotsava

नाटक चयन करने में ये किसने किया ‘ढोंग’

Sun, 27 Oct 2013 11:57 AM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
टीम डिजिटल/लखनऊ Updated Sun, 27 Oct 2013 11:57 AM IST
विज्ञापन
play selection in lucknow mahotsava

‘अपनी ढपली, अपना राग’ वाली कहावत लखनऊ महोत्सव के लिए नाटकों के चयन के दौरान चरितार्थ हो गई।

विज्ञापन


जब कलाकार एसोसिएशन द्वारा चयनित अधिकतर नाटकों में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अपने ही नाटकों का चयन कर लिया।

जहां एक ओर एसोसिएशन अध्यक्ष के नाटक ‘ढोंग’ को शामिल किया गया है, वहीं ऑडिटर, उपाध्यक्ष व सदस्यों के नाटक भी लिस्ट में शामिल हैं। ऐसे में नाटकों की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाना लाजिमी हैं।

22 नवंबर से शुरू होने वाले लखनऊ महोत्सव के नाट्य समारोह को लेकर शनिवार को कलाकार एसोसिएशन की बैठक हुई।

पढ़ें- कुछ बदला-बदला होगा इस बार का लखनऊ महोत्सव


चयन समिति में दूरदर्शन के सीनियर प्रोड्यूसर (ड्रामा विभाग) अशरफ हुसैन, मंच कृति संस्था से जुड़े गोपाल सिन्हा और अवधी विकास संस्थान के विनोद मिश्र शामिल रहे।
विज्ञापन


तकरीबन दो घंटे चली बैठक में 15 नाटकों का चयन किया गया। हालांकि, मंचन की तारीख अभी तय नहीं हो सकी है।

कलाकार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विजय तिवारी नाटकों के चयन पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारियों व सदस्यों के नाटक शामिल किए गए हैं, जो कि नियम विरुद्घ है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पढ़ें- महोत्सव में इस बार खरीदारी पड़ेगी भारी


बताते हैं कि ‘ढोंग’ के निर्देशक संगम बहुगुणा एसोसिएशन में अध्यक्ष हैं। ‘शिला नारी’ के निर्देशक शैलेष श्रीवास्तव एसोसिएशन में ऑडिटर हैं।

ऐसे ही ‘होम प्रोडक्शन’ नाटक के निर्देशक अतुल मिश्र एसोसिएशन में सदस्य हैं जबकि ‘हसीना मान जाएगी’ के निर्देशक चंद्रमोहन सीधे तौर पर तो एसोसिएशन से नहीं जुड़े हैं।

पढ़ें- जानिए, क्या है इस साल लखनऊ महोत्सव की थीम

लेकिन जिस संस्था (कामायिनी) के अंतर्गत मंचन हो रहा है, उससे जुड़े नवीन श्रीवास्तव एसोसिएशन में उपाध्यक्ष पद पर नियुक्त हैं। ऐसे ही ललित पोखरिया, राजा अवस्थी, अतुल मिश्र, धर्मश्री आदि निर्देशक भी एसोसिएशन के सदस्य हैं।


पूर्व अध्यक्ष कहते हैं कि इतना ही नहीं ‘बाप रे बाप’ और ‘ढोंग’ का मंचन पहले भी लखनऊ महोत्सव में हो चुका है। इसके अलावा अधिकतर नाटक ऐसे हैं, जिनका मंचन हाल के महीनों में हो चुका है।

लखनऊ की और खबरों के लिए यहां आएं...

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed