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Lucknow News: हवा से जहरीले कण सोखने वाले पौधों की होगी पहचान

Mon, 29 Jun 2026 12:04 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jun 2026 12:04 AM IST
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Plants that absorb toxic particles from the air will be identified.
आदित्य आभा सिंह।सहायक प्रोफेसर लखनऊ विवि
लखनऊ। शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण और हवा में मौजूद भारी धातुओं के खतरे से निपटने के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय ने एक शोध परियोजना शुरू की है। इस अध्ययन के तहत शहर के विभिन्न इलाकों में कणीय प्रदूषण (पीएम 2.5 और पीएम 10) का विश्लेषण किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसे स्थानीय पौधों की पहचान करना है जो हवा में मौजूद जहरीली भारी धातुओं को सबसे अधिक मात्रा में अवशोषित कर सकें।
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वनस्पति विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर आदित्य आभा सिंह इस परियोजना की प्रधान अन्वेषक हैं। उन्होंने बताया कि शोध का लक्ष्य वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करना है। यह पौधों के माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण (फाइटोरिमेडिएशन) की संभावनाओं को भी विकसित करेगा। उनके अनुसार, लखनऊ में तेजी से शहरीकरण हो रहा है। इससे हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। इन सूक्ष्म कणों में भारी धातुएं और अन्य विषैले तत्व होते हैं। ये कैंसर, हृदय रोग और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। शहर के कई हिस्सों में कणीय प्रदूषण और उसमें मौजूद भारी धातुओं पर पर्याप्त अध्ययन नहीं हुआ है।
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आदित्य आभा सिंह ने बताया कि परियोजना के पहले चरण में लखनऊ के विभिन्न क्षेत्रों में कणीय प्रदूषण की प्रकृति, स्रोत और मौसमी बदलावों का अध्ययन होगा। इससे शहर की वायु गुणवत्ता का विस्तृत आकलन किया जा सकेगा। प्रदूषण से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को भी समझा जाएगा। दूसरे चरण में चयनित स्थानों पर स्थानीय पौधों में भारी धातुओं के जैव-संचयन (बायोएक्यूम्यूलेशन) का अध्ययन होगा। ऐसे पौधों की पहचान की जाएगी जो प्रदूषित हवा से अधिक मात्रा में जहरीली धातुओं को सोख सकें। इन पौधों का उपयोग भविष्य में प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोपण के लिए किया जा सकता है। इससे वायु गुणवत्ता में सुधार होगा और पर्यावरण प्रबंधन को वैज्ञानिक आधार मिलेगा। अध्ययन के निष्कर्ष प्रशासन को प्रभावी रणनीति बनाने में मदद करेंगे।
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