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पंचायत से पार्लियामेंट तक एक साथ चुनाव कराने पर चर्चा शुरू, कमेटी बनी

Fri, 30 Mar 2018 01:36 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 30 Mar 2018 01:36 AM IST
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 planning for one nation one election in uttar pradesh.
चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह - फोटो : amar ujala

पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक एक मतदाता सूची और एक साथ चुनाव की संभावनाओं पर स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने विचार-विमर्श शुरू कर दिया। समिति के सदस्य इस बात पर एकमत नजर आए कि 2024 के लोकसभा आम चुनाव से दोनों ही प्रयोगों पर अमल शुरू कर देना चाहिए। समिति की अगली बैठक 11 अप्रैल को होगी। तब इन प्रयोगों के नफा-नुकसान पर चर्चा कर संस्तुतियां तैयार की जाएंगी।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में चुनाव सुधारों पर विचार के लिए स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में सात सदस्यीय कमेटी गठित की थी। बृहस्पतिवार को योजना भवन में समिति की पहली बैठक हुई। सूत्रों ने बताया कि बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि अखिल भारतीय स्तर पर एक समान मतदाता सूची होनी चाहिए। यह ऐसी सूची हो जिससे लोकसभा से लेकर शहरी व ग्रामीण पंचायतों तक के चुनाव कराए जा सकें। इसके अलावा पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक के चुनाव एक साथ हों।
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सदस्य इस बात पर भी एकमत थे कि पूरी कार्ययोजना के साथ 2024 के चुनाव से यह व्यवस्था लागू की जा सकती है। बैठक में सदस्यों से अनुरोध किया गया कि वे इन सुधारों की अच्छाइयों और बुराइयों व संभावित कठिनाइयों पर आपस में विचार-विमर्श करें। सभी सदस्य अलग-अलग अपने ड्राफ्ट नोट तैयार कर इन्हें आपस में साझा कर बेहतर निष्कर्ष निकाल सकते हैं। 11 अप्रैल की बैठक में इन निष्कर्षों पर विचार-विमर्श कर संस्तुतियां तैयार की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने समिति को 15 अप्रैल तक संस्तुतियां सौंपने का निर्देश दिया है।
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ये दिए गए प्रमुख सुझाव
ग्रामीण पंचायतों के चुनाव सिंबल पर कराएं जाएं
सदस्यों ने कई दूसरे राज्यों की तरह प्रदेश में भी ग्रामीण पंचायतों के चुनाव राजनीतिक दलों के सिंबल पर कराने का सुझाव दिया। नगरीय निकायों के चुनाव पहले से ही सिंबल पर हो रहे हैं। हालांकि प्रदेश में 59 हजार पंचायतें होने से सिंबल से चुनाव में कई तरह की दिक्कतें आने की भी आशंका जताई गई। सदस्यों ने ग्रामीण पंचायतों का गठन 1000 की जगह 5 हजार से 10 हजार की आबादी पर कर इस व्यवस्था पर अमल का विकल्प सुझाया है।

आधार से लिंक हो मतदाता सूची
मतदाता सूची में डुप्लीकेट नामों की समस्या से निजात पाने के लिए इसे आधार से लिंक करने और सूची को अपडेट करने व त्रुटिरहित बनाने में तकनीक के अधिकाधिक उपयोग के सुझाव भी आए।

केरल की तरह दलबदल विरोधी कानून लागू हो
केरल में निकाय चुनाव के निर्वाचित प्रतिनिधियों पर दलबदल विरोधी कानून (एंटी डिफेक्शन लॉ) लागू होता है। प्रदेश में भी इस पर अमल किया जाए।

इस प्रयोग के संभावित लाभ

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- त्रुटिरहित मतदाता सूची होने से वोटिंग प्रतिशत बढ़ेगा।

- अलग-अलग मतदाता सूची तैयार करने पर होने वाले भारी खर्च की बचत होगी।

- अलग-अलग चुनाव में हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। एक साथ चुनाव से सरकारी राजस्व की बड़ी बचत होगी।

- लगभग हर वर्ष कहीं न कहीं चुनाव से विकास कार्य प्रभावित होता है। एक साथ चुनाव होने से विकास के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।

- पांच वर्ष के लिए निर्वाचित सरकारों का लगभग एक चौथाई समय चुनाव आचार संहिता के दायरे में खप जाता है, इससे राहत मिलेगी।

- निर्वाचित प्रतिनिधि काम के लिए पर्याप्त समय न मिलने का बहाना नहीं कर सकेंगे।

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