हवाई जहाज से नवाबों के नगर आएंगे वनराज
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हाई प्रोफाइल इटावा लायन सफारी के लिए चार और एशियाई बब्बर शेरों को गुजरात से लाए जाने की कवायद चल रही है।
लंबे सफर की दिक्कतों से बचाने के लिए उन्हें हवाई जहाज से लाए जाने की योजना है। ये बब्बर शेर कुछ दिन लखनऊ जू के भी मेहमान होंगे।
हालांकि बब्बर शेरों की संख्या और किस आयु वर्ग के होंगे, इसकी योजना बनाई जा रही है। इटावा स्थानांतरित करने से पहले इन्हें कुछ दिन लखनऊ प्राणि उद्यान में रखा जाएगा। वन विभाग का प्लान पहले चरण में वहां कम से कम 4 जोड़े उतारने का है।
सड़क मार्ग में हुई थी दिक्कत
अप्रैल के पहले ही हफ्ते में कानपुर जू में हैदराबाद से लाए गए दो एशियाई बब्बर शेर (विष्णु-लक्ष्मी)और राजकोट जू से लाए गए दो अन्य एशियाई बब्बर शेर (कुबेर-हीर) सड़क मार्ग से लाए गए थे।
सड़क मार्ग से आने में उन्हें घंटों लग गए थे। इतने लंबे सफर के बाद उन्हें सामान्य होने में काफी समय लगा था। वहीं दूसरी ओर कानपुर चिड़ियाघर से लाए गए शेर मामूली रूप से चोटिल हो गए थे।
वन्य जीवों को ऐसी परेशानियों से बचाने के लिए वन विभाग के विशेषज्ञ इस बार फुल प्रूफ प्लान बनाने में जुटे हैं। हवाई जहाज से लाए जाने की योजना इसी का हिस्सा है।
गुजरात से किस उम्र और किस अनुपात में एशियाई शेर लाए जाएं, इसको लेकर गत जुलाई में वन विभाग के आला अधिकारी पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ का दौरा भी कर चुके हैं।
दौरे में उन्होंने राजकोट, शकरबाग जू, जूनागढ़ में कई मुद्दों पर तैयारियां भी कीं थीं। सूत्रों के मुताबिक आने वाले एशियाई बब्बर शेरों को जू के ही बलरामपुर हाउस और उसके बगल में नए बने लायन हाउस में ठहराया जा सकता है।
लायन सफारी प्रजनन केंद्र की तैयारियां जोरों पर
इटावा लायन सफारी में बन रहे प्रजनन केंद्र की तैयारियां जोरों पर है। प्रोजेक्ट से जुड़े कई आला अधिकारियों के दल ने पिछले दिनों लखनऊ जू का भी दौरा किया।
लायन हाउस, बलरामपुर हाउस समेत टीम ने जू हॉस्पिटल में भी काफी समय बिताया। चूंकि प्रोजेक्ट में 2013 के आखिर तक प्रजनन केंद्र तैयार कर 2014 जनवरी तक वहां शेेरों को प्रजनन के लिए उतारना है।
ऐसे में पहले चरण के लिए लखनऊ और कानपुर जू के चारों शेरों को ही वहां भेजा जाएगा। प्रजनन केदौरान उनकी विशेष देखभाल के लिये एक कीपर को भी गुजरात के प्राणि उद्यानों में नवजात शेर शिशुओं की देखभाल सीखने के लिए भेजा जायेगा।
पहले भी की है हवाई यात्रा
ये पहला मामला नहीं होगा, जब लखनऊ जू में हवाई जहाज से कोई वन्यजीव लाया जाएगा। इससे पहले करीब 12-14 साल पहले मैसूर जू से बैबून को हवाई मार्ग से यहां लाया जा चुका है।
50 से ज्यादा घंटों की थकान भरी यात्रा के बजाए चंद घंटों की यात्रा में वन्यजीव को भी सहूलियतें रहने केचलते प्लान को ज्यादा मुफीद माना जा रहा है।
बदले जाएंगे जोड़े
प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों की मानें तो वहां जाकर एशियाई बब्बर शेरों के जोड़े बदले जाएंगे। कानपुर जू के विष्णु और लखनऊ जू की हीर का जोड़ा बन सकता है। इसी तरह आने वाले चारों शेरों के अलावा मोजकब कुबेर और लक्ष्मी के बारे में भी अलग प्लान हैं।