केंद्र की पहल से मुश्किल होगी पुलिस की नौकरी!
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केंद्र सरकार ने पुलिस की छवि सुधारने की पहल की है। इसके तहत पुलिस में भर्ती के समय मनोवैज्ञानिक परीक्षण की योजना है। इस परीक्षण में खरा उतरने वालों की ही पुलिस विभाग में नौकरी मिल सकेगी।
इतना ही नहीं, ट्रेनिंग के दौरान भी इनके व्यवहार पर नजर रहेगी और खामी नजर आने पर बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।
पुलिसकर्मियों द्वारा आम लोगों से अभद्रता के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। इन पुलिसकर्मियों को पद से हटाने से लेकर निलंबन व अन्य विभागीय कार्रवाई की जाती है, लेकिन यह सिलसिला थम नहीं रहा।
यहां तक कि तबादले से खफा एक सिपाही ने दो दिन पहले लखनऊ की नाका कोतवाली में इंस्पेक्टर के सामने राइफल लहराई थी। लखनऊ में ही बीते दिनों एक सिपाही ने गोरखपुर के डीआईजी के निजी आवास में फांसी लगा ली।
नींद की गोलियों से परेशानी से निजात पाने में नाकाम एक इंस्पेक्टर ने घर में आत्मदाह कर लिया। पुलिसकर्मियों का तर्क है कि काम के बोझ व क्षमता से अधिक ड्यूटी की वजह से दिमागी तनाव के चलते इनका व्यवहार खराब हो जाता है।
...तो दिखा दिया जाएगा बाहर का रास्ता
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पिछले दिनों विभिन्न राज्यों के पुलिसकर्मियों व अन्य महकमों के कर्मचारियों के आचरण की तुलना की।
इसमें सामने आया कि पुलिस में भर्ती के दौरान चपरासी से लेकर अफसर तक का मनोवैज्ञानिक परीक्षण होना चाहिए, जिससे आत्मघाती प्रवृत्ति व असहिष्णु व्यवहार वाले पुलिस में भर्ती न हो सकें।
इतना ही नहीं, ट्रेनिंग के दौरान भी इनके व्यवहार पर नजर रखी जाए। खामी नजर आने पर प्रशिक्षक उसे दूर करने का प्रयास करे और सुधार न होने पर बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए।
गृह मंत्रालय ने इस मुद्दे पर प्रदेश के पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद को पत्र लिखा है। इस पर एसपी कार्मिक कवींद्र प्रताप सिंह ने प्रदेश के सभी जिलों से सुझाव मांगे हैं। कई अफसरों ने भर्ती के दौरान मनोवैज्ञानिक परीक्षण को लेकर सहमति जताई है।