'94 फीसदी दलित खस्ताहाल, आरक्षण खत्म नहीं होने देंगे'
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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य पीएल पुनिया ने कहा कि जब तक समाज से गैरबराबरी समाप्त नहीं होगी तब तक आरक्षण व्यवस्था खत्म नहीं होने देंगे। हमें राजनैतिक अधिकारों की बराबरी चाहिए। साथ ही आर्थिक व सामाजिक गैरबराबरी का विरोध भी किया जाएगा।
उन्होंने कहा, अनुसूचित जाति के मात्र चार फीसदी लोग ही नौकरी में हैं। दो फीसदी लोग ही ठीक ठाक स्थिति में हैं। बाकी 94 प्रतिशत दलितों की स्थिति काफी दयनीय है। ये लोग बहुत ही खराब स्थिति में जीवन यापन करते हैं।
पुनिया रविवार को राजधानी में अखिल भारतीय चमार महासंघ के जागृति सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, सपा दलितों को मिलने वाले आरक्षण की विरोधी है।
यही वजह है कि प्रमोशन में आरक्षण का लाभ पाने वाले कर्मियों को रिवर्ट किया जा रहा है। जब आरक्षण के समर्थन में संविधान संशोधन विधेयक सदन में रखा गया था तो सपा के सांसदों ने ही हंगामा कर इसके बिल की प्रतियां फाड़ी थीं। कहा कि गैरबराबरी खत्म कर दीजिए हम आरक्षण की मांग नहीं करेंगे। आबादी के हिसाब से देखें तो यूपी में 16 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति की है।
भाजपा लोकसभा में पास कराए प्रमोशन में आरक्षण बिल
पुनिया ने केंद्र की भाजपा सरकार से कहा कि लोकसभा में उनका बहुमत है, वे प्रमोशन में आरक्षण का लाभ देने वाले बिल को वहां पास करा दें। राज्यसभा में कांग्रेस का बहुमत है। यहां से हम इसे पास करा देंगे। उन्होंने अपने समाज के लोगों से हर जिले में एक ऐसा समूह बनाने को कहा जो जरूरत पड़ने पर समाज के लोगों को न्याय दिला सके।
उन्होंने कहा, कानून मत तोड़िए लेकिन कानून का पालन कराने के लिए इस समूह का उपयोग कीजिए। जहां भी दलित उत्पीड़न की घटनाएं हो रही हैं उसका वे स्वत: संज्ञान ले रहे हैं। आयोग उन अधिकारियों को भी तलब करता है जो दलित उत्पीड़न पर ध्यान नहीं देते।
अन्याय व भेदभाव पर जताई चिंता
अखिल भारतीय चमार महासंघ के सम्मेलन में अन्याय, अत्याचार, उत्पीड़न और सामाजिक भेदभाव पर चिंता जताई गई। समाज को आरक्षण व राजनीति में भागीदारी देने की मांग की गई। सम्मेलन में प्रदेश भर के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
आठ सूत्रीय मांगों का मिला समर्थन
मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया ने समाज का हौसला बढ़ाते हुए उनकी आठ सूत्रीय मांगों का समर्थन किया। महासंघ के अध्यक्ष सुरेंद्र पाल सिंह ने कहा, समाज को आगे आने के लिए एकजुट होकर प्रयास करना होगा।
महासचिव हरिनाम गौतम ने अन्याय, अत्याचार, उत्पीड़न और सामाजिक भेदभाव पर चिंता जताई। महासंघ ने आठ सूत्री मांगपत्र राज्यपाल व मुख्यमंत्री को भेजा।
सम्मेलन में उठी प्रमुख मांगें
- स्कूलों में मिड-डे मील बंद कर योजना की राशि संबंधित छात्र व उसके अभिभावक के बैंक खाते में भेजी जाए
- अनुसूचित जाति के अधिकारियों की पदावनति रोकी जाए। पदोन्नति में आरक्षण पर लंबित बिल पास किया जाए
- दलित समाज की भूमि अन्य जाति को बेचने संबंधी बिल पर रोक लगे
- दलित बेरोजगारों को 10 हजार रुपये भत्ता दिया जाए। ब्याज रहित 20 लाख का लोन दिया जाए