क्यों हुआ पीयूष गोयल का दौरा कैंसिल!
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बिजली के मुद्दे पर केंद्र व राज्य सरकार के बीच आरोप प्रत्यारोप के लंबे दौर के बाद शनिवार को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच प्रस्तावित वार्ता नहीं हो सकी।
ऐन वक्त पर पीयूष गोयल का लखनऊ दौरा स्थगित हो गया। राज्य सरकार को सुबह इसकी सूचना दी गई। कोई भी यह बताने को तैयार नहीं है कि पीयूष गोयल का कार्यक्रम अचानक क्यों स्थगित हुआ।
गोयल और मुख्यमंत्री के बीच यूपी में बिजली संकट दूर करने के साथ-साथ केंद्र व राज्य के बीच कोयला, नई परियोजनाओं को पर्यावरणीय मंजूरी समेत कई अन्य मुद्दों पर बातचीत होनी थी।
शासन इसके लिए पिछले कई दिनों से तैयारियों में जुटा हुआ था। गोयल तो नहीं आए लेकिन उनके अधीन बिजली और कोयला मंत्रालय के अधिकारी जरूर लखनऊ पहुंचे हैं तथा इनकी मुख्य सचिव आलोक रंजन के साथ बैठक चल रही है।
फिरा उम्मीदों पर पानी!
आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन बिजली के मुद्दे पर ऊर्जा राज्यमंत्री पीयूष गोयल व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच होने वाली बातचीत से खासा उत्साहित था।
उनका कहना है कि केंद्र व राज्य को निजी घरानों पर अति निर्भरता की नीति को बदलना चाहिए। प्रदेश की बिजली व्यवस्था के सुधार के लिए राजनीति से ऊपर उठकर फैसले लिए जाएं तभी सार्थक परिणाम आ सकेंगे ।
फेडरेशन ने इस बाबत केंद्र व प्रदेश सरकार के समक्ष पांच महत्वपूर्ण मुददे रखते हुए वार्ता में इन समस्याओं का समाधान निकालने का सुझाव दिया था।
फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे के मुताबिक दो दशकों में प्रदेश की बिजली व्यवस्था निजी घरानों पर अति निर्भरता के चलते पूरी तरह चरमरा गई है।
बिजली व्यवस्था सुधारनी है तो सबसे पहली प्राथमिकता ऊर्जा नीति की पुनर्समीक्षा होनी चाहिए। बीते नौ सालों में प्रदेश में निजी क्षेत्र को लगभग 17000 मेगावाट क्षमता की नई बिजली परियोजनायें दी गईं किंतु ज्यादातर में काम ही नहीं शुरू हो पाया।
निजी घरानों को दी गई परियोजनाओं में आधी भी सरकारी क्षेत्र को दी गई होतीं तो 8500 मेगावाट उत्पादन बढ़ गया होता।
दूसरा बड़ा मुद्दा केंद्र से राज्यों को मिलने वाली बिजली के फ फार्मूले में बदलाव का है।
मौजूदा गाडगिल फॉर्मूला अव्यवहारिक हो चुका है इसलिए इसे बदला जाना चाहिए ताकि यूपी जैसे बडे़ राज्य को केंद्र से उसी अनुपात में बिजली मिल सके।