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Sitapur: नवरात्रि और एकादशी को व्रत रखता था कुत्ता, मरने पर परिवार के सदस्य की तरह किया गया पिंडदान
Fri, 10 May 2024 03:34 PM IST
ishwar ashish
संवाद न्यूज एजेंसी, (नैमिषारण्य) सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, (नैमिषारण्य) सीतापुर
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 10 May 2024 03:34 PM IST
सार
सीतापुर के नैमिषारण्य में एक परिवार ने अपने पालतू कुत्ते का अंतिम संस्कार करने के बाद पिंडदान किया। परिवार के लोगों का कहना है कि वो हमारे लिए घर के एक सदस्य की तरह था।
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डारसी का हुआ पिंडदान।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
आज के जमाने में जहां लोग अपने परिजनों को भूल जाते हैं ऐसे में ही एक व्यक्ति ने अपने पशु प्रेम को जाहिर करते हुए अपने पालतू कुत्ते की मृत्यु हो जाने पर अपने घर के सदस्य की तरह विधिविधान से घर पर दाह संस्कार किया और तीर्थ में आकर उसकी मुक्ति के लिए पिंडदान तर्पण किया।सुनने में हैरानी हो रही होगी मगर यह वाक्या सच है।
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नैमिषारण्य तीर्थ नाभि गया के नाम से भी जाना जाता है पितरों की तृप्ति के लिए यह स्थान जाना जाता है। देश के सभी प्रदेशों और पड़ोसी देश नेपाल से बड़ी संख्या में लोग आकर अपने परिजनों का पिंडदान तर्पण करते है ताकि उनके वंशजो को मुक्ति मिल सके। मगर तीर्थ प्रांगण मे कल एक अलग नजारा देखने को मिला। आपको बता दें कि सिद्धार्थ नगर निवासी सुरेंद्र पाण्डेय अपनी पत्नी के साथ पिंडदान कर रहे थे। मगर वह पिंडदान अपने किसी परिजन के लिए नहीं बल्कि अपने पालतू कुत्ते के लिए कर रहे थे।
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उन्होंने सामने अपने पालतू कुत्ते डारसी की फोटो रखकर विधिविधान से आचार्य के द्वारा पिंडदान तर्पण किया। पिण्डदान से पूर्व घर पर डारसी की मृत्यु होने के बाद विधिवत दाह संस्कार किया था और यहां आकर पिंडदान किया। सुरेंद्र ने बताया एक साल की उम्र से उसको अपने बेटे की तरह पाला पाला। वह हम लोगों की तरह नवरात्रि और एकादशी व्रत रहता था। अगर व्रत के दौरान उसे कोई अन्न खिलाता था तो वह नहीं खाता था सिर्फ दूध और फल खाता था।
6 साल तक मैंने अपने बेटे की तरह उसको रखा। वही डारसी घर के बाहर खेल रहा था तभी किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी और उसकी मौत हो गई जिससे नैमिषारण्य तीर्थ आकर उसके मुक्ति के लिए पिंडदान किया हैं। जब वह पिंडदान कर रहे थे तो उनके और पत्नी की आंखों से आंसू बह रहे थे।
उन्होंने बताया जब से डारसी की मौत हुई हैं तबसे परिवार के लोगो ने भोजन नहीं किया हैं क्योंकि डारसी मेरे घर का सदस्य था। यह नजारा देखकर हर कोई कहते दिखा अगर पशु प्रेम हो तो ऐसा हो। आज के समय स्वार्थी दुनिया मे लोग अपने खून के रिश्तों को भूल जाते हैं। ऐसे में जानवर के प्रति सुरेंद्र पाण्डेय के प्रेम को देखकर हर कोई हैरान था क्योंकि यहां के पुरोहित भी हैरान थे। उन्होंने लोगो को अपने परिजनों का पिंडदान करते तो देखा मगर पहली किसी को अपने पालतू कुत्ते के लिए पिंडदान करते देखा।