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पीलीभीत उत्तर प्रदेश का तीसरा टाइगर रिजर्व

Sat, 14 Jun 2014 02:02 AM IST
अजित बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ
अजित बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 14 Jun 2014 02:02 AM IST
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pilibhit to be third tiger reserve in up

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अखिलेश सरकार ने प्रदेश के तीसरे टाइगर रिजर्व के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। इसके लिए पीलीभीत और शाहजहांपुर के जंगल आरक्षित किए गए हैं।

यह तीसरा क्षेत्र पीलीभीत टाइगर रिजर्व के नाम से जाना जाएगा, जिसका क्षेत्रफल 73024.98 हेक्टेयर है।

इस क्षेत्र के विकास के लिए अब नेशनल टाइगर रिजर्व कन्जर्वेशन अथॉरिटी से फंड भी मिल सकेगा।

फिलहाल पीलीभीत रिजर्व फॉरेस्ट में 30 बाघ हैं। यह देश का 45वां टाइगर रिजर्व होगा।

नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी की संस्तुति मिलते ही राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी।

इस साल फरवरी में ही पीलीभीत वाइल्ड लाइफ सेंक्च्युरी की घोषणा की गई थी। उसी वक्त कैबिनेट ने इस आरक्षित वन क्षेत्र को टाइगर रिजर्व घोषित करवाने का फैसला ले लिया था।

लेकिन कुछ दिन बाद ही लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने से जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने में वक्त गया।

अधिसूचना के मुताबिक, पीलीभीत टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 73024.98 हेक्टेयर होगा। नेपाल सीमा पर स्थित यह क्षेत्र पीलीभीत और शाहजहांपुर वन प्रभागों के अंतर्गत आता है।
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बाघों के लिए यह इलाका काफी मुफीद माना जाता है। यहां बारासिंघा, बंगाल फ्लोरिकेन, पाढ़ा और तेंदुए भी पाए जाते हैं।

मांसाहारी जानवरों के शिकार (प्रे बेस) चीतल, सांबर, जंगली सूअर, पाढ़ा और नीलगाय यहां अच्छी खासी संख्या में मिलते हैं।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व बनने के बाद उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र के सभी महत्वपूर्ण जंगल संरक्षित क्षेत्र में आ गए हैं। प्रदेश में संरक्षित क्षेत्र कुल भौगोलिक क्षेत्र का 2.37 प्रतिशत है।
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बाघ बचने से ही बचेगा इंसान

बाघों के बचने से ही हमारा पारिस्थितिकी तंत्र सुरक्षित रह पाएगा। वजह, बाघ खाद्य शृंखला (फूड चेन) के शीर्ष पर है। यानी जब दूसरे जानवर बचेंगे, तभी बाघ बचेगा।


यह तभी मुमकिन हो पाएगा, जब जंगल बचेंगे। जंगल बचने पर ही हमें ऑक्सीजन और पानी मिलेगा। जंगलों में इंसानों की बढ़ती गतिविधियां और अवैध शिकार के चलते बाघों की संख्या में काफी कमी आई है।
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