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अभी शुरू नहीं हुई राम मंदिर के नींव की खुदाई, अक्तूबर से शुरू होगा नींव निर्माण
Wed, 09 Sep 2020 06:08 PM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
Published by: प्राची प्रियम
Updated Wed, 09 Sep 2020 06:08 PM IST
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परिसर में प्रवेश करते नृपेंद्र मिश्र
- फोटो : अमर उजाला
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श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राममंदिर निर्माण के लिए नींव खुदाई अभी शुरू नहीं हुई है। नींव की 1200 पायलिंग में पहले एक पाइल (कुएं के आकार का पिलर) फाउंडेशन बनाकर 15 अक्तूबर तक टेस्टिंग का लक्ष्य है। राममंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मंगलवार को परिसर में तीन घंटे तक एलएंडटी के इंजीनियरों के साथ हजारों साल तक अक्षुण्ण रहने वाले राममंदिर के नींव निर्माण की डिजाइन देखने के साथ सभी तकनीकी दृष्टिकोण पुख्ता करने के निर्देश दिए।
तय हुआ कि पितृपक्ष समाप्त होते ही एलएंडटी मशीनों की पूजा करके एक पाइल फाउंडेशन तैयार किया जाएगा, जिसकी सभी मानकों पर क्षमता जांचने के बाद ही नींव का निर्माण तेजी से होगा।
राममंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त आईएएस नृपेंद्र मिश्र मंगलवार सुबह अकेले ही करीब 9:30 बजे श्रीरामजन्मभूमि परिसर पहुंच गए। वहां पहले से ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय व सदस्य डॉ. अनिल मिश्र समेत एलएंडटी के परियोजना प्रबंधक वृजेश कुमार सिंह टीम के साथ मौजूद थे।
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नृपेंद्र मिश्र ने नींव तैयार करने की पूरी तकनीकी जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि डिजाइन पूरी तरह तैयार है। 60 मीटर (200 फीट) गहराई तक राममंदिर का पायलिंग फाउंडेशन होगा। 1200 पाइलिंग सीमेंट, मोरंग और गिट्टी से तैयार होगी।
यह समुद्र या नदी में पुल के फाउंडेशन जैसा होगा, लेकिन इसमें स्टील का प्रयोग नहीं होगा। कुएं के निर्माण जैसा गोलाकार सीमेंट, मोरंग और गिट्टी से भी पाइल तैयार की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार इंजीनियरों ने मौके पर निशान लगाकर पूरे परिसर का डेमो भी दिया। नृपेंद्र मिश्र ने इस दौरान गर्भगृह के दर्शन भी किए। साथ ही गर्भगृह की लंबाई-चौड़ाई के साथ पुराने राममंदिर के डायग्राम में बढ़ाए गए गूढ़ मंडप व इसके दाएं-बाएं कीर्तन व प्रार्थना मंडप को देखा।
फिर गर्भगृह की सीध में रंगमंडप, नृत्यमंडप और सबसे अग्र भाग में सिंहद्वार कहां होगा, इसकी जानकारी ली। भक्तों की परिक्रमा के लिए मंदिर के चारों ओर 14 मीटर चौड़े कॉरिडोर के साथ करीब ढाई एकड़ के मूल मंदिर निर्माण का दूना हिस्सा करीब पांच एकड़ में तैयार होने नींव की पायलिंग के लिए निशान देखा।
ट्रस्ट के महासचिव ने परिसर में जर्जर पड़े मंदिरों के तोड़े जाने की जानकारी देते हुए मौके पर दिखाया भी। इनमें स्थित आराध्य को पुन:स्थापित करने की रणनीति बताई। उन्हें राममंदिर तक पहुंचने वाले छह लेन के मुख्य मार्ग की लोकेशन भी दिखाई।
परिसर में प्रवेश व निकास द्वार से लेकर कई प्रकल्प व बेहतर जनसुविधाओं के विकास की योजना की जानकारी देते हुए मंदिर परिसर को सोलर ऊर्जा के साथ हरियाली, इको फ्रेंडली बनाने की रणनीति बताई। साथ ही पेड़-पौधों के चयन में धार्मिकता का ध्यान रखने की बात कही।
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तय हुआ कि पितृपक्ष समाप्त होते ही एलएंडटी मशीनों की पूजा करके एक पाइल फाउंडेशन तैयार किया जाएगा, जिसकी सभी मानकों पर क्षमता जांचने के बाद ही नींव का निर्माण तेजी से होगा।
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राममंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त आईएएस नृपेंद्र मिश्र मंगलवार सुबह अकेले ही करीब 9:30 बजे श्रीरामजन्मभूमि परिसर पहुंच गए। वहां पहले से ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय व सदस्य डॉ. अनिल मिश्र समेत एलएंडटी के परियोजना प्रबंधक वृजेश कुमार सिंह टीम के साथ मौजूद थे।
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नृपेंद्र मिश्र ने नींव तैयार करने की पूरी तकनीकी जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि डिजाइन पूरी तरह तैयार है। 60 मीटर (200 फीट) गहराई तक राममंदिर का पायलिंग फाउंडेशन होगा। 1200 पाइलिंग सीमेंट, मोरंग और गिट्टी से तैयार होगी।
यह समुद्र या नदी में पुल के फाउंडेशन जैसा होगा, लेकिन इसमें स्टील का प्रयोग नहीं होगा। कुएं के निर्माण जैसा गोलाकार सीमेंट, मोरंग और गिट्टी से भी पाइल तैयार की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार इंजीनियरों ने मौके पर निशान लगाकर पूरे परिसर का डेमो भी दिया। नृपेंद्र मिश्र ने इस दौरान गर्भगृह के दर्शन भी किए। साथ ही गर्भगृह की लंबाई-चौड़ाई के साथ पुराने राममंदिर के डायग्राम में बढ़ाए गए गूढ़ मंडप व इसके दाएं-बाएं कीर्तन व प्रार्थना मंडप को देखा।
फिर गर्भगृह की सीध में रंगमंडप, नृत्यमंडप और सबसे अग्र भाग में सिंहद्वार कहां होगा, इसकी जानकारी ली। भक्तों की परिक्रमा के लिए मंदिर के चारों ओर 14 मीटर चौड़े कॉरिडोर के साथ करीब ढाई एकड़ के मूल मंदिर निर्माण का दूना हिस्सा करीब पांच एकड़ में तैयार होने नींव की पायलिंग के लिए निशान देखा।
ट्रस्ट के महासचिव ने परिसर में जर्जर पड़े मंदिरों के तोड़े जाने की जानकारी देते हुए मौके पर दिखाया भी। इनमें स्थित आराध्य को पुन:स्थापित करने की रणनीति बताई। उन्हें राममंदिर तक पहुंचने वाले छह लेन के मुख्य मार्ग की लोकेशन भी दिखाई।
परिसर में प्रवेश व निकास द्वार से लेकर कई प्रकल्प व बेहतर जनसुविधाओं के विकास की योजना की जानकारी देते हुए मंदिर परिसर को सोलर ऊर्जा के साथ हरियाली, इको फ्रेंडली बनाने की रणनीति बताई। साथ ही पेड़-पौधों के चयन में धार्मिकता का ध्यान रखने की बात कही।
मशीन की एक दिन में एक पायलिंग निर्माण करने की क्षमता
लार्सन एंड ट्यूब्रो के विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम यहां नींव निर्माण के लिए चार कैसाग्रैंड मशीनें लगाएगी। अभी एक ही मशीन कानपुर से आई है। हर एक मशीन की क्षमता एक दिन में एक पाइलिंग तैयार करने की है। सूत्र बताते हैं कि पितृपक्ष के बाद पहला पाइल फाउंडेशन तैयार होगा।
इसका 15 अक्तूबर तक भार क्षमता, भूकंपरोधी शक्ति आदि की जांच चेन्नई व रूड़की के इंजीनियर करके जब मानकों पर खरा होने का प्रमाणपत्र देंगे, तब 20 अक्तूबर से चारों मशीनों के जरिए तेजी से 1200 पाइलिंग तैयार करने का काम शुरू होगा।
बताते हैं कि यह पाइलिंग भूतल से करीब 20 मीटर नीचे तक ही लाकर उसके बाद ठोस सीमेंट-मोरंग व गिट्टी का मोटा फाउंडेशन तीन परतों में बनेगा। फिर सबसे ऊपरी हिस्से में राजस्थान के बंशीपहाड़ीपुर के गुलाबी पत्थरों से मुख्य फाउंडेशन तैयार होगा।
सरकार के जिम्मे होगी राममंदिर परिसर की सुरक्षा की जिम्मेदारी
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का स्पष्ट कहना है कि राममंदिर परिसर की सुरक्षा सरकार के जिम्मे होगी। यह विश्वस्तरीय केंद्र बनने जा रहा है इसलिए इसकी सुरक्षा भी विश्वस्तरीय होनी चाहिए।
चूंकि यह विश्वस्तरीय प्रोजेक्ट है, इसलिए इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए किसी प्राइवेट सुरक्षा एजेंसी को जिम्मेदारी नहीं सौंपी जा सकती है। राममंदिर की सुरक्षा सरकार अपने स्तर से देखेगी, ट्रस्ट का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
इसका 15 अक्तूबर तक भार क्षमता, भूकंपरोधी शक्ति आदि की जांच चेन्नई व रूड़की के इंजीनियर करके जब मानकों पर खरा होने का प्रमाणपत्र देंगे, तब 20 अक्तूबर से चारों मशीनों के जरिए तेजी से 1200 पाइलिंग तैयार करने का काम शुरू होगा।
बताते हैं कि यह पाइलिंग भूतल से करीब 20 मीटर नीचे तक ही लाकर उसके बाद ठोस सीमेंट-मोरंग व गिट्टी का मोटा फाउंडेशन तीन परतों में बनेगा। फिर सबसे ऊपरी हिस्से में राजस्थान के बंशीपहाड़ीपुर के गुलाबी पत्थरों से मुख्य फाउंडेशन तैयार होगा।
सरकार के जिम्मे होगी राममंदिर परिसर की सुरक्षा की जिम्मेदारी
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का स्पष्ट कहना है कि राममंदिर परिसर की सुरक्षा सरकार के जिम्मे होगी। यह विश्वस्तरीय केंद्र बनने जा रहा है इसलिए इसकी सुरक्षा भी विश्वस्तरीय होनी चाहिए।
चूंकि यह विश्वस्तरीय प्रोजेक्ट है, इसलिए इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए किसी प्राइवेट सुरक्षा एजेंसी को जिम्मेदारी नहीं सौंपी जा सकती है। राममंदिर की सुरक्षा सरकार अपने स्तर से देखेगी, ट्रस्ट का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
निर्माण स्थल पर होगी 15 मीटर ऊंची कॉर्टन की घेराबंदी
राममंदिर निर्माण स्थल के चारों तरफ 15 मीटर ऊंची कॉर्टन की घेराबंदी करने की तैयारी की जा रही है। यह सुरक्षा की दृष्टि से किया जा रहा है, ताकि बाहर के मकानों व मठ-मंदिरों से निर्माण कार्य न दिखे न कोई फोटो या वीडियोग्राफी कर सके। निर्माण स्थल के अंदर की गतिविधियों की जानकारी बाहर लीक न हो सके। वीवीआईपी को निर्माण कार्य दिखाने के लिए बनेगा फाउंडेशन
राममंदिर निर्माण कार्य देखने के लिए परिसर में निर्माण स्थल से कुछ दूरी पर एक ऊंचा फाउंडेशन का भी निर्माण कराया जाएगा। यह बात निर्माण समिति के प्रमुख नृपेंद्र मिश्र के समक्ष हुई। कहा गया कि निर्माण कार्य शुरू होने पर तमाम वीवीआईपी श्रीरामजन्मभूमि परिसर में आ सकते हैं, सबकी इच्छा होगी कि राममंदिर का निर्माण देख सकें।
ऐसे में अंदर जाना खतरे को दावत देना होगा। इसे ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट ने निर्णय लिया है कि एक ऊंचा अस्थाई मजबूत फाउंडेशन एलएंडटी तैयार करेगी, जहां से वीवीआईपी या ट्रस्ट से अनुमति लेकर भक्त निर्माण कार्य देख सकें। लेकिन यहां कैमरा सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधित रहेगा।
राम मंदिर का नींव निर्माण अक्तूबर से: चंपत
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मंगलवार को कहा कि राममंदिर निर्माण के लिए नींव खुदाई का काम अक्तूबर से शुरू हो जाएगा। नींव में 1200 खंभे गलाए जाएंगे। इसमें अभी एक महीने का समय लग सकता है।
सबसे पहले परीक्षण के तौर पर 100 फीट गहराई में एक मीटर व्यास के खंभे को तैयार किया जाएगा। यह टेस्टिंग पाइलिंग होगी। फिर मशीनों से उसकी ताकत नापी जाएगी। एक महीने में इसकी रिपोर्ट आने के बाद अक्तूबर मध्य से सभी खंभों को गलाने का काम शुरू होगा।
उन्होंने बताया कि सभी का मत है कि मंदिर में नीव की आयु मंदिर के पत्थर की आयु से ज्यादा रखी जाए। इसीलिए सीमेंट-गिट्टी की ताकत व आयु को लेकर टेस्ट चल रहा है।
राममंदिर निर्माण कार्य देखने के लिए परिसर में निर्माण स्थल से कुछ दूरी पर एक ऊंचा फाउंडेशन का भी निर्माण कराया जाएगा। यह बात निर्माण समिति के प्रमुख नृपेंद्र मिश्र के समक्ष हुई। कहा गया कि निर्माण कार्य शुरू होने पर तमाम वीवीआईपी श्रीरामजन्मभूमि परिसर में आ सकते हैं, सबकी इच्छा होगी कि राममंदिर का निर्माण देख सकें।
ऐसे में अंदर जाना खतरे को दावत देना होगा। इसे ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट ने निर्णय लिया है कि एक ऊंचा अस्थाई मजबूत फाउंडेशन एलएंडटी तैयार करेगी, जहां से वीवीआईपी या ट्रस्ट से अनुमति लेकर भक्त निर्माण कार्य देख सकें। लेकिन यहां कैमरा सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधित रहेगा।
राम मंदिर का नींव निर्माण अक्तूबर से: चंपत
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मंगलवार को कहा कि राममंदिर निर्माण के लिए नींव खुदाई का काम अक्तूबर से शुरू हो जाएगा। नींव में 1200 खंभे गलाए जाएंगे। इसमें अभी एक महीने का समय लग सकता है।
सबसे पहले परीक्षण के तौर पर 100 फीट गहराई में एक मीटर व्यास के खंभे को तैयार किया जाएगा। यह टेस्टिंग पाइलिंग होगी। फिर मशीनों से उसकी ताकत नापी जाएगी। एक महीने में इसकी रिपोर्ट आने के बाद अक्तूबर मध्य से सभी खंभों को गलाने का काम शुरू होगा।
उन्होंने बताया कि सभी का मत है कि मंदिर में नीव की आयु मंदिर के पत्थर की आयु से ज्यादा रखी जाए। इसीलिए सीमेंट-गिट्टी की ताकत व आयु को लेकर टेस्ट चल रहा है।