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लविवि में जुलाई के आखिरी तक शुरू होगी पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया

Fri, 12 Jul 2019 01:36 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jul 2019 01:36 AM IST
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phd admission process will start from july last week
लविवि में जुलाई के अंत तक शुरू होगी पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में यूजी-पीजी कोर्स की प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने की कवायद में जुट गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन जुलाई के अंत तक पीएचडी प्रवेश की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। इससे पहले इससे जुड़ी अन्य कवायदों को पूरा किया जा रहा है। जल्द ही पीएचडी कमेटी की बैठक कर कार्यक्रम पर मुहर लगाई जाएगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक साल के गैप के बाद 2018-19 के पीएचडी प्रवेश मार्च में पूरे कराए हैं। यूजीसी के नए पीएचडी अध्यादेश को पूरी तरह से लागू कराने में समय लग गया। इसके बाद यह ऊहापोह था कि नए सत्र 2019-20 में पीएचडी प्रवेश होंगे या नहीं? वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने नए सत्र में भी प्रवेश की कवायद शुरू कर दी है।
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हालांकि इस सत्र में विश्वविद्यालय प्रशासन सहयुक्त कॉलेजों के एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसर को कितने पीएचडी विद्यार्थी अलॉट किए जाएं, इस पर और मंथन कर रहा है। जानकारी के अनुसार, काफी संख्या में पीएचडी छात्र लखनऊ विश्वविद्यालय में पीएचडी करने के उद्देश्य से आते हैं और जब उन्हें कॉलेज में सीटें अलॉट हो जाती हैं तो वे इससे कतराने लगते हैं। ऐसे में अब विश्वविद्यालय पहले से ही कॉलेजों में लिमिटेड सीटें देगा।
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इसके पीछे का एक बड़ा कारण कॉलेजों में पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव भी है। बीते सत्र में कॉलेजों में जहां संबंधित विषय में पीजी था और वहां नियमित शिक्षक तैनात थे, वहीं पीएचडी सीटें दी गई थीं। प्रति कुलपति प्रो. राजकुमार सिंह ने कहा कि ऐसा देखने में आया है कि कॉलेजों में विद्यार्थी पीएचडी करने में कम इच्छुक होते हैं। ऐसे में वहां सीटें अलॉट करने से पहले रिव्यू किया जा रहा है। हम जुलाई के अंत तक प्रवेश आवेदन प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में हैं।
कोर्स वर्क में भी मिलेगी मैटरनिटी लीव
विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने हाल के दिनों में एक-दो ऐसे मामले आए, जिसमें कोर्स वर्क के दौरान छात्राओं ने मैटरनिटी लीव के लिए आवेदन किए हैं। इसे लेकर विभागाध्यक्ष ऊहापोह में थे कि पीएचडी के दौरान तो इसका लाभ मिलता है, लेकिन कोर्स वर्क के दौरान मिलता है या नहीं? इस पर प्रति कुलपति प्रो. सिंह ने कहा कि कोर्स वर्क के दौरान भी छात्रा को इस लीव का लाभ मिलता है। पीएचडी अध्यादेश के अनुसार, कोर्स वर्क करने के लिए भी दो साल का समय विशेष परिस्थितियों में मिलता है।

शिक्षकों के आधार पर एमफिल भी
विश्वविद्यालय के नए सत्र 2019-20 में अभी तक एमफिल में प्रवेश की कवायद नहीं शुरू हो सकी है। जानकारी के अनुसार, एमफिल को लेकर भी यूजीसी की ओर से नए नियम जारी किए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन इनका अध्ययन कर रहा है। पीएचडी की तरह एमफिल में भी शिक्षकों की संख्या के आधार पर विद्यार्थियों के अलॉटमेंट की व्यवस्था दी गई है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन यह अध्ययन कर रहा है कि किस आधार पर प्रवेश कराए जाएं।
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