कई विवादों के बीच पीजीटी का रिजल्ट हुआ घोषित
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने बुधवार को प्रवक्ता (पीजीटी) भौतिक विज्ञान एवं रसायन विज्ञान का परिणाम घोषित कर दिया है। चयन बोर्ड की ओर से घोषित परिणाम एक बार फिर से विवादों में आ गया है।
घोषित परिणाम में चयन बोर्ड के लोगों एवं ओएमआर का मूल्यांकन करने वाली एजेंसी की मिलीभगत से पीजीटी रसायन विज्ञान में एक ऐसे अभ्यर्थी को पास कर दिया गया जो परीक्षा के दौरान ओएमआर पर मात्र 10 प्रश्नों के गोले को भरा था।
पता चला है कि कार्बन कॉपी में इस अभ्यर्थी ने मात्र 10 गोले भरे हैं, जबकि जांच के बाद चयन बोर्ड पहुंचे मूल ओएमआर में उस अभ्यर्थी के सभी गोले भरे मिले।
पीजीटी परिणाम की जांच के दौरान गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद चयन बोर्ड ने उस अभ्यर्थी को जारी रिजल्ट से बाहर कर दिया। घोषित परिणाम सातवीं कतार में बारहवें क्रम पर इस परिणाम की जगह को तारांकित किया गया है।
गड़बड़ी के बारे में आयोग के अध्यक्ष डॉ. सनिल कुमार मौन साधे हुए हैं। उन्होंने अपना मोबाइल बंद कर लिया है, जबकि सचिव जितेंद्र कुमार ने किसी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार किया है। पता चला है कि जिस महिला अभ्यर्थी को रसयान विज्ञान पीजीटी की परीक्षा में पास करने की कोशिश की गई वह कानपुर में परीक्षा में शामिल हुई थी।
पीजीटी समाज शास्त्र में भी हुई गड़बड़ी
इससे पहले चयन बोर्ड की ओर से पीजीटी समाजशास्त्र के परिणाम में भी इसी प्रकार की गड़बड़ी की बात सामने आई थी। कार्बन कॉपी में मात्र 16 प्रश्नों के भरने वाले अभ्यर्थी के मूल ओएमआर में 110 प्रश्नों के गोले भर दिए थे।
चयन बोर्ड अध्यक्ष ने इस गलती को सुधार करते हुए परिणाम की जांच करवाई तो मामला सही पाया गया।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से इस प्रकार के घोटाले चौकाते नहीं हैं। पूर्व में 2009 में आयोग की टीजीटी-पीजीटी परीक्षा में बड़ी गड़बड़ी की गई थी।
इसमें तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. आरपी वर्मा एवं एक सदस्य ने अपने रिश्तेदारों को बिना लिखित परीक्षा में पास हुए अंतिम चयन कर दिया था। उस समय अमर उजाला की ओर से गड़बड़ी उजागर करने पर रिजल्ट निरस्त करने के बाद तत्कालीन अध्यक्ष को इस्तीफा देना पड़ा था।