मां करती रही इंतजार, पीजीआई ने कैंसर पीड़ित बच्चे को बिना इलाज लौटाया
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संजय गांधी पीजीआई में असाध्य रोगों से पीड़ित गरीब बच्चे को बिना इलाज लौटा दिया गया। बीपीएल सेल ने सभी प्रमाण पत्र होने के बावजूद बच्चे को सिर्फ इसलिए लौटा दिया कि उसका नाम वेबसाइट पर नहीं था।
जब उसकी मां ने गरीबी की रेखा के नीचे के सभी प्रमाण पत्र बीपीएल सेल को उपलब्ध करा दिए थे। अब बच्चे को लेकर उसकी मां धर्मशाला में इलाज शुरू होने का इंतजार कर रही है। फर्रुखाबाद निवासी राजवती के 17 साल के बेटे सुशील राजपूत को ब्लड कैंसर है।
उसका संजय गांधी पीजीआई के हीमेटोलॉजी विभाग में चल रहा है। कैंसर की एडवांस स्टेज होने के कारण सुशील का इलाज तुरंत शुरू होना जरूरी है लेकिन संस्थान के नियम कायदों ने उसका इलाज रोक दिया है। हीमेटोलॉजी विभाग ने उसके इलाज का कुल खर्च 8 लाख रुपये बताया है।
इसमें जांच और दवाएं शामिल है। गरीब राजवती ने गरीबी की रेखा के नीचे के कोटे से अपने बेटे के इलाज के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसे संस्थान की बीपीएल सेल से लौटा दिया गया।
राजवती ने बताया कि उसने फर्रुखाबाद के जिला आपूर्ति अधिकारी से प्रमाणित शपथ पत्र भी बीपीएल सेल को दिया लेकिन उन्होंने मदद से इन्कार कर दिया।
इलाज के लिए बीपीएल और असाध्य रोगी फंड की है व्यवस्था
सरकार ने गरीब मरीजों के इलाज में कोई रुकावट न आए इसके लिए बीपीएल और असाध्य रोगी फंड की व्यवस्था की है, लेकिन इसके लिए पात्र मरीजों को संस्थान के बाबुओं ने अपनी कलम से रोक लगा दी है।
हालांकि सरकार ने कैंसर, हृदय रोग, किडनी व लिवर के असाध्य रोगों के नि:शुल्क इलाज करने के लिए प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों, केजीएमयू और एसजीपीजीआई में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसमें बीपीएल कार्ड धारकों, बीपीएल सूची के सदस्यों,
सवा तीन एकड़ तक की जोत के किसानों या फिर 35 हजार रुपये से कम वार्षिक आय के लोगों को नि:शुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध करायी गई है। इस इलाज में डायलिसिस, गुर्दा प्रत्यारोपण, लिवर के रोग और प्रत्यारोपण की सुविधाएं भी शामिल हैं।
मरीज सुशील की हालत रही है बिगड़
दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लोहिया इंस्टीट्यूट के निरीक्षण के दौरान इलाज से महरूम सभी गरीब मरीजों की सूची मांगी थी।
सुशील राजपूत के इलाज में मदद कर रहीं नूतन चतुर्वेदी ने इस मामले की शिकायत निदेशक प्रो. राकेश कपूर से मंगलवार को की।
इसके बाद सुशील की फाइल को बीपीएल सेल के प्रभारी आरपी सिंह के पास भेजा। इसके बाद ही उनकी सुनवाई हुई। राजवती ने बताया कि सुशील की हालत बिगड़ती जा रही है। बुधवार को वो उसे केजीएमयू लेकर जाएंगे। जिससे वहां फ्री इलाज शुरू हो सके।
बीपीएल सेल एसीपीजीआई के प्रभारी आरपी सिंह का कहना है राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की पात्रता सूची को बीपीएल कार्ड कैसे मान लिया जाएगा।
सुशील का नाम बीपीएल सूची में नहीं है। इसीलिए उसकी आर्थिक मदद नहीं की जा सकती है। शासनादेश सिर्फ बीपीएल कार्ड में नाम वालों को ही फ्री इलाज देने का है।