{"_id":"5ddb4bf68ebc3e548730e1bb","slug":"pf-scam-chartered-accountant-role-is-also-suspicious","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पीएफ घोटाला: एक और नया खुलासा, कहां गया कालेधन को सफेद करने के लिए कैश ट्रांजक्शन हुआ पैसा?","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीएफ घोटाला: एक और नया खुलासा, कहां गया कालेधन को सफेद करने के लिए कैश ट्रांजक्शन हुआ पैसा?
Mon, 25 Nov 2019 09:05 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 25 Nov 2019 09:05 AM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपीपीसीएल के कर्मचारियों के पीएफ निवेश में हुए घोटाले की जांच कर रही ईओडब्ल्यू को कालेधन की चेन तलाशना मुश्किल हो रहा है। खातों की डिटेल से पैसों के अनियमित लेन देन की जानकारी तो मिली है, लेकिन कालेधन को सफेद करने के लिए जो कैश ट्रांजक्शन हुआ, वह पैसा कहां गया? ईओडब्ल्यू इसकी चेन तलाशने की कोशिश कर रही है।
इस पूरे मामले में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की भूमिका काफी संदिग्ध बताई जा रही है। उक्त सीए से अब तक तीन बार पूछताछ की जा चुकी है। उसे सोमवार को फिर से दस्तावेजों के साथ आने को कहा गया है।
सूत्रों का कहना है कि उक्त सीए द्वारा दी गई जानकारी को सत्यापित किया जा रहा है। जानकारी गलत पाई गई और पुख्ता साक्ष्य मिले तो उसे गिरफ्तार भी किया जा सकता है।
विज्ञापन
यह सीए दिल्ली की ही फर्म का है, जिसने डीएचएफएल में बड़ी रकम निवेश कराई थी। सीए के ही कहने पर निवेश के बदले मिली ब्रोकरेज की रकम को दूसरे खातों में भेज कर वहां से कैश पैसे लिए गए। कैश पैसों को रियल एस्टेट में लगाने की जानकारी भी मिली है।
विज्ञापन
इस पूरे मामले में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की भूमिका काफी संदिग्ध बताई जा रही है। उक्त सीए से अब तक तीन बार पूछताछ की जा चुकी है। उसे सोमवार को फिर से दस्तावेजों के साथ आने को कहा गया है।
विज्ञापन
सूत्रों का कहना है कि उक्त सीए द्वारा दी गई जानकारी को सत्यापित किया जा रहा है। जानकारी गलत पाई गई और पुख्ता साक्ष्य मिले तो उसे गिरफ्तार भी किया जा सकता है।
विज्ञापन
यह सीए दिल्ली की ही फर्म का है, जिसने डीएचएफएल में बड़ी रकम निवेश कराई थी। सीए के ही कहने पर निवेश के बदले मिली ब्रोकरेज की रकम को दूसरे खातों में भेज कर वहां से कैश पैसे लिए गए। कैश पैसों को रियल एस्टेट में लगाने की जानकारी भी मिली है।
सूत्रों का कहना है कि अब तक की पड़ताल में ईओडब्ल्यू को 14 में से दो फर्म ऐसी मिली है जिसे ब्रोकरेज के तौर पर 10 करोड़ रुपये से अधिक मिले थे। इन दोनों ही ब्रोकरेज फर्म के लेनदेन में कई खामियां सामने आई हैं। लेकिन ईओडब्ल्यू के सामने रियल एस्टेट में किया गया निवेश ट्रैक करना मुश्किल हो रहा है।