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विवादित ढांचे पर नमाज के लिए दायर याचिका खारिज, लगाया जुर्माना
Thu, 20 Dec 2018 02:00 PM IST
MANISH sachan
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: MANISH sachan
Updated Thu, 20 Dec 2018 02:00 PM IST
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court
अयोध्या में विवादित स्थल पर मुसलमानों को नमाज पढ़ने की अनुमति के लिए दायर याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने गुरुवार को खारिज कर दी। वहीं सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए याचिका दायर करने पर लताड़ लगाते हुए याची पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
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यह याचिका रायबरेली स्थित अल रहमान चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी शरीफ ने दायर की थी। इसमें कहा गया था कि याची और मुसलमानों को विवादित स्थल पर नमाज पढ़ने की अनुमति दी जानी चाहिए। यह जगह फैजाबाद (अब अयोध्या) जिले की सदर तहसील अयोध्या स्थित मोहल्ला कोट रामचंद्र में है।
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इसमें प्लॉट संख्या 159, 160 समेत रामजन्म भूमि-बाबरी परिसर के एक तिहाई हिस्से शामिल हैं। याचिका में केंद्र व राज्य सरकार सहित अयोध्या के मंडलायुक्त (रिसीवर) और जिलाधिकारी को भी पक्षकार बनाया गया था।
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यहां पढ़ें, प्रदेश सरकार का पक्ष
याची की दलील
याची की दलील थी कि 30 सितंबर 2010 के हाईकोर्ट के फैसले के तहत यह स्थल के एक तिहाई हिस्से में मुसलमानों को नमाज पढ़ने की इजाजत दी जानी चाहिए। चूंकि हिंदुओं को वहां पूजा और दर्शन करने की अनुमति दी गई है ऐसे में समानता के आधार पर मुसलमानों को नमाज पढ़ने की अनुमति मिलनी चाहिए। इसके लिए हाईकोर्ट उचित निर्देश जारी करे।
प्रदेश सरकार का पक्ष
दूसरी ओर प्रदेश सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता श्रीप्रकाश सिंह ने याचिका का कड़ा विरोध किया। उनका तर्क था कि इस विवादित स्थल का मसला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, ऐसे में इस प्रकार की याचिका दायर नहीं की जा सकती। विवादित स्थल पर यथा स्थिति कायम रखने का आदेश पहले से चला आ रहा है। वहीं याची ट्रस्ट 2017 में पंजीकृत हुआ है, लोकप्रियता हासिल करने के लिए याचिका दायर की गई है।
याची की दलील थी कि 30 सितंबर 2010 के हाईकोर्ट के फैसले के तहत यह स्थल के एक तिहाई हिस्से में मुसलमानों को नमाज पढ़ने की इजाजत दी जानी चाहिए। चूंकि हिंदुओं को वहां पूजा और दर्शन करने की अनुमति दी गई है ऐसे में समानता के आधार पर मुसलमानों को नमाज पढ़ने की अनुमति मिलनी चाहिए। इसके लिए हाईकोर्ट उचित निर्देश जारी करे।
प्रदेश सरकार का पक्ष
दूसरी ओर प्रदेश सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता श्रीप्रकाश सिंह ने याचिका का कड़ा विरोध किया। उनका तर्क था कि इस विवादित स्थल का मसला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, ऐसे में इस प्रकार की याचिका दायर नहीं की जा सकती। विवादित स्थल पर यथा स्थिति कायम रखने का आदेश पहले से चला आ रहा है। वहीं याची ट्रस्ट 2017 में पंजीकृत हुआ है, लोकप्रियता हासिल करने के लिए याचिका दायर की गई है।