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कॉमर्शियल वाहनों का परमिट सरेंडर करने की सुविधा, इनको होगा फायदा

Mon, 29 Jun 2020 12:03 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 29 Jun 2020 12:03 PM IST
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permit surrender facility for commercial vehicles
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
प्रदेश में लॉकडाउन से लेकर अनलॉक के बाद भी वाहनों को सवारी और माल ढोने का पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है और टैक्स का बोझ अलग से पड़ रहा है। इस संकट को देखते हुए परिवहन विभाग ने कॉमर्शियल वाहनों के परमिट को सरेंडर करने की सुविधा  दी है। इससे अब इन वाहनों को अप्रैल के बाद से वाहन का टैक्स नहीं भरना पड़ेगा।
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लेकिन इस सुविधा का फायदा वही वाहन मालिक ले पाएंगे जिन्होंने मार्च 2020 तक का टैक्स परिवहन विभाग में जमा कर दिया होगा।  परिवहन आयुक्त धीरज साहू ने 27 जून को इस सिलसिले में सर्कुलर जारी करके प्रदेश के सभी संभागीय परिवहन अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए हैं।
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वाहन मालिक 31 जुलाई तक परमिट सरेंडर करने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सर्कुलर के अनुसार वाहन मालिक को वाहन पोर्टल पर 100 रुपये फीस जमा करके 31 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इस आवेदन के बाद उनको ऑनलाइन आवेदन के सभी दस्तावेज लेकर संबंधित संभागीय परिवहन अधिकारी से संपर्क करना पड़ेगा जो कॉमर्शियल वाहनों के परमिट को सरेंडर करने की प्रक्रिया को पूरा करा कर आदेश जारी करेंगे।         
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5 लाख परमिट हो सकते हैं सरेंडर

लॉकडाउन में जिन मालिकों के वाहन खड़े रहे और भविष्य में नहीं चलने की उम्मीद है। ऐसे वाहन मालिक रोड टैक्स से बचने के लिए अपने वाहनों के परमिट को सरेंडर कर सकेंगे।  

सूत्रों ने बताया कि यह स्कीम वाहन मालिकों के अनुरोध पर लाई गई है। इसमें पूरे प्रदेश से करीब 5,00,000 कॉमर्शियल वाहन जो सवारी और माल भाड़ा ढोते हैं, उनके परमिट सरेंडर किए जा सकते हैं।

लखनऊ में 160 प्राइवेट बस कबाड़ी को बेचेंगे 
परिवहन विकास ट्रस्ट के अध्यक्ष जगदीश गुप्ता अग्रहरि ने बताया लॉकडाउन में हुए घाटे से लखनऊ के बस मालिकों ने 160 बसों को कबाड़ी को बेचने का फैसला किया है। इसके लिए वे कॉमर्शियल परमिट को सोमवार से सरेंडर करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। उन्होंने बताया कि सरकार से कोई राहत नहीं मिली, जबकि एक बस से आठ परिवार का खर्च चलता है।
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