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आम शहरियों को उठाना होगा सेप्टिक टैंक सफाई सिस्टम का पूरा खर्च, कैबिनेट ने दी मंजूरी

Wed, 23 Oct 2019 12:56 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 23 Oct 2019 12:56 AM IST
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People will bear the cleanliness expense of septic tank in Uttar pradesh.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala

प्रदेश सरकार आम शहरियों के यहां निर्मित शौचालयों के सेप्टिक टैंक की साफ-सफाई का पूरा सिस्टम स्थापित करेगी। इसके पूरे खर्च का बंदोबस्त सरकार करेगी, लेकिन इसके संचालन और रखरखाव पर आने वाला खर्च आम उपभोक्ताओं को ही उठाना पड़ेगा। इसके लिए मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में ‘उत्तर प्रदेश राज्य सेप्टेज प्रबंधन नीति’ को मंजूरी दे दी गई।

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राज्य सरकार के प्रवक्ता व कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि प्रदेश के 652 नगर निकायों की आबादी 5 करोड़ है। अधिकतर घरों में सेप्टिक  टैंक का इस्तेमाल होता है। इनका ठीक से रखरखाव न होने से ये गंदगी व प्रदूषण का कारण बनते हैं। इसके प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए ही यह नीति लाई गई है।
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प्रदेश में इस समय मौजूद सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्षमता 3300 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) है। इसके अलावा 1200 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी पर काम चल रहा है।
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वहीं शहरों के अंदर वर्तमान केंद्र व राज्य सरकार के कार्यकाल में 72 लाख शौचालय बनाए गए हैं। इनसे कुल 5560 एमएलडी मलयुक्त जल निकलता है। पर्यावरण को साफ-सुथरा रखने के लिए इनका उचित प्रबंधन अति आवश्यक है। प्रत्येक सेप्टिक टैंक की साफ-सफाई पांच साल के अंदर होना जरूरी है।

वर्तमान में जिस ढंग से सफाई की जाती है, वह तरीका काफी असुरक्षित, अमानवीय और गंदगी भरा है। इस काम को अधिकाधिक यंत्रों के माध्यम से कराए जाने की योजना बनाई गई है।

कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड के तहत जुटाया जाएगा फंड

प्रबंधन नीति के तहत फैसला किया गया है कि सरकार वर्ष 2019 में ही सेप्टिक टैंक साफ-सफाई की प्रारंभिक व्यवस्थाएं कर लेगी। वर्ष 2021 तक प्रत्येक नगर निकाय को सेप्टिक टैंक प्रबंधन सिस्टम से जोड़ दिया जाएगा। अगले दो वर्षों यानी वर्ष 2023 तक सभी नगर निकायों में सेप्टिक टैंक प्रबंधन अनिवार्य रूप से लागू कर दिया जाएगा।

प्रारंभिक खर्च का एस्टीमेट तैयार किया जा रहा है। इसमें राज्य सरकार के अलावा केंद्र की विभिन्न योजनाओं से भी मदद मांगी जाएगी। साथ ही कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड (सीएसआर) के तहत भी बजट जुटाया जाएगा।

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