{"_id":"5c71773fbdec2211d240cb70","slug":"people-afraid-seeing-tiger-and-lepord-rangers-said-its-happy-site","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बहराइच : सड़कों पर दिख रहे बाघ व तेंदुए से सहमे ग्रामीण, वनाधिकारी बोले यह सुखद है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बहराइच : सड़कों पर दिख रहे बाघ व तेंदुए से सहमे ग्रामीण, वनाधिकारी बोले यह सुखद है
Sat, 23 Feb 2019 10:09 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला बहराइच
न्यूज डेस्क, अमर उजाला बहराइच
Published by: Amulya Rastogi
Updated Sat, 23 Feb 2019 10:09 PM IST
विज्ञापन
बाघ
- फोटो : SELF
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बहराइच के बिछिया के पास जंगल से सटे इलाकों में हर मार्ग पर ग्रामीणों का सामना बाघ और तेंदुओं से हो रहा है। ग्रामीण घर से निकलने में डर रहे हैं। वे सहमे हुए हैं। बीते गुरुवार से सुजौली बिछिया मार्ग पर बाघिन और दो शावकों का मूवमेंट भी रहा। वनाधिकारियों का कहना है कि जंगल में बाघ और तेंदुओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है। यह सुखद है। ग्रामीण सजग रहें। हलांकि अब तक सुरक्षा के उपाय नहीं हो सके हैं।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में बीते एक माह से बाघ और तेंदुओं का मूवमेंट आबादी की ओर तेजी से बढ़ा है। निरंतर हमले भी हो रहे हैं। गांव की पगडंडियों और मुख्य मार्गों पर बाघ और तेंदुए अक्सर दिखाई पड़ रहे हैं। बीते दो दिनों से बिछिया-सुजौली मार्ग पर जंगल से सटे गन्ने के खेतों के आसपास बाघिन दो शावकों के साथ दिखाई पड़ रही है। दो दिन पूर्व बाघिन के गिरिजापुरी-बिछिया मार्ग पर आने से आवागमन भी प्रभावित हुआ था। निशानगाड़ा, आंबा, बर्दिया मार्गों पर भी वन्यजीव अक्सर दिखाई पड़ रहे हैं। आसपास गांव के लोगों का कहना है कि आए दिन रात में बाघ की दहाड़ सुनाई पड़ती है लेकिन सुरक्षा के कोई उपाय नहीं हो सके हैं।
विज्ञापन
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में बीते एक माह से बाघ और तेंदुओं का मूवमेंट आबादी की ओर तेजी से बढ़ा है। निरंतर हमले भी हो रहे हैं। गांव की पगडंडियों और मुख्य मार्गों पर बाघ और तेंदुए अक्सर दिखाई पड़ रहे हैं। बीते दो दिनों से बिछिया-सुजौली मार्ग पर जंगल से सटे गन्ने के खेतों के आसपास बाघिन दो शावकों के साथ दिखाई पड़ रही है। दो दिन पूर्व बाघिन के गिरिजापुरी-बिछिया मार्ग पर आने से आवागमन भी प्रभावित हुआ था। निशानगाड़ा, आंबा, बर्दिया मार्गों पर भी वन्यजीव अक्सर दिखाई पड़ रहे हैं। आसपास गांव के लोगों का कहना है कि आए दिन रात में बाघ की दहाड़ सुनाई पड़ती है लेकिन सुरक्षा के कोई उपाय नहीं हो सके हैं।
विज्ञापन
गन्ने की कटान से बढ़ी समस्या
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने बताया कि जंगल में मानव दखलंदाजी बढ़ने पर बाघ और तेंदुए अक्सर जंगल से सटे गन्ने के खेतों में शरण लेेते हैं। इस समय गन्ने की कटान चल रही है। ऐसे में खेत खाली हो रहे हैं। जिस कारण वन्यजीवों का मूवमेंट अधिक पता चल रहा है।
निरंतर बढ़ रही संख्या, सजग रहें ग्रामीण
डीएफओ जीपी सिंह ने बताया कि कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के सभी रेंजों में बाघ और तेंदुओं का अधिक मूवमेंट उनकी संख्या में इजाफे की ओर संकेत कर रहा है। यह काफी सुखद स्थिति है। जंगल से सटे गांवों के लोगों को सजग रहने की जरूरत है। वनकर्मी निरंतर गश्त कर रहे हैं।
निरंतर बढ़ रही संख्या, सजग रहें ग्रामीण
डीएफओ जीपी सिंह ने बताया कि कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के सभी रेंजों में बाघ और तेंदुओं का अधिक मूवमेंट उनकी संख्या में इजाफे की ओर संकेत कर रहा है। यह काफी सुखद स्थिति है। जंगल से सटे गांवों के लोगों को सजग रहने की जरूरत है। वनकर्मी निरंतर गश्त कर रहे हैं।