कोर्ट ने समय से पेश न होने पर प्रमुख सचिव वन पर लगाया 25 हजार का जुर्माना
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने वन्यजीव सुरक्षा नियम बनाने की प्रक्रिया तीन माह में पूरी करने के निर्देश राज्य सरकार को दिए हैं। न्यायमूर्ति मुनीश्वर नाथ भंडारी और न्यायमूर्ति मनीष कुमार की बेंच ने यह आदेश वकील एसके मिश्र की जनहित याचिका पर दिया।
इसमें लखीमपुर जिले के दुधवा नेशनल पार्क और इटावा लायन सफारी से गुजरने वाली रेलवे लाइनों से वन्यजीवों की जान को खतरा बताते हुए इनकी सुरक्षा का अनुरोध किया गया है। साथ ही, दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा के लिए स्पेशल फोर्स बनाने का भी आग्रह किया गया है।
गत सोमवार को कोर्ट को बताया गया कि नियम बनाने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो सकी है। जबकि पहले दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशक संजय सिंह ने कोर्ट को बताया था कि 12 फरवरी 2013 की अधिसूचना के जरिये स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स बनाया जा चुका है।
फिलहाल सेवा संबंधी नियम बनाने की प्रक्रिया चल रही है। विभिन्न विभागों ने तकनीकी आपत्तियां उठाई है, जिनके समाधान के बाद अधिसूचना जारी की जाएगी। वहीं, पिछली सुनवाई पर उन्होंने कोर्ट को बताया था कि पूरी प्रक्रिया में छह हफ्ते का और वक्त लगेगा।
कोर्ट ने कहा- अगली सुनवाई तीन माह बाद होगी
इस पर अदालत ने समय देकर चेतावनी दी थी कि 17 फरवरी तक अगर नियम नहीं बने तो वन विभाग के प्रमुख सचिव और दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशक को कोर्ट में पेश होना होगा। मगर सोमवार को वन विभाग के प्रमुख सचिव कोर्ट में पेश नहीं हुए और कोर्ट को बताया गया कि वह विधानसभा में व्यस्त हैं।
इस पर कोर्ट ने उन्हें अवमानना नोटिस देनी चाही तो बताया गया कि वह आधे घंटे में कोर्ट पहुंच रहे हैं। अदालत ने गंभीर लापरवाही बताते हुए प्रमुख सचिव वन पर 25 हजार रुपये हर्जाना लगाया। यह हर्जाना 15 दिन में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करना होगा।
हालांकि आधे घंटे बाद प्रमुख सचिव कोर्ट में पेश होकर गैरहाजिरी के लिए माफी मांगी। साथ ही, उन्होंने कोर्ट से नियम बनाने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए तीन माह का समय दिए जाने का आग्रह किया। इस पर कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई तीन माह बाद होगी।