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बलरामपुर अस्पताल में जल्द शुरू होगा पीआईसीयू
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बलरामपुर अस्पताल में पीडियाट्रिक आईसीयू की तैयारी
बलरामपुर अस्पताल ने एक्यूट इनसेफेलाइट सिंड्रोम (एईएस) और जापानी इनसेफेलाइटिस (जेई) से पीड़ित गंभीर बच्चों के इलाज के लिए पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट खोलने का फैसला किया है। अस्पताल प्रशासन ने शुक्रवार को शासन को प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही वेंटिलेटर समेत अन्य उपकरणों की खरीद कर इस यूनिट का संचालन कराया जाएगा। निदेशक डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि 10 बेड के पीआईसीयू का प्रस्ताव भेजा है। उन्होंने बताया कि पीआईसीयू का निर्माण एसएस ब्लॉक में आईसीयू के पास किया जाएगा।
गौरतलब है कि बलरामपुर अस्पताल के बाल रोग विभाग में 30 बेड हैं। यहां एईएस के पांच मरीज भर्ती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि एईएस पीड़ित बच्चों की हालत गंभीर होने पर उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत होती है। वेंटिलेटर न होने पर उन्हें केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर रेफर किया जाता है। वहां बेड खाली न होने पर तीमारदार बच्चे को लेकर भटकते हैं। इसे देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने पीआईसीयू शुरू करने का फैसला लिया है।
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बलरामपुर अस्पताल ने एक्यूट इनसेफेलाइट सिंड्रोम (एईएस) और जापानी इनसेफेलाइटिस (जेई) से पीड़ित गंभीर बच्चों के इलाज के लिए पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट खोलने का फैसला किया है। अस्पताल प्रशासन ने शुक्रवार को शासन को प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही वेंटिलेटर समेत अन्य उपकरणों की खरीद कर इस यूनिट का संचालन कराया जाएगा। निदेशक डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि 10 बेड के पीआईसीयू का प्रस्ताव भेजा है। उन्होंने बताया कि पीआईसीयू का निर्माण एसएस ब्लॉक में आईसीयू के पास किया जाएगा।
गौरतलब है कि बलरामपुर अस्पताल के बाल रोग विभाग में 30 बेड हैं। यहां एईएस के पांच मरीज भर्ती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि एईएस पीड़ित बच्चों की हालत गंभीर होने पर उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत होती है। वेंटिलेटर न होने पर उन्हें केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर रेफर किया जाता है। वहां बेड खाली न होने पर तीमारदार बच्चे को लेकर भटकते हैं। इसे देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने पीआईसीयू शुरू करने का फैसला लिया है।
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