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दिसंबर से ऑनलाइन जमा करें एलडीए की किस्त
ऋषि मिश्र/लखनऊ
Updated Thu, 21 Nov 2013 01:28 AM IST
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एलडीए की विभिन्न परियोजनाओं में पंजीकरण हो या फिर किस्तों का भुगतान, दिसंबर से ऑनलाइन किया जा सकेगा।
लखनऊ विकास प्राधिकरण की लगभग सभी सेवाएं दिसंबर तक ऑनलाइन हो जाएंगी। यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन (यूपीईएल) ने ऑनलाइन कनेक्टीविटी का काम पूरी कर दिया है।
इसके लिए एलडीए ने करीब डेढ़ करोड़ रुपये का टेंडर किया था। दिसंबर से अपग्रेडेड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल शुरू हो जाएगा।
प्राधिकरण ने करीब दो माह पहले टेंडर किया था। एक अधिकारी के अनुसार एलडीए की अगली हाउसिंग स्कीम के लिए ऑनलाइन पंजीकरण हो सकेगा।
इसके दो तरीके होंगे। पहला तो यह कि जिन्हें आवेदन करना है वे प्राधिकरण की वेबसाइट पर अपना एक लॉगइन बनाएंगे। इसके जरिए पंजीकरण फार्म भरे जा सकेंगे।
इसके अतिरिक्त ई-चालान को इस लॉगइन के जरिए डाउनलोड किया जा सकेगा। इसके बाद अधिकृत बैंक में चालान और रकम जमा की जाएगी।
दूसरी प्रक्रिया बैंकिंग गेटवे की है। इसमें डेबिट, क्रेडिट या नेट बैंकिंग के जरिए लोग प्राधिकरण के खाते में भुगतान करेंगे। उनके लिए ऑनलाइन रसीद भी जेनरेट हो जाएगी।
किस्तों के भुगतान और सामुदायिक केंद्र की बुकिंग के लिए भी ऑनलाइन सुविधा का लाभ उठाया जा सकेगा। इसके अलावा सभी संपत्तियों को कंप्यूटरीकृत कर दिया जाएगा।
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ई-टेंडरिंग भी इसी में शामिल
इसी व्यवस्था में ई-टेंडरिंग को भी शामिल किया गया है, हालांकि अभी यह काम पूरा नहीं हुआ है। इसके जरिए टेंडर मैनेज किए जाने की घटनाओं पर लगाम लगेगी।
दरअसल प्राधिकरण में ठेकेदारों का सिंडिकेट टेंडर मैनेज करता है। एक निविदा के लिए तीन प्रस्ताव किए जाते हैं। इसमें से न्यूनतम को ठेका मिल जाता है। इस वजह से नए ठेकेदार ठेका नहीं डाल पाते हैं।
जिसके चलते ई टेंडरिंग का आगाज किया जा रहा है। ई-टेंडरिंग के लिए ठेकेदारों के डिजीटल सिग्नेचर अभी नहीं मिल सके हैं। 20 लाख रुपये से ऊपर के टेंडर इलेक्ट्रॉनिक विधि से किए जाएंगे।
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लखनऊ विकास प्राधिकरण की लगभग सभी सेवाएं दिसंबर तक ऑनलाइन हो जाएंगी। यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन (यूपीईएल) ने ऑनलाइन कनेक्टीविटी का काम पूरी कर दिया है।
इसके लिए एलडीए ने करीब डेढ़ करोड़ रुपये का टेंडर किया था। दिसंबर से अपग्रेडेड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल शुरू हो जाएगा।
प्राधिकरण ने करीब दो माह पहले टेंडर किया था। एक अधिकारी के अनुसार एलडीए की अगली हाउसिंग स्कीम के लिए ऑनलाइन पंजीकरण हो सकेगा।
इसके दो तरीके होंगे। पहला तो यह कि जिन्हें आवेदन करना है वे प्राधिकरण की वेबसाइट पर अपना एक लॉगइन बनाएंगे। इसके जरिए पंजीकरण फार्म भरे जा सकेंगे।
इसके अतिरिक्त ई-चालान को इस लॉगइन के जरिए डाउनलोड किया जा सकेगा। इसके बाद अधिकृत बैंक में चालान और रकम जमा की जाएगी।
दूसरी प्रक्रिया बैंकिंग गेटवे की है। इसमें डेबिट, क्रेडिट या नेट बैंकिंग के जरिए लोग प्राधिकरण के खाते में भुगतान करेंगे। उनके लिए ऑनलाइन रसीद भी जेनरेट हो जाएगी।
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किस्तों के भुगतान और सामुदायिक केंद्र की बुकिंग के लिए भी ऑनलाइन सुविधा का लाभ उठाया जा सकेगा। इसके अलावा सभी संपत्तियों को कंप्यूटरीकृत कर दिया जाएगा।
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ई-टेंडरिंग भी इसी में शामिल
इसी व्यवस्था में ई-टेंडरिंग को भी शामिल किया गया है, हालांकि अभी यह काम पूरा नहीं हुआ है। इसके जरिए टेंडर मैनेज किए जाने की घटनाओं पर लगाम लगेगी।
दरअसल प्राधिकरण में ठेकेदारों का सिंडिकेट टेंडर मैनेज करता है। एक निविदा के लिए तीन प्रस्ताव किए जाते हैं। इसमें से न्यूनतम को ठेका मिल जाता है। इस वजह से नए ठेकेदार ठेका नहीं डाल पाते हैं।
जिसके चलते ई टेंडरिंग का आगाज किया जा रहा है। ई-टेंडरिंग के लिए ठेकेदारों के डिजीटल सिग्नेचर अभी नहीं मिल सके हैं। 20 लाख रुपये से ऊपर के टेंडर इलेक्ट्रॉनिक विधि से किए जाएंगे।