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गृहमंत्री राजनाथ ने दी मंजूरी, कश्मीर में पैलेट गन की जगह इस्तेमाल होंगे 'पावा शेल्स'

Sat, 03 Sep 2016 08:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 03 Sep 2016 08:01 PM IST
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 Pava shells to be used on protesters in kashmir.
केंद्रीय गृहमंत्री राजना‌थ सिंह

केंद्रीय गृहमंत्री राजना‌थ सिंह ने कश्मीर में उपद्रवियों को नियंत्रित करने के लिए 'पावा शेल्स' के प्रयोग को मंजूरी दे दी है। गौरतलब है कि अभी तक पैलेट गन का इस्तेमाल होता था। ये पावा शेल्स, कम घातक है जिससे कोई स्‍थाई नुकसान नहीं होता।

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इसका उपयोग करने के लिए आईआईटीआर लखनऊ में एक साल का अध्ययन पूरा करने के बाद शुरुआती रिपोर्ट में इसे उपयोगी करार दिया गया था, जिसके बाद इसकी फाइनल रिपोर्ट बीएसएफ को सौंप दी गई।
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (आईआईटीआर) के निदेशक प्रो. आलोक धवन बताते हैं कि पावा शैल्स दरअसल मिर्च में मिलने वाले वे तत्व हैं जिनके शरीर पर पड़ते ही तेज जलन होती है।
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ये उपद्रव कर रहे व्यक्ति को नियंत्रित करने के काम आते हैं। बीएसएफ ने इनकी सुरक्षा जांचने के लिए कहा था, ताकि लोगों पर इसका उपयोग किया जा सके।

ये होता है पावा

 Pava shells to be used on protesters in kashmir.
भूत जोलोकिया - फोटो : amar ujala

पेआर्गोनिक एसिड वेनिलाइलामाइल (पावा) को नोनिवामिड भी कहा जाता है। पावा दरअसल एक ऑर्गेनिक कंपाउंड है जो प्राकृतिक तौर पर मिर्च में मिलता है। बीएसएफ ने उपद्रवी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जो पावा शैल्स विकसित किया है, उनका नाम इसी तत्व के आधार पर रखा गया है।

हालांकि, इस शैल में और भी कई तत्व हैं लेकिन सुरक्षा कारणों से उनके नाम जाहिर नहीं किए जा सकते, अध्ययनों के अनुसार इतना जरूर बताया जा सकता है कि उनका भी मानव शरीर पर कोई स्थायी नुकसान नहीं होगा।

इस मिर्च के लिए असमिया शब्द है भूत जोलोकिया, यानी भूत मिर्च। इसका तीखापन 10 लाख एसएचयू मापा गया है। तीखापन देने वाले तत्व पावा का उपयोग नए शेल्स में किया जा रहा है। भूत जोलोकिया से डीआरडीओ हैंड ग्रेनेड भी बना चुका है।

इसलिए है बेहतर विकल्प

 Pava shells to be used on protesters in kashmir.

पावा शेल्स का उपयोग टेस्‍ट में सुरक्षित पाया गया है। इनसे अस्‍थाई नुकसान ही होता है। हालांकि बहुत ज्यादा उपयोग करने पर यह नुकसान स्‍थाई भी हो सकता है।

पैलेट गन की तरह यह खतरनाक न होकर भी भीड़ को नियंत्रित करने, तितर-बितर करने के लिए कहीं ज्यादा प्रभावी साबित होंगे। हालांकि, प्रोफेसर आलोक धवन कहते हैं कि इसका कितना उपयोग करना है, कहां करना है, यह भी बीएसएफ को ही तय करना है।

पावा का असर, भागने पर कर देता है मजबूर
पावा जहां छू जाए वहां शरीर के जलने का एहसास होता है। यह इतना तेज होता है कि व्य‌क्ति खुद को लकवाग्रस्त महसूस करता है। दिमाग में सिर्फ मौके से भागने का ही ख्याल आता है।

आंखों में जाने पर आंखें खोलना असम्भव हो जाता है और तेज जलन से बचने के लिए पानी ही एकमात्र विकल्प लगता है, लेकिन उससे भी तुरंत छुटकारा नहीं मिलता।

इन सबमें उलझकर उपद्रवी, उपद्रव छोड़कर खुद को बचाने में लग जाते हैं और उन्हें शांत करना आसान हो जाता है। इसे लोगों की भारी भीड़ पर उपयोग कर उन्हें कुछ सेकेंड में नियंत्रित किया जा सकता है।

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