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बाहर से जांच करा, डॉक्टर भर रहे अपनी जेबें
मनीष कुमार सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 22 Apr 2014 07:43 AM IST
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बलरामपुर अस्पताल में मरीजों से एमआरआई जांच के नाम पर हो रही लूट रुकने का नाम नहीं ले रही है।
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अस्पताल के डॉक्टर मरीज को सस्ती जांच के लिए सरकारी संस्थान भेजने के बजाय प्राइवेट पैथोलॉजी भेजकर मुनाफा कमा रहे हैं।
नेपाल के रहने वाले चंद्रभान गिरी का बेटा प्रकाश गिरी (29) सड़क हादसे में बुरी तरह घायल हो गया। मरीज के पिता ने बताया कि एक दिन बाद प्रकाश को वो बीते 16 अप्रैल को बलरामपुर अस्पताल लाए।
इमरजेंसी में इलाज के बाद उनको न्यू बिल्डिंग के 12 नंबर वार्ड के बेड नंबर चार पर भर्ती कराया गया। सोमवार को इलाज करने वाले चिकित्सक ने एमआरआई जांच लिख दी।
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इसके थोड़ी देर बाद निजी पैथोलॉजी के दलाल का फोन आया और फिर एक एम्बुलेंस वार्ड के बाहर पहुंच गई। वे मरीज को एम्बुलेंस में ले गए और दो घंटे बाद मरीज को वापस अस्पताल छोड़ दिया।
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पिता ने बताया कि जांच शुल्क के नाम पर 52,20 रुपया वसूल लिया गया। नियमानुसार सरकारी अस्पताल में अगर किसी जरूरी जांच की सुविधा नहीं है तो मरीज को लोहिया संस्थान, लोहिया अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर भेजकर जांच कराई जा सकती है।
इसके लिए मरीज को सिर्फ आधा पैसा देना पड़ता है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को ग्लूकोज चढ़ाने के लिए भर्ती होने के बाद सिर्फ एक बार ही विगो मिलता है।
अगर मरीज के भर्ती होने के बाद विगो खराब हो जाए तो परिवारीजनों को बाहर से विगो खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। बलरामपुर अस्पताल में कुछ ऐसा ही हुआ।
नेपाल के रहने वाले प्रकाश गिरी जब बाहर से एमआरआई जांच कराने गए तो जांच से पहले उनका विगो निकाल दिया गया।
दोबारा अस्पताल पहुंचे तो वार्ड में ड्यूटी पर तैनात नर्स ने विगो देने से मना कर दिया। जिसके चलते मरीज के परिवारीजनों को बाहर से जांच करवानी पड़ी।