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ट्रॉमा से निजी अस्पताल रोज भेजे जा रहे मरीज
Fri, 01 Mar 2019 01:34 AM IST
sahaj sahaj
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: sahaj sahaj
Updated Fri, 01 Mar 2019 01:34 AM IST
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फाइल फोटो
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केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर आने वाले मरीजों को निजी अस्पताल में शिफ्ट कराया जा रहा है। इसमें ट्रॉमा में संविदा पर तैनात एक फार्मासिस्ट लिप्त है। इससे पहले भी इसी फार्मासिस्ट पर मरीजों को शिफ्ट कराने के आरोप लग चुके हैं। एक मरीज को ट्रॉमा से हटाकर गत माह निजी अस्पताल भेजा गया था। वहां पर मरीज से रुपये वसूले गए। इस मामले में एक तीमारदार ने राज्यपाल और केजीएमयू कुलपति से शिकायत की है। संविदा पर कार्यरत फार्मासिस्ट को ट्रॉमा से बाहर कर कमेटी गठित कर दी गई है। अफसर मामले में लीपापोती करने में जुटे हैं।
केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में हर रोज करीब 300-400 मरीज आते हैं जिसमें करीब 50-60 मरीज बमुश्किल भर्ती होते हैं। बाकी को दूसरे संस्थान रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में ट्रॉमा सेंटर के कर्मचारी-फार्मासिस्ट, तीमारदारों को बेहतर इलाज का झांसा देकर निजी अस्पताल पहुंचा देते हैं। इसका कमीशन भी कर्मचारियों को मिलता है। ट्रॉमा सेंटर की कैजुअलिटी में पूर्व में तैनात एक फार्मासिस्ट इस खेल में लिप्त था। फार्मासिस्ट ने गत जनवरी में एक मरीज को ट्रॉमा सेंटर से निजी अस्पताल पहुंचाया था। इस मामले में चौक बानवाली गली निवासी शलभ माथुर ने लिखित शिकायत राज्यपाल व केजीएमयू कुलपति से जनवरी में ही की थी। अफसर एक माह तक मामले को दबाकर लीपापोती करते रहे। किरकिरी होने के बाद इसी हफ्ते ट्रॉमा सीएमएस डॉ. यूबी मिश्रा के नेतृत्व में चार सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। इसके बाद आनन-फानन संविदा पर कार्यरत फार्मासिस्ट को ट्रॉमा से बाहर खदेड़ दिया गया। केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है। कमेटी जल्द अपनी रिपोर्ट देगी। इसके बाद दूसरे कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी।
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केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में हर रोज करीब 300-400 मरीज आते हैं जिसमें करीब 50-60 मरीज बमुश्किल भर्ती होते हैं। बाकी को दूसरे संस्थान रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में ट्रॉमा सेंटर के कर्मचारी-फार्मासिस्ट, तीमारदारों को बेहतर इलाज का झांसा देकर निजी अस्पताल पहुंचा देते हैं। इसका कमीशन भी कर्मचारियों को मिलता है। ट्रॉमा सेंटर की कैजुअलिटी में पूर्व में तैनात एक फार्मासिस्ट इस खेल में लिप्त था। फार्मासिस्ट ने गत जनवरी में एक मरीज को ट्रॉमा सेंटर से निजी अस्पताल पहुंचाया था। इस मामले में चौक बानवाली गली निवासी शलभ माथुर ने लिखित शिकायत राज्यपाल व केजीएमयू कुलपति से जनवरी में ही की थी। अफसर एक माह तक मामले को दबाकर लीपापोती करते रहे। किरकिरी होने के बाद इसी हफ्ते ट्रॉमा सीएमएस डॉ. यूबी मिश्रा के नेतृत्व में चार सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। इसके बाद आनन-फानन संविदा पर कार्यरत फार्मासिस्ट को ट्रॉमा से बाहर खदेड़ दिया गया। केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है। कमेटी जल्द अपनी रिपोर्ट देगी। इसके बाद दूसरे कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी।
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