{"_id":"64195749da46fd9a590dba03","slug":"patients-of-kgmu-shifted-to-private-hospitals-2023-03-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"KGMU: ट्रॉमा से आधी रात मरीजों की शिफ्टिंग कराने का खेल जारी, कई बार दबोचे गए दलाल पर नहीं हुई कार्रवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
KGMU: ट्रॉमा से आधी रात मरीजों की शिफ्टिंग कराने का खेल जारी, कई बार दबोचे गए दलाल पर नहीं हुई कार्रवाई
Tue, 21 Mar 2023 12:35 PM IST
ishwar ashish
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 21 Mar 2023 12:35 PM IST
सार
केजीएमयू में देर रात मरीजों को निजी अस्पतालों में शिफ्टिंग का खेल चलता है। इसे लेकर ट्रॉमा स्टाफ पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। दलालों को कई बार पकड़ा भी गया है पर ट्रॉमा प्रशासन की तरफ से तहरीर न मिलने के कारण उन्हें छोड़ दिया गया।
विज्ञापन
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर से आधी रात से मरीजों की शिफ्टिंग का खेल शुरू होता है। इसमें ट्रॉमा स्टाफ की भूमिका भी संदिग्ध है। मरीजों को बेहतर इलाज का झांसा देकर उन्हें निजी अस्पताल भेजा जाता है। रोजाना करीब 15-20 मरीज निजी अस्पताल पहुंचाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
अहम बात यह है ट्रॉमा के बाहर गेट पर ही देर रात निजी अस्पताल के दलालों का जमावड़ा शुरू होता है। इन्हें कई बार दबोचा भी गया, लेकिन ट्रॉमा प्रशासन ने इनके खिलाफ तहरीर नहीं दी। नतीजा पुलिस ने शांति भंग में चालान कर इन्हें छोड़ दिया।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें - संघ की पहल: दलित दूसरों की तरह चढ़ें घोड़ी, शिव मंदिरों में करें जलाभिषेक, नौकर और नौकरानी के साथ भी चाय पीएं
विज्ञापन
ये भी पढ़ें - कांग्रेस सीडब्ल्यूसी की घोषणा जल्द, बदले जा सकते हैं प्रियंका समेत कई राज्यों के प्रभारी महासचिव
लोहिया संस्थान के बाद अब केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर मरीजों की शिफ्टिंग का सबसे बड़ा अड्डा बना है। यहां पर आने वाले अति गंभीर मरीजों को आसानी से वेंटिलेटर नहीं मिल पाते हैं। मरीज एंबुबैग पर रहते हैं। ऐसे में बेहतर व सस्ते इलाज का झांसा देकर उन्हें निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दी जाती है।
यही वजह है कि यहां पर भर्ती होने बाद रोज कई मरीज लेफ्ट अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस (लामा) लिखकर दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए छोड़ दिए जाते हैं। अहम बात यह है ट्रॉमा प्रशासन दलालों पर नकेल कसने के बजाय मौन साधे रहता है। बीते साल ट्रॉमा से कई दलाल दबोचे गए।
पुलिस ने उन्हें चौकी में बिठाया, लेकिन ट्रॉमा प्रशासन से कोई भी तहरीर न आने पर उन्हें छोड़ दिया। मामले में ट्रॉमा प्रभारी डॉ. संदीप तिवारी का कहना है कि मरीजों की शिफ्टिंग का मामला बेहद गंभीर है। इसमें जो भी स्टाफ संलिप्त मिलेगा उसे बाहर किया जाएगा।