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एंबुलेंस दरवाजे पर ...और मरीज कपड़े लेने और नहाने में लगा रहे वक्त
Mon, 10 Aug 2020 05:00 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 10 Aug 2020 05:00 PM IST
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मरीज को एंबुलेंस में अस्पताल ले जाता कर्मचारी (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
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अक्सर शिकायत होती है कि एंबुलेंस वक्त पर नहीं पहुंचती, लेकिन एंबुलेंस वक्त पर पहुंच जाए तो क्या हमारी जिम्मेदारी नहीं है कि हम भी वक्त पर तैयार रहें। कोरोना संक्रमण के दौरान ऐसी लगातार शिकायतें आ रही हैं कि मरीज एंबुलेंस को दो-दो घंटे तक इंतजार करा रहे हैं। कोरोना पॉजिटिव आलमबाग निवासी मरीज को लेने एंबुलेंस घर पहुंची तो वह नहाने लगे।
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बोले, अस्पताल में पता नहीं मौका मिलेगा या नहीं। फिर खाना खाया और कपड़े लिए इसके बाद एंबुलेंस में बैैठे। ऐसा सिर्फ एक मामला ही नहीं है। कुछ मरीज नए कपड़े तो कुछ अन्य वजहों से एंबुलेंस को इंतजार करा रहे हैं। इस चक्कर में एंबुलेंस को यहां डेढ़ घंटे इंतजार करना पड़ा। दूसरे मरीज भी ऐसा करते हैं तो तीन घंटे का समय खत्म हो जाता है। ऐसे में तीन दिन बाद एक दिन का शिफ्टिंग का बैकलॉग हो जाता है और मरीजों को अस्पताल शिफ्ट करने की व्यवस्था बेपटरी हो जाती है।
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आइए इस गलती को सुधारें
नए कपड़े के लिए दो घंटे कराया इंतजार
मरीजों को शिफ्ट करने में लगे निजी एंबुलेंस चालक ने बताया कि गुरुवार को वह काकोरी से मरीज लेने गया। वहां जाने पर कहा गया कि खाना खाकर आ रहे हैं। दो घंटे तक चालक इंतजार करता रहा। बाद में पता चला कि मरीज के लिए उसका बेटा कपड़े लेने गया था। जब वह कपड़े लेकर लौटा तो एंबुलेंस में बैठे। उन्हें किसी ने बता दिया था कि वार्ड में रोज नए कपड़े पहनने पड़ेंगे।
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मरीज के इंतजार में बिगड़ गया पूरा शिड्यूल
108 एंबुलेंस के चालक ने कंट्रोल रूप में सूचना दी कि वह गुरुवार को बंथरा में पॉजिटिव मरीज को लेने गया। वहां एंबुलेंस पहुंची तो करीब आधे घंटे इंतजार करना पड़ा और मरीज को अस्पताल छोड़ने के बाद उसका शिड्यूल गड़बड़ हो गया। ऐसे में वह सिर्फ तीन मरीजों को ही शिफ्ट कर पाया। अन्य मरीजों को दूसरे दिन तड़के से दोपहर तक शिफ्ट किया। फिर शुक्रवार का शिड्यूल प्रभावित हुआ।
हम वक्त पर तैयार रहें तो दूसरों को भी वक्त पर मिलेगी एंबुलेंस
राजधानी में पॉजिटिव पाए गए मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 35 सामान्य एंबुलेंस, 15 प्राइवेट एंबुलेंस और सात एएलएस लगाई गई है। एएलएस अति गंभीर मरीजों में प्रयोग होती है। घर से मरीजों को अस्पताल भेजने में 50 एंबुलेंस लगी हैं। इसमें कई बार एक, दो खराब भी होती है। एक मरीज को घर से लेने और अस्पताल पहुंचाने में औसतन डेढ़ से दो घंटे का समय लगता है।
ऐसी स्थिति में हर एंबुलेंस को छह से आठ मरीज शिफ्ट करने की जिम्मेदारी दी जाती है। एक मरीज को शिफ्ट करने में दो घंटे का अतिरिक्त समय लगा तो दूसरे का शिड्यूल बिगड़ जाता है। दूसरे ने भी दो घंटे अतिरिक्त लगाए तो तीन से चार मरीज ही एक दिन में शिफ्ट हो पाते हैं। यही स्थिति अन्य एंबुलेंस के साथ भी होती है।
इस स्थिति में सात सौ मरीजों को शिफ्ट करने के लिए बना टाइम टेबल ध्वस्त हो जाता है। जिन मरीजों को दूसरे दिन अस्पताल पहुंच जाना चाहिए वे तीसरे दिन पहुंच पाते हैं। सूत्र बताते हैं कि एंबुलेंस चालक व उनके साथ मौजूद अन्य कर्मचारी इस बारे में लगातार शिकायत भी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें निर्देश है कि पॉजिटिव मरीज को छोड़ कर नहीं आना है। ऐसे में मरीज चाहे जितनी देर करें, वे मरीज को लिए बगैर नहीं लौटते हैं।
हम वक्त पर तैयार रहें तो दूसरों को भी वक्त पर मिलेगी एंबुलेंस
राजधानी में पॉजिटिव पाए गए मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 35 सामान्य एंबुलेंस, 15 प्राइवेट एंबुलेंस और सात एएलएस लगाई गई है। एएलएस अति गंभीर मरीजों में प्रयोग होती है। घर से मरीजों को अस्पताल भेजने में 50 एंबुलेंस लगी हैं। इसमें कई बार एक, दो खराब भी होती है। एक मरीज को घर से लेने और अस्पताल पहुंचाने में औसतन डेढ़ से दो घंटे का समय लगता है।
ऐसी स्थिति में हर एंबुलेंस को छह से आठ मरीज शिफ्ट करने की जिम्मेदारी दी जाती है। एक मरीज को शिफ्ट करने में दो घंटे का अतिरिक्त समय लगा तो दूसरे का शिड्यूल बिगड़ जाता है। दूसरे ने भी दो घंटे अतिरिक्त लगाए तो तीन से चार मरीज ही एक दिन में शिफ्ट हो पाते हैं। यही स्थिति अन्य एंबुलेंस के साथ भी होती है।
इस स्थिति में सात सौ मरीजों को शिफ्ट करने के लिए बना टाइम टेबल ध्वस्त हो जाता है। जिन मरीजों को दूसरे दिन अस्पताल पहुंच जाना चाहिए वे तीसरे दिन पहुंच पाते हैं। सूत्र बताते हैं कि एंबुलेंस चालक व उनके साथ मौजूद अन्य कर्मचारी इस बारे में लगातार शिकायत भी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें निर्देश है कि पॉजिटिव मरीज को छोड़ कर नहीं आना है। ऐसे में मरीज चाहे जितनी देर करें, वे मरीज को लिए बगैर नहीं लौटते हैं।
जनता को दिखानी होगी जागरूकता
एंबुलेंस को देर तक रोकने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। पॉजिटिव मरीजोें को एंबुलेंस भेजने की सूचना देने के साथ कहा जाता है कि वे तैयार रहें, एंबुलेंस ज्यादा देर नहीं रुकेगी। ऐसे में जब तक हर व्यक्ति तत्परता नहीं दिखाएगा तब तक समस्या बनी रहेगी। पॉजिटिव मरीज को छोड़ा नहीं जा सकता है। एक से दो मरीज में तीन घंटे का समय बढ़ गया तो चौथे मरीज का समय अपने आप प्रभावित होगा। यह सिलसिला तीन दिन चला तो समझा जा सकता है कि किस तरह की समस्या खड़ी होगी। - डॉ. आरपी सिंह, सीएमओ
एंबुलेंस पहुंचने पर तत्काल घर से निकलें
एंबुलेंस की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। इधर सप्ताहभर से मरीजों की संख्या भी छह सौ तक है। मरीज शिफ्ट करने में हो रही देरी की समीक्षा की गई तो तमाम एंबुलेंस चालक इस बात की शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें मरीज के घर पर दो से ढाई घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। इस वजह से पूरी क्षमता से मरीजों को शिफ्ट नहीं कर पा रहे हैं। एक दिन का बैकलॉग हो जा रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए देर रात और तड़के से मरीजों को शिफ्ट करने की कवायद की गई है। कुछ अतिरिक्त एंबुलेंस बढ़ाने का भी प्रयास किया जा रहा है। इससे लोगों को सहूलियत हो जाएगी। जो लोग भी पॉजीटिव आ रहे हैं, वे एंबुलेंस पहुंचने पर तत्काल घर से निकलें, ताकि दूसरे मरीज को भी समय पर अस्पताल भेजा जा सके। - अभिषेक प्रकाश, जिलाधिकारी
एंबुलेंस पहुंचने पर तत्काल घर से निकलें
एंबुलेंस की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। इधर सप्ताहभर से मरीजों की संख्या भी छह सौ तक है। मरीज शिफ्ट करने में हो रही देरी की समीक्षा की गई तो तमाम एंबुलेंस चालक इस बात की शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें मरीज के घर पर दो से ढाई घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। इस वजह से पूरी क्षमता से मरीजों को शिफ्ट नहीं कर पा रहे हैं। एक दिन का बैकलॉग हो जा रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए देर रात और तड़के से मरीजों को शिफ्ट करने की कवायद की गई है। कुछ अतिरिक्त एंबुलेंस बढ़ाने का भी प्रयास किया जा रहा है। इससे लोगों को सहूलियत हो जाएगी। जो लोग भी पॉजीटिव आ रहे हैं, वे एंबुलेंस पहुंचने पर तत्काल घर से निकलें, ताकि दूसरे मरीज को भी समय पर अस्पताल भेजा जा सके। - अभिषेक प्रकाश, जिलाधिकारी