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युवा जाग्रत, शिक्षित रहेगा तो देश महान और मजबूत बना रहेगा: ग्राम स्वराज सेनानी सम्मेलन

Sun, 16 Feb 2020 07:30 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 16 Feb 2020 07:30 PM IST
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Parivartan Kumbh in Lucknow.
स्वराज सेनानी सम्मेलन की मुख्य अतिथि साध्वी ऋतंभरा - फोटो : amar ujala

भारत को भारत बनाये रखने की एकल अभियान की निष्ठा सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं है। ये भारत के नवनिर्माण का अभियान है। ग्रामीण इलाके हों या वनवासी क्षेत्र, एकल हर उस जगह पहुंचा है, जहां सही मायने में भारत की आत्मा बसती है। पुत्र तो वह होते हैं जो धर्म व संस्कृति की वंदना करते हुये शांति से माता का दूध पीते हैं, प्रकृति और उसकी धरोहरों का आशीष लेते हैं। प्रकृति की गोद से छेड़छाड़ नहीं करते, उसे भला बुरा नहीं कहते।

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ज्ञान देने वाली माताओं से पुत्र की शिक्षा मजबूत होती है, उससे गांव और राष्ट्र मजबूत होता है। रमाबाई अम्बेडकर मैदान में एकल अभियान की ओर से आयोजित तीन दिवसीय परिवर्तन कुम्भ स्वराज सेनानी सम्मेलन के पहले दिन रविवार को मुख्य अतिथि साध्वी ऋतंभरा ने राष्ट्र को मजबूत बनाने के लिये शिक्षा और ग्रामवासियों की संपूर्ण शिक्षा पर जोर देते हुये ये बाते कहीं।
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पहले दिन सम्मेलन में संकल्प के अलावा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों सभी ने संकल्प लिया कि गांवों के विकास के लिये वे ग्राम सेनानी बनाकर अपना गांव विकसित करेंगे। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड के 55 जिलों से भारी संख्या में लोग जुटे, नेपाल से भी दो हजार लोगां ने शिरकत की।

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स्वराज सेनानियों ने लिया संकल्प, खुद करेंगे गांवों का विकास

सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि आजादी के 70 साल बाद भी पीने का पानी, खेती की जमीन, विद्यालय, सड़क व बिजली से ग्रामवासी वंचित हैं। व्यवस्था कागजों में तक पहुंचती दिखती है लेकिन वो जमीन पर उतनी प्रभावी नहीं है।

सम्मेलन के दौरान एकल अभियान ने संकल्प कराया कि प्रत्येक गांव के 10 युवक और 10 युवतियों को ग्राम स्वराज सेनानी बनाकर उनके खुद के गांव का विकास करना है। अपने गांव का विकास वह स्वयं करेंगे। गांव को जगायेंगे, पंचायतों का सशक्तिकरण करेंगे और आगामी पांच वर्षों में यह संकल्प पूरा कर दिखायेंगे।

वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ग्रामवासियों में विकास के प्रति जागरूकता बढ़ी है। राजनेताओं से भी उनकी अपेक्षा बढ़ रही है। ऐसे में ग्रामवासी, वनवासी गांव की सबसे कीमती प्राकृतिक संपदा, शुद्ध हवा, पानी, जमीन, पशुधन को छोड़कर शहर को पलायन कर रहे हैं। इनकी रक्षा को उन्हें ही आगे आना होगा।

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