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डेढ़ साल से ‘कमीशन’ के खेल में फंसा मृत बेटे के वेतन का चेक, मातहतों ने ताक पर रखा डीएम का निर्देश
Fri, 15 Nov 2019 03:13 PM IST
ishwar ashish
अनुराग सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
अनुराग सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 15 Nov 2019 03:13 PM IST
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मोहम्मद अतीक और अनीसा खातून
- फोटो : अमर उजाला
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सऊदी अरब के रियाद में जान गंवाने वाले बेटे के वेतन का चेक देने में तहसील के अधिकारी बुजुर्ग माता-पिता पिछले डेढ़ साल से दौड़ा रहे हैं। एक कार हादसे में बेटे की जान चली गई थी। 18 महीने पहले कंपनी ने बेटे के बकाया 68 हजार वेतन का चेक भारतीय दूतावास के जरिये डीएम दफ्तर को भेजा था।
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तहसील में चेक रिसीव होने के बावजूद परिवार तक नहीं पहुंचा है। पीड़ित की अर्जी पर डीएम के निर्देश के बावजूद तहसील के अधिकारी सुध नहीं ले रहे हैं। गोसाईंगंज के गंगागंज निवासी मोहम्मद अतीक (60) और अनीसा खातून (58) का बेटा मोहम्मद नदीम सऊदी अरब के रियाद में काम करता था।
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उसकी मौत 5 जनवरी 18 को रियाद के अल खर्ज शहर में हुए एक कार हादसे के दौरान हो गई थी। नदीम परिवार का इकलौता कमाने वाला था। वह रियाद की एक कंपनी में सुपरवाइजर के पद पर तैनात था। कंपनी ने उसके वेतन का बकाया 68,493 रुपये का चेक भारतीय दूतावास के जरिये जिलाधिकारी को भेजा गया था। पिता अतीक के मुताबिक, कमीशन के चक्कर में मेरे मृतक बेटे की कमाई का चेक फंस गया है।
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शिकायत पोर्टल ने कर दिया निस्तारित
डीएम दफ्तर ने 11 फरवरी 2019 को चेक तहसील दफ्तर को भेजा गया। तत्कालीन नायब तहसीलदार गोसाईंगंज अरुणिमा श्रीवास्तव ने चेक रिसीव किया था। बस यहीं से गाड़ी अटक गई। पीड़ित परिवार को जब इसकी जानकारी हुई तो उसने भागदौड़ शुरू की। तहसील से संपूर्ण समाधान दिवस तक परिवार ने दर्जनों आर अर्जियां दीं। डीएम कार्यालय को भी करीब दस बार प्रार्थना पत्र लिखा, पर नतीजा सिफर रहा।
थक हारकर मोहम्मद अतीक ने मुख्यमंत्री के शिकायत पोर्टल का सहारा लिया। यहां से जो जवाब मिला वह हास्यास्पद था। संबंधित क्षेत्र का मामला न होने का हवाला देकर तहसील मोहनलालगंज तहसील प्रशासन ने शिकायत का निस्तारण कर रिपोर्ट लगा दी। जबकि मामला उसी तहसील का है। तहसील के अधिकारी अतीक को डेढ़ साल से चक्कर लगवा रहे हैं।
मोहनलालगंज में संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान पीड़ित मोहम्मद अतीक ने डीएम अभिषेक प्रकाश को अर्जी दी। इस पर उन्होंने तहसील अधिकारियों को फटकार लगाई। एसडीएम सूर्यकांत त्रिपाठी से एक में भुगतान कराने का निर्देश दिया। इसके बावजूद चेक देना तो दूर लेखपाल ने परिवार से जानकारी लेना भी जरूरी नहीं समझा। हालात यह हैं कि परिवार भुगतान दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
थक हारकर मोहम्मद अतीक ने मुख्यमंत्री के शिकायत पोर्टल का सहारा लिया। यहां से जो जवाब मिला वह हास्यास्पद था। संबंधित क्षेत्र का मामला न होने का हवाला देकर तहसील मोहनलालगंज तहसील प्रशासन ने शिकायत का निस्तारण कर रिपोर्ट लगा दी। जबकि मामला उसी तहसील का है। तहसील के अधिकारी अतीक को डेढ़ साल से चक्कर लगवा रहे हैं।
मोहनलालगंज में संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान पीड़ित मोहम्मद अतीक ने डीएम अभिषेक प्रकाश को अर्जी दी। इस पर उन्होंने तहसील अधिकारियों को फटकार लगाई। एसडीएम सूर्यकांत त्रिपाठी से एक में भुगतान कराने का निर्देश दिया। इसके बावजूद चेक देना तो दूर लेखपाल ने परिवार से जानकारी लेना भी जरूरी नहीं समझा। हालात यह हैं कि परिवार भुगतान दर-दर भटकने को मजबूर हैं।