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गिड़गिड़ाते रहे परिजन, मंदिर में पंचायत लगाकर करा दिया गर्भवती का तलाक

Mon, 23 Jan 2017 02:00 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Mon, 23 Jan 2017 02:00 PM IST
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panchayat orders divorce on 10 rs stamp
डेमो - फोटो : demo pic

मोहनलालगंज के एक मंदिर में रविवार दोपहर पंचायत ने झगड़ा सुलझाने के लिए आई गर्भवती और उसके पति के बीच तलाक का तुगलकी फरमान सुना दिया। आनन-फानन दस रुपये के स्टांप पेपर पर तलाक कराते हुए दान-दहेज का सामान भी वापस करा दिया। 

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पंचायत के इस फैसले से परिवारीजन और स्थानीय निवासी हतप्रभ रह गए। विवाहिता के गर्भवती होने का हवाला देते हुए मायकेवालों ने पंचों के हाथ-पैर जोड़े, पर किसी का दिल नहीं पसीजा। अंतत: पंचायत के फैसले के सामने दंपति और उसके परिवारीजनों को झुकना पड़ा। पुलिस ने मामले की जानकारी से इनकार किया है।
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मामला सिसेंडी गांव निवासी युवक और पीजीआई के एक गांव की युवती का है। दोनों की शादी तीन साल पहले हुई थी और एक बेटा भी है। पति की पिटाई से परेशान होकर महिला ने मायकेवालों को सूचना दी। लड़की के पिता ने दामाद और समधी से मिलकर बातचीत की। 
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सुलह-समझौते के बाद दोनों फिर साथ रहने लगे। विवाहिता फिर से गर्भवती हो गई। फिर युवक उसे प्रताड़ित करने लगा। मायके वालों ने सुलह की कोशिश की लेकिन ससुरालवाले नहीं माने। विवाहिता के पिता ने समझौते के लिए पंचायत से गुहार लगाई थी। 

रविवार को पंचायत ने दोनों पक्ष को मोहनलालगंज के एक मंदिर बुलाकर बातचीत की। पंचायत ने दंपति और परिवारीजनों से बातचीत के बाद दस रुपये के स्टांप पेपर पर तलाक लिखवाकर दोनों को अलग कर दिया।

तलाक पर आंखे मूंदे रहती है पु‌ल‌िस

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डेमो

जिस मंदिर में रविवार को पंचायत ने गर्भवती के तलाक का फैसला सुनाया, वहां ऐसे कई मामले पहले भी आ चुके हैं। अफसोसजनक यह है कि पंचायत की मनमानी के इन मामलों की जानकारी के बाद भी पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। कुछ लोग विरोध करते हैं, लेकिन पर पंचायत के डर से कोई आगे नहीं आता। 

पंचायत के फैसले से गर्भवती के पिता का दिल बैठ गया। उन्होंने उठने के कोशिश की लेकिन कदमों ने साथ नहीं दिया। वह लड़खड़ाए तो बेटी की आंखों में बंधा आंसुओं का बांध टूट पड़ा। पिता के साथ खड़े पड़ोसी ने उनकी बांह थामकर सहारा दिया। 

पिता ने कहा कि बेटी के जीवन की अभी तो शुरुआत हुई थी। अभी तो पहाड़ जैसी जिंदगी पड़ी है। एक बच्चा गोद में है तो एक पेट में पल रहा है। बोझिल कदमों और बुझे मन से वह बेटी को लेकर घर लौटे।

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