फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   panchayat election campaign in uttar pradesh

यूपी पंचायत चुनाव : नकद की जगह साड़ी, पायल, बिछुआ और नथुनी का ‘व्यवहार’

Fri, 02 Apr 2021 11:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा महेंद्र तिवारी, लखनऊ
महेंद्र तिवारी, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 02 Apr 2021 11:53 AM IST
सार

  • नकद की जगह वस्तुओं की भेंट ज्यादा मुफीद व असरदार मान रहे दावेदार
  • चुनावी घमासान के बीच मांगलिक आयोजनों से चर्चा में आया नया ट्रेंड
  • परदेसी मतदाताओं को बुलाने के लिए ट्रेन व हवाई टिकट तक का गिफ्ट

विज्ञापन
panchayat election campaign in uttar pradesh
पंचायत चुनाव - फोटो : amar ujala

विस्तार

पर्दे के पीछे साड़ी, शराब और नकदी बंटने की चर्चा लगभग हर पंचायत चुनाव में सुनने में आती रही है। पर, प्रदेश में 21 वीं सदी का पहला पंचायत चुनाव कुछ नए रंग-रूप में सामने आता नजर आ रहा है। चुनावी मैदान में उतरे तमाम सूरमा पुराने प्रयोगों के साथ समय और समाज के हिसाब से ‘व्यवहार’ बदलकर मतदाताओं को रिझाने में जुट गए हैं।

विज्ञापन


प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के साथ-साथ शादी-विवाह, बहू विदाई जैसे मांगलिक आयोजन भी पड़ रहे हैं। बच्चों के जन्म के बाद वाले बरही, मसवारा व मुंडन जैसे आयोजन हमेशा की तरह पड़ ही रहे हैं। पर, ये आयोजन चुनाव के दावेदारों के लिए मतदाताओं को रिझाने  का जरिया बन गए हैं। खास बात ये है कि गांव-गांव होने वाले इस तरह के आयोजनों पर सरकारी तंत्र की खास नजर नहीं होती। 
विज्ञापन


लिहाजा, दावेदार आचार संहिता के द्वंद्व से मुक्त होकर नए प्रयोगों के साथ व्यवहार पहुंचा रहे हैं। यह व्यवहार नकद कम कीमती वस्तुओं के रूप में ज्यादा नजर आ रहा है। कोई साड़ी दे रहा है तो कोई पायल व बिछुआ भेज रहा है। परिवार में वोट अगर ज्यादा हैं और प्रभाव भी पास पड़ोस में तो व्यवहार और भी वजन हो जाता है। यह नथुनी व अंगूठी तक में बदल जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पंचायत चुनाव का हाल जानने निकलिए तो चुनावी व्यवहार के बदलते स्वरूप के किस्से गांववासियों की जुबानी जगह-जगह सुने जा सकते हैं। होली के दौरान पिछले चार दिनों में गोंडा, बहराइच और बाराबंकी के भ्रमण के बीच इस तरह के कई किस्से सुनने को मिल गए।

ग्रामीण बताते हैं कि सरकार काफी सख्त है। ऐसे में दावेदार नकदी की जगह सामान को तरजीह देने लगे हैं। वह एहतियात भी बरत रहे हैं। मांगलिक आयोजनों में तो खुद पहुंचते हैं लेकिन व्यवहार समर्थकों के हाथ घर मालिक तक पहुंचाते हैं। इसी तरह दिल्ली, मुंबई, सूरत, लुधियाना, जालंधर जैसे दूर के शहरों में नौकरी कर रहे परिवारों को चुनाव में वोट डालने बुलाने के लिए ट्रेन व हवाई टिकट देने की भी चर्चा खूब है।

संवेदनशील छवि के लिए भी दांव
पंचायत चुनाव में प्रलोभन का एक रूप और नजर आ रहा है। कई जगह दावेदार बीमारी ग्रस्त लोगों के इलाज में बढ़चढ़ कर मदद कर रहे हैं। यह मदद वाहन से अस्पताल पहुंचाने, इलाज के लिए भर्ती कराने अथवा दवा आदि के लिए आर्थिक रूप में हो रहा है। आग लगने में बर्तन, कपड़ा, नकदी की मदद भी सामने आ रही है। बताते हैं कि चुनाव के बीच इस तरह की मदद प्रत्याशी अपनी संवेदनशील छवि निखारने में कर रहे हैं। 

जन्मदिन व वैवाहिक वर्षगांठ की सूचना में फेसबुक बन रहा मददगार
जानकार बताते हैं कि पंचायत चुनाव में जिला पंचायत वार्ड दर्जनों ग्राम पंचायतों को मिलाकर बनता है। इन दावेदारों के लिए फेसबुक सूचना का बड़ा माध्यम बनकर उभरा है। सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे दावेदार जन्मदिन व वैवाहिक वर्षगांठ की सूची फेसबुक से सुबह ही तैयार करा लेते हैं। ऐसे परिवारों को सुबह-सुबह बधाई-शुभकामना और फिर क्षेत्र भ्रमण के दौरान बुके या गिफ्ट के साथ पहुंचकर आत्मीयता दिखाना प्रचार के नए रूप में सामने आ रहा है।

हर अचंल में किसी न किसी रूप में चुनावी प्रलोभन : डा. पांडेय
आचार्य नरेंद्र देव किसान पीजी कालेज बभनान गोंडा में समाजशास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रेम प्रकाश पांडेय कहते हैं कि प्रदेश में अब भी गरीब व पिछड़े लोगों की तादाद काफी है। कम पढ़ा-लिखा मतदाता इन चुनावों को एक अवसर के रूप में देखता है तो प्रत्याशी के लिए चुनाव नाक का सवाल होता है। ऐसे में चालाक प्रत्याशी ऐसे मतदाता की कमजोरी का फायदा तरह-तरह के प्रलोभन देकर उठाते हैं। विधानसभा व लोकसभा चुनावों में राजनीतिक दल कई बार पूरा न हो सकने वाले लुभावने वादे कर लोगों का वोट हासिल करने का प्रयत्न करते हैं तो गांव स्तर पर होने वाले पंचायत चुनाव में प्रलोभनों का दांव चला जाता है।


वह कहते हैं कि प्रतिद्वंद्वी जितने प्रबल होते हैं, प्रलोभनों का वजन उसी हिसाब से तय होता है। जहां सामान्य प्रतिद्वंद्वी होते हैं वहां प्रलोभन शराब, 100-200 रुपये की साड़ी तक सिमट जाता है। जहां प्रबल प्रतिद्वंद्वी होते हैं वहां घर बनाने के लिए ईंट, घर में प्रयोग होने वाले सामान, शादी-विवाह व अन्य मांगलिक आयोजनों से जुड़ी वस्तुएं तक दी जाने लगी हैं। यह स्थिति किसी न किसी रूप में कमोवेश हर अंचल में नजर आती है। इस स्थिति में बदलाव के लिए मतदाताओं में जागरूकता व आचार संहिता पर सख्ती से अमल बहुत जरूरी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed