जानिए, 5 साल तक गोरखपुर में क्या किया ISI एजेंट ने
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आईएसआई एजेंट डॉक्टर समीर पांच साल तक गोरखपुर में रहा है। वह गोरखनाथ क्षेत्र में एक पावरलूम में काम करता था। शहर में अपना नेटवर्क खड़ा करने के बाद वह नेपाल चला गया था। पुलिस और खुफिया एजेंसियों को चकमा देने के लिए उसने अपने तीन नाम रखे थे।
एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक पकड़ा गया शातिर गोरखपुर एयरफोर्स के बारे में गोपनीय जानकारियां एकत्रित कर रहा था।
बेतिया, पश्चिम चंपारण के रहने वाले डॉक्टर समीर ने वर्ष 2002 से 2007 तक गोरखनाथ के रसूलपुर में रहा है।
यहां के एक पावरलूम में वह मजदूर के तौर पर काम करता था। आईएसआई एजेंट समीर शहर में अपना नेटवर्क खड़ा करने के बाद नेपाल के वीरता वीरगंज के श्रीपुर चला गया था। वहीं से वह जाली नोट के धंधे को संचालित करता था। भारतीय खुफिया एजेंसियों के साथ ही पुलिस को चकमा देने के लिए उसने अपने कई नाम रख लिए थे। लोग उसे अली अहमद और वसीम खान के नाम भी जानते हैं।
गोरखपुर एयरफोर्स का सर्वे कर रहा था शातिर
लखनऊ में पकड़े जाने के बाद समीर से हुई पूछताछ में चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं। आईएसआई अफसरों के निर्देश पर वह गोरखपुर एयरफोर्स का सर्वे करा रहा था।
कुछ दिन पहले नेपाल में मिले अफसरों ने यह काम दिया था। मामले की जानकारी के बाद एटीएस के साथ ही आईबी के अधिकारी नेपाल, गोरखपुर, लखनऊ के साथ ही बिहार में उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं।
नेपाल से भारत में जाली नोट की खेप आने की खबर पर एसटीएफ गोरखपुर की टीम सीओ विकास तिवारी के साथ डॉक्टर समीर के पीछे लगी थी। मुखबिर से मिली जानकारी के आधार पर लखनऊ में चारबाग रेलवे स्टेशन से जब उसे गिरफ्तार किया गया तो हकीकत का पता चल सका। खुफिया एजेंसियों को उम्मीद है कि डॉक्टर समीर से बड़ी जानकारी मिलेगी।