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अखिलेश ने दिया पद्मश्री विजेता को पेंशन देने का सुझाव, दी यह ठोस वजह

Wed, 20 Jul 2016 03:34 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Wed, 20 Jul 2016 03:34 PM IST
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padmashree winners should be given pension says cm akhilesh yadav
पद्मश्री विजेताओं के साथ सीएम व राज्यपाल - फोटो : amar ujala

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि पद्मश्री पुरस्कार पाने वालों को केंद्र सरकार को पेंशन देना चाहिए, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में और भी बेहतर काम कर सकें।

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उन्होंने यह बात मंगलवार को राजभवन में पद्मश्री पाने वाले यूपी के लोगों को सम्मानित करने के लिए आयोजित कार्यक्रम में कही। राज्यपाल राम नाईक ने उनके सुझाव से सहमति जताते हुए कहा कि इस बारे में वे केंद्र सरकार से बात करेंगे। 
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इस दौरान छह पद्मश्री विजेता विशिष्ट लोगों को राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा, समाजवादी सरकार ने हर क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया है।
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राज्य सरकार यश भारती पुरस्कार देती है। यह पुरस्कार पाने वालों को राज्य सरकार ने 50 हजार रुपये पेंशन देने का फैसला भी किया। चूंकि कवि, लेखक, कलाकार और पत्रकारों की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं होती, उन्हें पेंशन देने से वे अपने-अपने क्षेत्र में और बेहतर काम कर सकते हैं। 

इसलिए केंद्र सरकार को भी पद्म पुरस्कार विजेताओं को पेंशन देनी चाहिए।
राज्यपाल राम नाईक ने कहा, पद्म पुरस्कार पाने वालों का अपने प्रदेश में सम्मान नहीं होता तो यह अच्छी बात नहीं होती। 

इसलिए उन्होंने यह कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय किया। इस तरह के आयोजनों से दूसरे लोगों को भी अच्छा काम करने की प्रेरणा मिलती है। 

पद्म पुरस्कार पाने वालों से की बेहतर काम की अपील

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फाइल फोटो

गुरू पूर्णिमा का शुभ दिन हमेशा हमें बड़ों से सीखने के लिए प्रेरित करता है। साथ ही पद्म पुरस्कार पाने वालों से और भी बेहतर काम करने का आह्वान किया ताकि इससे बड़े पुरस्कार भी उन्हें मिल सकें। ‌

कहा कि यश भारती पुरस्कार पाने वालों को पेंशन देकर यूपी ने अच्छा काम किया है। अगर केंद्र भी इसका अनुकरण करे तो बेहतर होगा। यहां बता दें कि यूपी के 12 लोगों को इस साल पद्म भूषण और पद्मश्री पुरस्कार मिले थे। 

इनमें से छह लोगों श्रीभास चंद्र सुपकार, मालिनी अवस्थी, डॉ. शिवनारायण कुरील, डॉ. एसएस सरकार, प्रो. (डॉ.) दलजीत सिंह गंभीर और प्रो. ओंकारनाथ श्रीवास्तव को राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित किया गया।

पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने कहा कि जब से वैश्वीकरण की नीतियां अपनाई गई हैं, लोक संस्कृतियों की उपेक्षा का दौर शुरू हो गया है। वैश्वीकरण लोक संस्कृतियों का सत्यानाश कर रहा है। 

लोगों में अपनी स्थानीय बोली और लोक गीतों को लेकर हीनभावना भरी जा रही है। वह लोक गीत और लोक कला को सहेजने का काम कर रही हैं।

पद्मश्री डॉ. दलजीत सिंह ने कहा, वह पेशे से कार्डियोलॉजिस्ट हैं। लोगों को नई जिंदगी देना ईश्वर का काम है, लेकिन इस काम में वे साधन के रूप में हमेशा मरीजों के लिए उपलब्ध रहते हैं। मेडिकल का पेशा आज भी सबसे महान पेशों में से एक है। इसकी गरिमा बनाए रखने का वे सदैव प्रयास करते हैं।

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