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ऑक्सफेम ने जारी की रिपोर्ट, बेरोजगारी बढ़ा रहा विकास का मौजूदा मॉडल

Fri, 29 Mar 2019 03:26 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Fri, 29 Mar 2019 03:26 PM IST
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Oxfam issued report on situation of employment
ऑक्सफेम ने देश के मौजूदा विकास मॉडल को लेकर रिपोर्ट पेश की - फोटो : amar ujala
देश में विकास का मौजूदा मॉडल बेरोजगारी बढ़ाने का ही काम कर रहा है। ऑक्सफेम की रिपोर्ट के मुताबिक जितने निवेश का दावा सरकार करती है, उसका 10 प्रतिशत ही वास्तविक निवेश होता है। असंगठित सेक्टर के श्रमिकों की बहुतायत होने की वजह से उनके हितों की अनदेखी की जा रही है।  
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ऑक्सफेम ने रोजगार के हालात पर बृहस्पतिवार को यहां प्रेस क्लब में एक रिपोर्ट जारी की। इस अवसर पर क्षेत्रीय निदेशक नंदकिशोर सिंह ने बताया कि श्रम व रोजगार मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2017-18 में कहा गया है कि रोजगार सभी के दैनिक जीवन का हिस्सा है। सरकार की इस तरह की सोच के बाद भी हकीकत बिल्कुल अलग है।
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शैक्षिक योग्यता के बावजूद रोजगार मिलना कठिन है। अरुचिकर रोजगारों में फंसने की वजह से वेतन जहां बहुत कम है, वहीं शैक्षिक योग्यता से भी निम्न स्तर वाला काम लोग कर रहे हैं। 2018 में यूपी के पुलिस विभाग में चपरासी व संदेशवाहक केपदों के लिए 93 हजार आवेदन आए। इनमें से 3700 अभ्यर्थी पीएचडी, 28 हजार पीजी, 50 हजार ग्रेजुएट थे, जबकि इन पदों के लिए शैक्षिक योग्यता केवल पांचवीं पास थी।
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ऑक्सफेम ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि रोजगार सृजन के आंकड़े कम हुए हैं। खुद श्रम ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक बेरोजगारी चार दशक में अधिकतम स्तर 6.1 पर पहुंच गई। वर्ष 2011-12 और 2015-16 के बीच औद्योगिक क्षेत्र में भी 1.06 करोड़ रोजगार कम हो गए। कामगारों के लिए रोजगार की गुणवत्ता भी घटी है।

भ्रष्टाचार व विषमता करनी होगी दूर

2011-12 से पहले 50 प्रतिशत कामगारों को किसी न किसी रूप में रोजगार में सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध थी, लेकिन 2016 में 38 प्रतिशत कामगारों को ही सामाजिक सुरक्षा हासिल थी। नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनेाइजेशन (एनएसएसओ) के आंकड़ों के मुताबिक एक तिहाई मजदूरों के पास ही लिखित अनुबंध है। सरकारी सेवाओं तक में डॉक्टर, नर्स व शिक्षक जैसे रोजगार में अनुबंध की प्रवृत्ति बढ़ी है।

ऑक्सफेम ने सरकार को सुझाव दिया है कि भ्रष्टाचार दूर करने पर काम किया जाए। विषमता व बेरोजगारी बढ़ाने वाले याराना पूंजीवाद को नियंत्रित किया जाए। कर नीतियां ऐसी बनें जिनसे विषमता कम हो। कॉरपोरेट टैक्स में छूट देने का अतिरिक्त उत्साह उचित नहीं है। इससे मिलने वाले राजस्व को शिक्षा व सामाजिक सुरक्षा देने पर खर्च किया जाए।

77 प्रतिशत परिवारों में नियमित वेतन नहीं
श्रम मंत्रालय के आंकड़े को आधार बनाते हुए ऑक्सफेम ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 77 प्रतिशत परिवारों में नियमित वेतन पाने वाला एक भी सदस्य नहीं है। 82 प्रतिशत पुरुष और 92 प्रतिशत महिलाओं की मासिक आय 10 हजार रुपये से भी कम है। वहीं 22 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 5000 रुपये से कम है। अगर चार सदस्यों का एक परिवार लिया जाए तो इतने कम पैसे में उनकी बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो सकती हैं।
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