यूपी: 1.97 लाख प्रवासी श्रमिकों के खाते में नहीं पहुंची सहायता राशि, डीबीटी के जरिए मुख्यमंत्री ने किया था हस्तांतरण
उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले चरण में जिन प्रवासी श्रमिकों के खाते में डीबीटी के जरिए 1000-1000 रुपये का भुगतान किया था, उनमें से 1.97 लाख श्रमिकों के खाते में रकम पहुंची ही नहीं। अब दूसरे चरण के श्रमिकों के साथ इनके खाते में फिर से रकम भेजने की तैयारी है।
कोविड-19 महामारी के चलते लागू लॉकडाउन के बीच दूसरे राज्यों से अब तक 37.61 लाख प्रवासी श्रमिक यूपी लौटे हैं। राज्य सरकार ने इन्हें प्रति परिवार 1000-1000 रुपये देने का फैसला किया था।
पहले चरण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों 10 लाख 48 हजार 166 प्रवासी श्रमिकों के खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए 1000-1000 रुपये भेजे गए थे।
अब पता चला है कि इनमें से 8 लाख 34 हजार 46 श्रमिकों के खाते में ही रकम पहुंची। बाकी 1.97 लाख के बैंक एकाउंट संबंधी विवरण में खामी के कारण ट्रांजैक्शन फेल हो गया।
अब इनके खाते की खामियां दूर करने को लेकर फील्ड में युद्धस्तर पर काम चल रहा है। राहत आयुक्त संजय गोयल ने बताया कि दूसरे चरण के श्रमिकों के खाते में राशि हस्तांतरित करने की कार्रवाई अंतिम चरण में है। इन्हीं के साथ पहले चरण के फेल ट्रांजैक्शन वाले खातों में भी राशि हस्तांतरित कर दी जाएगी।
कोविड केयर फंड में आए 411 करोड़
महामारी से निपटने में राज्य सरकार के प्रयासों में आम लोगों ने भरपूर हिस्सेदारी निभाई है। एक रिपोर्ट के अनुसार यूपी कोविड केयर फंड में आम लोगों ने 196.73 करोड़ रुपये दिए हैं।
इस फंड में एक लाख रुपये से अधिक दान देने वालों की संख्या 1543 है। इसके अलावा सीएम रिलीफ फंड में तमाम लोगों ने राशि दी। इससे कोविड केयर फंड को 214.80 करोड़ रुपये मिले हैं। 14 जुलाई तक कोविड केयर फंड में 411.63 करोड़ रुपये आए थे।
श्रमिकों के लिए मददगार साबित हुई हेल्पलाइन 1070
प्रदेश सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान राज्य मुख्यालय पर 1070 हेल्पलाइन को विस्तार देते हुए एकीकृत आपदा नियंत्रण केंद्र शुरू किया था। राहत आयुक्त संजय गोयल के निर्देशन में इस कंट्रोल रूम ने प्रवासी श्रमिकों को आश्रय स्थल में ठहराने, वहां राशन दिलाने, भोजन सहित अन्य सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया।
रिपोर्ट के मुताबिक 14 जुलाई तक इस हेल्पलाइन पर 1,18,396 कॉल आईं। इनमें से 1,17,106 कॉल का निस्तारण किया जा चुका है।