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Lucknow News: बिजली महकमे में आउटसोर्स महिलाओं की छिन गई नौकरी
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हुसैनगंज स्थित कॉल सेंटर।
लखनऊ। खर्चों में कटौती के नाम पर बिजली महकमे के एक फैसले ने राजधानी की आउटसोर्स महिला कर्मचारियों के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया है। हुसैनगंज स्थित कॉल सेंटर 1912 में 10-11 वर्षों से निरंतर सेवाएं दे रही 26 महिला कर्मचारियों को एक अप्रैल से अचानक नौकरी से निकाल दिया गया है।
पीड़ित कर्मचारी गरिमा बाजपेयी ने बताया कि कॉल सेंटर से अब तक कई चरणों में 100 से अधिक कंप्यूटर ऑपरेटरों को हटाया जा चुका है। हैरान करने वाली बात यह है कि 10-10 साल का अनुभव रखने वाली इन महिलाओं को हटाकर उनकी जगह नए लोगों को आउटसोर्स पर नियुक्त कर लिया गया है। गरिमा का कहना है कि उन्हें हटाने के बजाय विभाग के अन्य कार्यों में समायोजित किया जा सकता था, लेकिन प्रबंधन ने कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई।
एक अन्य कर्मचारी ज्योति ने बताया कि हमें महज 12 हजार रुपये पारिश्रमिक मिलता था, जबकि हमारा कार्यभार 60 हजार रुपये वेतन पाने वाले नियमित कर्मचारियों के बराबर था। इन महिलाओं ने न केवल विषम परिस्थितियों में काम किया, बल्कि विभाग की कॉल सेंटर प्रणाली सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई।
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नहीं हुई सुनवाई
नौकरी जाने के बाद सोनिका, अलका और उनकी साथियों ने मुख्यमंत्री के जनता दरबार से लेकर ऊर्जा मंत्री की चौखट तक गुहार लगाई। बताया कि हर जगह उन्हें केवल एक से दूसरे दफ्तर (अध्यक्ष या प्रबंध निदेशक) भेजने की सलाह दी गई। कर्मचारियों ने सवाल उठाया कि जब वे अनुभवी थीं, तो उन्हें हटाकर नए लोगों को रखने का क्या तर्क है?
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पीड़ित कर्मचारी गरिमा बाजपेयी ने बताया कि कॉल सेंटर से अब तक कई चरणों में 100 से अधिक कंप्यूटर ऑपरेटरों को हटाया जा चुका है। हैरान करने वाली बात यह है कि 10-10 साल का अनुभव रखने वाली इन महिलाओं को हटाकर उनकी जगह नए लोगों को आउटसोर्स पर नियुक्त कर लिया गया है। गरिमा का कहना है कि उन्हें हटाने के बजाय विभाग के अन्य कार्यों में समायोजित किया जा सकता था, लेकिन प्रबंधन ने कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई।
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एक अन्य कर्मचारी ज्योति ने बताया कि हमें महज 12 हजार रुपये पारिश्रमिक मिलता था, जबकि हमारा कार्यभार 60 हजार रुपये वेतन पाने वाले नियमित कर्मचारियों के बराबर था। इन महिलाओं ने न केवल विषम परिस्थितियों में काम किया, बल्कि विभाग की कॉल सेंटर प्रणाली सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई।
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नहीं हुई सुनवाई
नौकरी जाने के बाद सोनिका, अलका और उनकी साथियों ने मुख्यमंत्री के जनता दरबार से लेकर ऊर्जा मंत्री की चौखट तक गुहार लगाई। बताया कि हर जगह उन्हें केवल एक से दूसरे दफ्तर (अध्यक्ष या प्रबंध निदेशक) भेजने की सलाह दी गई। कर्मचारियों ने सवाल उठाया कि जब वे अनुभवी थीं, तो उन्हें हटाकर नए लोगों को रखने का क्या तर्क है?