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दिल्ली के बाद देश में अंग प्रत्यारोपण का दूसरा सबसे बड़ा सेंटर बनेगा लखनऊ
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चंद्रभान यादव, लखनऊ। अंग प्रत्यारोपण के मामले में राजधानी हब बनने जा रही है। यहां सरकारी व निजी क्षेत्र को मिलाकर हर साल करीब 300 गुर्दा प्रत्यारोपण हो रहा है। अब लिवर प्रत्यारोपण में भी सरकारी के साथ निजी संस्थान भी आगे आ रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि 2022 तक राजधानी अंग प्रत्यारोपण के मामले में दिल्ली के बाद दूसरे नंबर पर आ जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अंग प्रत्यारोपण पर जोर देते हुए मदद का आश्वासन दे चुके हैं। गुरुवार को निजी अस्पताल में ऑर्गन ट्रांसप्लांट यूनिट का शुभारंभ करते हुए उन्होंने फिर यह प्रतिबद्धता दोहराई है।
एसजीपीजीआई में चल रही है तैयारी
एसजीपीजीआई में हर साल करीब 200 लोगों का गुर्दा प्रत्यारोपण किया जा रहा है। यहां कुछ लोगों का लिवर प्रत्यारोपण किया गया था, लेकिन दो साल से बंद है। अब इसे फिर से चलाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए हेपेटोलॉली विभाग की ओपीडी19 फरवरी से शुरू हो गई है। इसमें लिवर प्रत्यारोपण वाले मरीजों को चिह्नित कर उनके परिजनों को डोनेशन के लिए काउंसलिंग की जा रही है। निदेशक प्रो. आरके धीमान ने कहा कि संस्थान में हार्ट, पैंक्रियाज ट्रांसप्लांट की भी तैयारी है। नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन की ओर से एसजीपीजीआई को स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट (सोटो) की मान्यता दी गई है। संस्थान प्रदेश के 27 चिकित्सा संस्थानों व मेडिकल कॉलेजों की श्रृंखला बनाकर विभिन्न आर्गन की रजिस्ट्री करेगा। इससे प्रदेश में विभिन्न आर्गन की जरूरत और डोनेशन की स्थिति का डाटा तैयार हो सकेगा। एक ब्रेन डेड से 8 लोगों की जान बचाई जा सकती है।
केजीएमयू ने शुरू की फिर से तैयारी
केजीएमयू में पिछले साल 10 लोगों का लीवर प्रत्यारोपण किया गया था। कोरोना के चलते बंद हुआ लिवर प्रत्यारोपण भी फिर से शुरू करने का विचार है। कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन पुरी का कहना है कि किडनी ट्रांसप्लांट शुरू करने के लिए नेफ्रोलॉजिस्ट की तलाश की जा रही है।
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लोहिया संस्थान में चल रहा किडनी ट्रांसप्लांट
लोहिया संस्थान में किडनी ट्रांसप्लांट लगातार किया जा रहा है। खासतौर से गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले मरीजों पर यहां फोकस है। यहां 2 साल के अंदर 50 से ज्यादा लोगों के किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं।
निजी संस्थानों में लगी होड़
राजधानी के चार चिकित्सा संस्थानों में किडनी ट्रांसप्लांट किया जा रहा है। ये संस्थान लिवर ट्रांसप्लांट की भी तैयारी में जुटे हैं। इस बीच दो अन्य चिकित्सा संस्थान भी राजधानी में पैर जमाने की तैयारी में हैं।
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एसजीपीजीआई में चल रही है तैयारी
एसजीपीजीआई में हर साल करीब 200 लोगों का गुर्दा प्रत्यारोपण किया जा रहा है। यहां कुछ लोगों का लिवर प्रत्यारोपण किया गया था, लेकिन दो साल से बंद है। अब इसे फिर से चलाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए हेपेटोलॉली विभाग की ओपीडी19 फरवरी से शुरू हो गई है। इसमें लिवर प्रत्यारोपण वाले मरीजों को चिह्नित कर उनके परिजनों को डोनेशन के लिए काउंसलिंग की जा रही है। निदेशक प्रो. आरके धीमान ने कहा कि संस्थान में हार्ट, पैंक्रियाज ट्रांसप्लांट की भी तैयारी है। नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन की ओर से एसजीपीजीआई को स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट (सोटो) की मान्यता दी गई है। संस्थान प्रदेश के 27 चिकित्सा संस्थानों व मेडिकल कॉलेजों की श्रृंखला बनाकर विभिन्न आर्गन की रजिस्ट्री करेगा। इससे प्रदेश में विभिन्न आर्गन की जरूरत और डोनेशन की स्थिति का डाटा तैयार हो सकेगा। एक ब्रेन डेड से 8 लोगों की जान बचाई जा सकती है।
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केजीएमयू ने शुरू की फिर से तैयारी
केजीएमयू में पिछले साल 10 लोगों का लीवर प्रत्यारोपण किया गया था। कोरोना के चलते बंद हुआ लिवर प्रत्यारोपण भी फिर से शुरू करने का विचार है। कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन पुरी का कहना है कि किडनी ट्रांसप्लांट शुरू करने के लिए नेफ्रोलॉजिस्ट की तलाश की जा रही है।
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लोहिया संस्थान में चल रहा किडनी ट्रांसप्लांट
लोहिया संस्थान में किडनी ट्रांसप्लांट लगातार किया जा रहा है। खासतौर से गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले मरीजों पर यहां फोकस है। यहां 2 साल के अंदर 50 से ज्यादा लोगों के किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं।
निजी संस्थानों में लगी होड़
राजधानी के चार चिकित्सा संस्थानों में किडनी ट्रांसप्लांट किया जा रहा है। ये संस्थान लिवर ट्रांसप्लांट की भी तैयारी में जुटे हैं। इस बीच दो अन्य चिकित्सा संस्थान भी राजधानी में पैर जमाने की तैयारी में हैं।