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Lucknow News: लोहिया संस्थान में हो सकेगा ब्रेनडेड मरीजों का अंगदान
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लखनऊ। डाॅ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में अब ब्रेनडेड हो चुके मरीजों के अंगदान हो सकेंगे। इसके लिए संस्थान की गवर्निंग बाॅडी में प्रस्ताव लाया जाएगा। इसके बाद ब्रेनडेड मरीजों के लिवर, किडनी और अन्य अंग जरूरतमंदों में प्रत्यारोपित किए जा सकेंगे।
लोहिया संस्थान में इस समय किडनी प्रत्यारोपण हो रहे हैं। अभी तक किडनी का दान सिर्फ मरीज के रिश्तेदार से ही लिया जाता है। वहीं, अब ब्रेनडेड मरीजों से भी किडनी, लिवर और अन्य अंग दान में लिए जा सकेंगे। इसके लिए संस्थान को चिकित्सा शिक्षा विभाग महानिदेशालय से मंजूरी मिल गई है। संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने बताया कि कई बार हादसे में शिकार घायल ब्रेनडेड हो जाते हैं। इनके परिजनों की काउंसिलिंग करके अंगदान के लिए प्रेरित किया जाएगा।
ब्रेनडेड के लिए बनेगी समिति
संस्थान में ब्रेनडेड हो चुके मरीजों को प्रमाणित करने के लिए लोहिया संस्थान में विशेष समिति बनेगी। इस समिति में कई विशेषज्ञ होते हैं जो ब्रेनडेड का प्रमाणपत्र देते हैं।
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संस्थान वहन करेगा खर्च
ब्रेनडेड व्यक्ति से अंग दान में लेने के लिए काफी खर्च करने होते हैं। प्रस्ताव है कि यह खर्च संस्थान वहन करे। अंगदान करने वाले व्यक्ति से खर्च वहन करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती है। वहीं, अंग पाने वाले व्यक्ति को भी इसकी लागत वहन करने के लिए नहीं कहा जा सकता। ऐसे में किसी विशेष कोष के माध्यम से अंगदान का खर्च वहन किया जाएगा। वहीं, प्रत्यारोपण का खर्च अंग पाने वाले मरीज को वहन करना होगा।
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लोहिया संस्थान में इस समय किडनी प्रत्यारोपण हो रहे हैं। अभी तक किडनी का दान सिर्फ मरीज के रिश्तेदार से ही लिया जाता है। वहीं, अब ब्रेनडेड मरीजों से भी किडनी, लिवर और अन्य अंग दान में लिए जा सकेंगे। इसके लिए संस्थान को चिकित्सा शिक्षा विभाग महानिदेशालय से मंजूरी मिल गई है। संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने बताया कि कई बार हादसे में शिकार घायल ब्रेनडेड हो जाते हैं। इनके परिजनों की काउंसिलिंग करके अंगदान के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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ब्रेनडेड के लिए बनेगी समिति
संस्थान में ब्रेनडेड हो चुके मरीजों को प्रमाणित करने के लिए लोहिया संस्थान में विशेष समिति बनेगी। इस समिति में कई विशेषज्ञ होते हैं जो ब्रेनडेड का प्रमाणपत्र देते हैं।
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संस्थान वहन करेगा खर्च
ब्रेनडेड व्यक्ति से अंग दान में लेने के लिए काफी खर्च करने होते हैं। प्रस्ताव है कि यह खर्च संस्थान वहन करे। अंगदान करने वाले व्यक्ति से खर्च वहन करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती है। वहीं, अंग पाने वाले व्यक्ति को भी इसकी लागत वहन करने के लिए नहीं कहा जा सकता। ऐसे में किसी विशेष कोष के माध्यम से अंगदान का खर्च वहन किया जाएगा। वहीं, प्रत्यारोपण का खर्च अंग पाने वाले मरीज को वहन करना होगा।