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UP: जबरन स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का विरोध, नियामक आयोग को दिया पत्र; मुख्यमंत्री से भी हस्तक्षेप की मांग
Fri, 01 May 2026 09:16 AM IST
Bhupendra Singh
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Fri, 01 May 2026 09:16 AM IST
सार
यूपी में जबरन स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का विरोध करते हुए नियामक आयोग को पत्र दिया गया है। मुख्यमंत्री से भी हस्तक्षेप की मांग की गई है। आरडीएसएस में मीटर लगाने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2028 कर दी गई है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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प्रीपेड स्मार्ट मीटर। (सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
यूपी में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने जबरन मीटर लगाए जाने का विरोध करते हुए विद्युत नियामक आयोग को पत्र सौंपा है। मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के अध्यक्ष और सदस्य से मुलाकात कर इस मुद्दे को उठाया।
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उन्होंने सवाल किया कि जब आरडीएसएस (रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम) के तहत मीटर बदलने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दी गई है, तो फिर पाॅवर कॉरपोरेशन इतनी जल्दबाजी क्यों कर रहा है। उनका कहना है कि प्रदेश में करीब 75 लाख उपभोक्ताओं के घरों में बिना अनुमति स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं, जिससे व्यापक असंतोष है।
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परिषद का दावा है कि अब स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य नहीं हैं और अन्य राज्यों में उपभोक्ताओं को विकल्प दिया जा रहा है। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में नए उपभोक्ताओं को केवल प्रीपेड मीटर ही दिए जा रहे हैं। इस मुद्दे पर प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं।
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वर्मा ने यह भी कहा कि केवल मीटर की सटीकता जांचना पर्याप्त नहीं है। पूरे सिस्टम मीटर, एमडीएम, एचईएस और क्लाउड को एक साथ जोड़कर प्रीपेड बिलिंग के आधार पर रोजाना परीक्षण किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि तभी मीटर जंपिंग और रीडिंग में गड़बड़ी जैसी समस्याओं का सही पता चल सकेगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की कि जब तक सभी तकनीकी और उपभोक्ता हितों से जुड़े मुद्दे स्पष्ट न हो जाएं, तब तक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।