विपक्ष ने जहरीली शराब से मौतों पर मांगा सीएम का इस्तीफा, किया सदन का बहिष्कार
- विधानसभा में सपा-बसपा और कांग्रेस के विरोध की वजह से नहीं हो सका प्रश्नकाल
- विपक्ष ने सीबीआई जांच, मृतक परिजनों को 25 लाख मुआवजा व नौकरी की मांग उठाई
- सरकार ने विपक्ष पर पूर्वाग्रह से ग्रस्त होने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का एलान
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विस्तार
प्रदेश में जहरीली शराब से मौतों का मामला सोमवार को फिर विधानसभा में गूंजा जिससे प्रश्नकाल में एक भी सवाल नहीं हो सका। बाद में चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने मुख्यमंत्री व आबकारी मंत्री के इस्तीफे और हाईकोर्ट के मौजूदा जज के निर्देशन में सीबीआई जांच कराने की मांग की। संसदीय कार्यमंत्री ने घटना की एसआईटी जांच कराने, घटना में संलिप्त लोगों के खिलाफ मृत्युदंड की धारा में एफआईआर दर्ज कराने और पीड़ितों की सहायता से जुड़ी जानकारी दी लेकिन इससे विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ। समूचे विपक्ष ने सरकार पर घटना को लेकर संवदेनशील न होने का आरोप लगाते हुए पूरे दिन के लिए सदन का बहिष्कार कर दिया।
सुबह ग्यारह बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी की अनुपस्थिति में यह मामला सपा के संजय गर्ग, बसपा नेता लालजी वर्मा व कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू ने एक साथ उठाया। विपक्षी सदस्यों ने जहरीली शराब से मौतों को बेहद गंभीर बताते हुए प्रश्नकाल स्थगित कर मामले पर चर्चा कराने मांग की लेकिन विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने प्रश्नकाल के बाद ही सुनने को कहा। इसके बाद विपक्षी सदस्य वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। सदन अव्यवस्थित होते देख अध्यक्ष ने पहले आधे घंटे और उसकेबाद पूरे प्रश्नकाल के लिए सदन स्थगित करने का एलान किया।
दोपहर 12.20 बजे सदन फिर शुरू हुआ तो विधानसभा अध्यक्ष ने सपा, बसपा और कांग्रेस के नेताओं को बारी-बारी घटना पर बोलने का मौका दिया। इसके बाद संसदीय कार्यमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए सरकार द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी दी और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई का एलान किया। लेकिन, विपक्ष खन्ना के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और बारी-बारी से तीनों दलों के सदस्य अपने-अपने नेता के नेतृत्व में सरकार की कार्रवाई से असंतोष जताते हुए पूरे दिन के लिए सदन का बहिष्कार कर गए। कांग्रेस की ओर से बहिष्कार के समय लल्लू अकेले नजर आए।
हाईकोर्ट के जज के निर्देशन में हो सीबीआई जांच : सपा
सपा के संजय गर्ग ने कहा कि सहारनपुर में 88 लोगों की जान चली गई। पूरे प्रदेश में जहरीली शराब से मौतें होती रही हैं। पहले कार्रवाई होती तो यह नौबत नहीं आती। उन्होंने कहा कि शासन व प्रशासन संवेदनहीन है। घटना को तेरहवीं भोज से जोड़ना घटना को हल्का करना व शराब माफिया को बचाने का प्रयास है।जब भी घटना सामने आती है कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। ठीक से पैरवी न होने से अभियुक्त छूटकर फिर वही काम करने लगते हैं। उन्होंने शराब पर गौ कल्याण सेस लगाने पर भी सवाल उठाए। गर्ग ने घटना की हाईकोर्ट के मौजूदा जज की निगरानी में सीबीआई जांच कराने, जिन परिवारों में किसी सदस्य की मृत्यु हुई है उनके परिवारों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की।
आबकारी मंत्री इस्तीफा दें : बसपा
बसपा नेता लालजी वर्मा ने जहरीली शराब से मौतों को दर्दनाक व शर्मशार करने वाली घटना बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में सहयोगी दल केसांसद ने सरकार की देखरेख में शराब माफियाओं के काम करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि घटना में सीओ को सस्पेंड किया गया लेकिन एसपी को बख्श दिया गया। थाने पर सीओ की जगह कप्तान का नियंत्रण होता है। उन्होंने हाईकोर्ट जज के निर्देशन में सीबीआई जांच व 25-25 लाख रुपये के मुआवजे के साथ आबकारी मंत्री के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि इस घटना के लिए डीएम व एसएसपी भी जिम्मेदार हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार को सीबीआई जांच में दिक्कत है तो संसदीय कमेटी गठित कर जांच करा लें। इस घटना से जनता में काफी आक्रोश है।
मुख्यमंत्री इस्तीफा दें : कांग्रेस
कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू ने कहा जहरीली शराब से मौतों की पुरानी घटनाओं की चर्चा करते हुए कहा कि सरकार ने तभी सख्त कार्रवाई की होती तो यह स्थिति न आती। उन्होंने आरोप लगाया कि दो जनवरी को ही मुख्यमंत्री को अपने क्षेत्र में अवैध शराब बनाए जाने की जानकारी दे दी थी। लाखों लीटर शराब बरामद हुए लेकिन छोटे-छोटे लोगों को जेल भेज दिया गया, शराब माफिया पर कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने जहरीली शराब से मौतों के लिए मुख्यमंत्री के इस्तीफे और मृतकों के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने भी हाईकोर्ट जज के निर्देशन में प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग का समर्थन किया। उन्होंने सरकार की ओर से पीड़ित परिजनों के घर न जाने की आलोचना की।
घटना में लिप्त कोई भी बच नहीं पाएगा, सरकार पीड़ितों के साथ : खन्ना
संसदीय कार्यमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने विपक्ष पर पूर्वाग्रह से ग्रस्त होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की पूरी संवेदना पीड़ित परिवारों के साथ है। घटना में आबकारी एक्ट के अंतर्गत मृत्युदंड की धारा-60 ए में एफआईआर दर्ज की गई है। घटना की तह तक जाने के लिए एडीजी रेलवे की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया गया है जिसमें गोरखपुर और सहारनपुर के मंडलायुक्त व आईजी सदस्य हैं। एसआईटी 10 दिन में रिपोर्ट दे देगी। घटना में लिप्त कोई बच नहीं पाएगा। सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।
मंत्री ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि घटना में प्रथमदृष्टया दोषी नजर आने वाले कुशीनगर व सहारनपुर के संबंधित पुलिस क्षेत्राधिकारियों व जिला आबकारी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। थाने की पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जिन लोगों की मृत्यु की पुष्टि हुई है उनके परिजनों को 2-2 लाख रुपये मुआवजा दिया गया है। गंभीर रूप से पीड़ित लोगों को 50-50 हजार की सहायता दी गई है। इलाज के लिए मेरठ भेजे गए लोगों में जिनकी मृत्यु हुई है उनका बिसरा प्रिजर्व किया गया है। रिपोर्ट आने पर यदि जहरीली शराब से किसी की मौत की पुष्टि हुई तो संबंधित के परिवारों को भी सहायता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई सफेदपोश घटना में लिप्त मिला तो एसआईटी उसे सामने लाएगी।
खन्ना ने विपक्ष की सीबीआई जांच की मांग पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि कभी सीबीआई पर ऊंगली उठाते हैं तो कभी उसी से जांच कराने की मांग करते हैं। उन्होंने सपा और बसपा शासनकाल में 2008 से 2017 तक जहरीली शराब से हुई मौतों के आंकड़े गिनाए। बताया, वर्ष 2008 में 16, 2009 में 53, 2010 में 82, 2011 में13, 2012 में 18, 2013 में 52, ,2014 में 5, 2015 में 59, 2016 में 41, 2017 में 18 लोगों की मौत हुई। इन 357 मौतों में कभी भी सीबीआई जांच नहीं कराई गई। उन्होंने कहा कि विपक्ष जब सत्ता में होता तो दूसरा और जब विपक्ष में होता है तो दूसरा पैमाना दिखाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सदस्य अपने नेता के प्रदेश भ्रमण को देखते हुए सदन के जाने का बहाना ढूढ़ रहे थे।