लखनऊ। शिया पीजी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर व इतिहास की प्रवक्ता डॉ. मंदाकिनी राय ने कहा कि सावित्रीबाई और फातिमा शेख ने महिला शिक्षा को ज्ञान की कुंजी माना था। काफी विरोध के बाद भी वे अपने लक्ष्य पर अडिग रहीं। आज भी ऐसे आंदोलन को जारी रखने की जरूरत है। शिक्षा ही सामाजिक बदलाव और समानता की सबसे बड़ी ताकत है। मौका था रविवार को एपवा, जन संस्कृति मंच और आइसा के संयुक्त तत्वावधान में सिटी स्टेशन के निकट एसबीएम लाइब्रेरी में आयोजित सावित्रीबाई फुले व फातिमा शेख की स्मृति में परिसंवाद व कवि गोष्ठी का। एपवा जिला संयोजक सरोजिनी बिष्ट ने बढ़ती हिंसा और महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर चिंता जताई और संगठित संघर्ष की जरूरत बताई। दूसरे सत्र में कवि गोष्ठी में विमल किशोर, हेना रिजवी, रेनू शुक्ला, साजिदा सबा, प्रिया वर्मा आदि ने कविताओं व शायरी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। एपवा की कमला गौतम ने बताया कि नौ जनवरी तक सावित्रीबाई-फातिमा शेख की स्मृति में एपवा की ओर से जन अभियान चलाया जा रहा है। इस अवसर पर सईदा सायरा, कौशल किशोर, फरजाना महदी, सुचित माथुर आदि मौजूद रहे।

परिसंवाद में बोलतीं शिया पीजी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर व इतिहास की प्रवक्ता डॉ. मंदाकिनी रा