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UP: सरकारी संस्थानों को ही मिलेगा सांपों का जहर निकालने का लाइसेंस, अवैध रूप से ड्रग्स में होता है इस्तेमाल

Wed, 15 Nov 2023 03:07 PM IST
ishwar ashish अजित बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ
अजित बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 15 Nov 2023 03:07 PM IST
सार

नोएडा की रेव पार्टी का मामला सामने आने पर उच्चस्तरीय समिति ने मामले में सिफारिश की है। निजी क्षेत्र को लाइसेंस देने पर रोक लगाई जाएगी। इसे सांपों की तस्करी रोकने के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।

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Only government institutions will be allowed to remove the venom of snakes.
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : iStock

विस्तार

सांपों को पकड़ने, उनका जहर निकालने और व्यापार करने का लाइसेंस अब सिर्फ सरकारी संस्थानों को ही मिलेगा। नोएडा की चर्चित रेव पार्टी में सांपों के अनधिकृत प्रयोग का मामला सामने आने पर उच्चस्तरीय समिति ने यह सिफारिश की है। इससे जहां निजी क्षेत्र को सांपों का विष निकालने की अनुमति पर रोक लगना तय है। वहीं, इसे सांपों की तस्करी रोकने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है।

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वर्तमान में सांप पकड़ने, उसका जहर निकालने और परिवहन की अनुमति प्रदेश के प्रमुख मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव देते हैं। यह अनुमति निजी क्षेत्र को भी देने का प्रावधान है। मौजूदा प्रक्रिया की जांच के लिए मुख्य वन संरक्षक नीरज कुमार व एसएन मिश्रा, उप मुख्य वन जीव प्रतिपालक तौफीक अहमद और लखनऊ चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला की समिति बनाई गई थी। इस समिति ने शासन को रिपोर्ट भेज दी है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्प विषदोहन के लिए रखे जाने वाले सांपों के पिजड़ों की डिजाइन केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, नई दिल्ली के अनुरूप होनी चाहिए। जबकि वर्तमान में प्राधिकरण की ओर से इसके परीक्षण की व्यवस्था नहीं है। निजी क्षेत्र में सर्प विषदोहन केंद्र की स्थापना होने से इन केंद्रों पर लाए जाने वाले सांपों की संख्या, उनके स्वास्थ्य की स्थिति और मृत्यु होने पर सूचित करने की प्रक्रिया को भरोसेमंद बनाना मुश्किल है। निजी केंद्र वन विभाग नियंत्रित परिसरों में स्थित न होने के कारण इन पर लगातार निगरानी भी संभव नहीं है।


रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सांप के विष की कीमत अत्यधिक है। इसलिए इनकी वैध खरीद-फरोख्त सुनिश्चित किया जाना जरूरी है। वर्तमान व्यवस्था में यह संभव नहीं है। निजी केंद्रों वाली व्यवस्था में विष के अवैध व्यापार की आशंका काफी बढ़ जाती है। सांपों के जहर का अवैध रूप से ड्रग्स के तौर पर प्रयोग भी चिंता का सबब है। इसके अलावा सांपों का जहर निकालने में ऐसी विधि अपनाई जानी चाहिए, जिससे कम से कम सांपों से अधिक से अधिक जहर मिल सके। इसके लिए वैज्ञानिक तौर-तरीके अपनाना जरूरी है। उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है। नोएडा की रेव पार्टी जैसे हालात पर काबू पाने के लिए इन सिफारिशों को स्वीकार किया जाना तय माना जा रहा है।

इसलिए भी विषदोहन प्रक्रिया को वैज्ञानिक आधार देना जरूरी
लाइसेंस की वर्तमान व्यवस्था में पकड़े जाने के बाद सांपों के भोजन की गुणवत्ता को सुनिश्चित किया जाना भी मुश्किल है। सर्प विष विदोहन केंद्रों पर सांपों के लिए तापमान और आर्द्रता नियंत्रित करना भी जरूरी है। इन सब स्थितियों को देखते हुए समिति ने सिफारिश की कि विष दोहन की प्रक्रिया को वैज्ञानिक आधार देने के साथ ही राजस्व में वृद्धि के लिए यह जरूरी है कि सर्प विषदोहन का काम राजकीय परिसरों में राज्य सरकार की संस्थाओं- प्राणि उद्यानों, वन विभाग के क्षेत्रीय प्रभागों, राजकीय पशु-चिकित्सा महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों में ही किया जाए।

यूपी में दो विषदोहन केंद्र, पर लाइसेंस का नहीं हुआ नवीनीकरण
यूपी में सांपों का विष निकालने के लिए बहराइच और बाराबंकी में एक-एक केंद्र चल रहे थे लेकिन इनके लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया गया है। बहराइच के केंद्र का जून-2022 और बाराबंकी के केंद्र का जुलाई 2021 के बाद से नवीनीकरण नहीं हुआ है। हालांकि एक मत यह भी है कि जब तक नई व्यवस्था लागू नहीं होती है, तब तक मानकों को पूरा कराते हुए इन दोनों केंद्रों को चलाने की अनुमति दी जाए। जिससे एंटी वेनम इंजेक्शन (सांप काटने पर प्रयुक्त होने वाला) बनाने के लिए वेनम (जहर) की आपूर्ति हो सके। एंटी वेनम इंजेक्शन सांप के जहर से ही तैयार होता है।

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