लखनऊ। किसी भी आपात स्थिति में लोगों को बाहर निकालने के लिए इमरजेंसी एग्जिट का रास्ता चौड़ा और बाधा रहित होना चाहिए। आग लगने पर कभी भी लिफ्ट का इस्तेमाल न करें, केवल सीढ़ियों का ही रुख करें। सुरक्षित निकासी मार्ग से ही जीवनदान मिल सकता है। ये बातें शनिवार को गोमतीनगर स्थित होटल में फायर एंड सिक्योरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यक्रम में लखनऊ चैप्टर के अध्यक्ष पुनीत जायसवाल ने कहीं।
नेशनल बिल्डिंग कोड्स फॉर सस्टेनेबिलिटी के नए नियमों पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। आग में जान की रक्षा करने के उपाय बताए। जोर दिया कि हर व्यावसायिक और आवासीय परिसर में आधुनिक स्मोक डिटेक्टर और वाटर स्प्रिंकलर चालू हालत में होने चाहिए। आग लगने के शुरुआती तीन से पांच मिनट बेहद अहम होते हैं। अगर शुरुआती धुएं को ही अलार्म पकड़ ले, तो बड़ा हादसा टल सकता है। विशेषज्ञों ने बताया कि शहरों में 70% से अधिक आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगती है। नए मानकों के तहत अब इमारतों में हाई-क्वालिटी फायर-रिटार्डेंट (आग प्रतिरोधी) वायरिंग और ऑटोमैटिक ट्रिपिंग सिस्टम अनिवार्य किया जा रहा है, ताकि ओवरलोडिंग होते ही बिजली अपने आप कट जाए। इस अवसर पर सचिव मयंक भट्ट, प्रेसिडेंट दीपक सिंह, क्षेत्रीय निदेशक सौरभ अग्रवाल, सुनील प्रजापति आदि पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कई जरूरी जानकारियां दीं।